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अधिवक्ता पर जानलेवा हमला करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ चार दिन बाद भी नहीं दर्ज हुआ एफआईआर

रिहाई मंच ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, रिहाई मंच जल्द उतरौला का दौरा करेगा

लखनऊ। रिहाई मंच ने भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों को उठाने वाले उतरौला, बलरामपुर के अधिवक्ता मोहम्मद मसूद रजा पर पुलिस हमले के चार दिन बाद भी एफआईआर दर्ज न होने पर आक्रोश व्यक्त किया है.
बलरामपुर के उतरौला थाने में पिछले दिनों एडवोकेट मोहम्मद मसूद रजा पर हमले के बाद आज उनके भाई सेराजुल हक और अब्दुल हफीज खान ने रिहाई मंच से मुलाकात कर बताया कि चार दिन बीत जाने के बाद भी एफआईआर नहीं दर्ज हुई है।
रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव से एडवोकेट मसूद रजा ने जो गंभीर रुप से घायल हैं, फोन पर बताया कि उन्होंने इसकी शिकायत एसपी बलरामपुर, मुख्यमंत्री, बार काउंसिल, डीजीपी, मानवाधिकार आयोग और अन्य जगहों पर की है। उतरौला बार एसोशिऐसन ने कोतवाल सहित दोषी पुलिस कर्मियों के निलंबन की मांग की है। इस पर एसपी, बलरामपुर ने एफआईआर दर्ज करने का आष्वासन दिया है पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय स्तर पर यह भी सूचना है कि पुलिस एक और फर्जी मामले में मसूद रजा समेत अन्य को अभियुक्त बनाकर उनको फर्जी मुकदमें में फंसाना चाहती है।
राजीव यादव ने बताया कि मसूद रजा ने बलरामपुर चीनी मिल से हो रहे प्रदूषण जैसे अहम मुद्दों को हाई कोर्ट तक लाकर लड़ाई लड़ी ताकि आम अवाम और जीव जन्तु सरक्षित रह सकें। आज मसूद रजा पर हुआ पुलिसिया हमला भ्रष्टाचारी कंपनी और पुलिस के गठजोड़ का नतीजा है जो नहीं चाहती कि उनके मुनाफे के कारोबार को कोई धक्का लगे। उन्होंने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि आपराधियों से मुक्त यूपी होगा दूसरी तरफ उनकी पुलिस अपराध के खिलाफ शिकायत करने वालों पर जानलेवा हमला कर रही है जो बताता है कि सरकार अपराधियों के साथ है और आम आदमी हवालात में है।
उन्होंने बताया कि 16 मई 2018 को मसूद रजा, शाकिर के साथ उतरौला पुलिस स्टेशन एक मामले को लेकर गए जहां पीड़ित पक्ष ने एफआईआर करने की बात एसएचओ से की। लेकिन एसएचओ एफआईआर दर्ज करने के बजाए एडवोकेट मसूद रजा को गाली देने लगे। वहीं मौजूद मसूद के छोटे भाई हसमत रजा का मोबाइल पुलिस ने छीन लिया और कहा कि ये वीडियो बना रहा था, इसको भी पीटो जिससे वीडियो बनाना भूल जाए। हसमत किसी तरह वहां से भाग निकले। इस सब पर जब मसूद ने आपत्ति दर्ज की तो पुलिस उन्हें बेरहमी से पीटने लगी। जब किसी तरह जान बचाकर भागने लगे तो पुलिस उन्हें फिर से चौराहे से घसीटते हुए लाकर थाने पर पीटने लगी और कहा कि बड़ा वकील बनता है, इलाहाबाद के वकील की तरह इसका भी इनकाउंटर कर दो।
कोतवाल संतोष कुमार सिंह के साथ दर्जन भर पुलिस वालों ने पीट-पीटकर मसूद को अधमरा कर दिया। जिससे उनके सीने, कान, सिर, हाथ-पैर समेत पूरे जिश्म में गंभीर चोटें आईं। इसके बाद पुलिस ने मसूद को लाकअप में बंद कर दिया और ऊपर से केस भी लगा दिया। इसके बाद कोतवाल संतोष सिंह हसमत रजा को खोजवाने लगे और कहा कि उसको जैसे भी हो पकड़ कर लाओ, तीनों का एनकाउंटर कर देंगे।
रिहाई मंच ने कहा कि मसूद चोटों की वजह से गंभीर रुप से अस्वस्थ हैं। मंच जल्द उतरौला, बलरामपुर जाकर उनसे मुलाकात करेगा क्योंकि अधिवक्ता पर हमला बताता है कि वहां आम आदमी का क्या हाल होगा। यह मानवाधिकार का गंभीर मसला है। इस पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे।

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