स्वास्थ्य

28 हजार महिलाओं को मिला पीएमएमवीवाई का लाभ

2017 से अब तक योजना  के तहत 9.77 करोड़ का हुआ भुगतान

 पहली बार गर्भवती होने वाली माँ को तीन किश्तों में दिये जाते हैं पाँच हजार

देवरिया, सुरक्षित प्रसव  और पोषण के लिए सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना चलाई जा रही है. इसमें पहली बार गर्भधारण करने वाली महिलाओं को तीन किश्तों में पाँच हजार रुपए दिये जाते हैं. जनपद में सन 2017 से लेकर अबतक 28,818 महिलाओं को लाभान्वित किया जा चुका है. अब तक इस योजना के तहत करीब 9.77 करोड़ रूपये का भुगतान इनके खाते में किया जा चुका है.

एसीएमओ डॉ एसएन सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पहली बार गर्भवती होने पर उनके खाते में पोषण के लिए पांच हजार रुपये  दिए जाते हैं. इस योजना में सभी आय वर्ग की गर्भवती महिलाओं को पात्र बनाया जाता है. जनपद में यह योजना 01 जनवरी 2017 से लागू है . प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के अलावा दो मुख्य उद्देश्य हैं. पहला काम करने वाली महिलाओं की मजदूरी के नुकसान की भरपाई करने के लिए मुआवजा देना और उनके उचित आराम और पोषण को सुनिश्चित करना, दूसरा गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य में सुधार लाना और नकदी प्रोत्साहन के माध्यम से अधीन-पोषण के प्रभाव को कम करना. उन्होंने बताया कि इस योजना के लागू होने से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिला है जिससे मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर में भी कमी आई है.

पहली बार माँ बनने पर मिलते  हैं पांच हजार रुपये

डीसीपीएम राजेश गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में पहली बार गर्भवती होने वाली महिला के खाते में कुल 5000 रुपये पहुंचते हैं. पात्र गर्भवती महिलाओं को पहली किस्त में एक हजार रुपये गर्भ धारण के 150 दिनों के अंदर  रजिस्ट्रेशन कराने पर, दूसरी किस्त में 2000 रुपये 180 दिनों के अंदर व तीसरी किस्त में 2000 रुपये प्रसव के बाद व शिशु के प्रथम टीकाकरण चक्र पूरा होने पर मिलते हैं. योजना में गर्भवती महिला का पंजीकरण, जांच और संस्थागत प्रसव होने के बाद ही पूरी धनराशि मिलती है. इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर गर्भवतियों को अपना आधार व खाता नंबर देना होता है. जनपद में अबतक 28, 818  महिलाओं को इस योजना का लाभ दिया जा चुका है. योजना के तहत धनराशि सीधे उनके खाते में भेजी जाती  है.

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एईएस के उपचार प्रबंधन में न हो लापरवाही: सीएमओ

  

देवरिया, जिला अस्पताल के हौसला प्रशिक्षण केंद्र में चल रहे स्टॉफ नर्सों के दूसरे बैच के पांच दिवसीय प्रशिक्षण का समापन शुक्रवार को सीएमओ डॉ धीरेन्द्र कुमार ने प्रमाण पत्र वितरित कर किया। प्रशिक्षण में सीएचसी, पीएचसी, जिला अस्पताल व पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट की स्टॉफ नर्सों ने एईएस से बचाव, इलाज और प्रबंधन का प्रशिक्षण लिया।

सीएमओ ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली नर्सों को दिया प्रमाण पत्र

कार्यक्रम में सीएमओ ने कहा कि यहां से पांच दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी स्टाफ नर्स अपनी जिम्मेदारियों को एईएस के इलाज में बखूबी निभाएं। प्रशिक्षण के दौरान जो कुछ भी सिखाया गया है, उसके अनुसार ही कार्य करेंगे ताकि इस बीमारी पर नियंत्रण किया जा सके। एसीएमओ डॉ एसएन सिंह ने कहा कि एईएस रोगियों के भर्ती होने पर उनका समुचित प्रबंधन व बेहतर उपचार स्टाफ नर्स की जिम्मेदारी है। प्रशिक्षक बाल रोग विशेषज्ञ डॉ एके वर्मा ने स्टाफ नर्सों को एईएस पहचानने का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई न होने, दूषित जल पीने आदि विभिन्न कारण से यह बीमारी होती है।

इस मौके पर एसीएमओ वेक्टर बार्न डॉ डीबी शाही , जिला मलेरिया अधिकारी शिव प्रसाद तिवारी, सहायक मलेरिया अधिकारी असमत खान, सुधाकर मणि, मलेरिया निरीक्षक स्मिता सोनी, सीपी सिंह, एसपी तिवारी, डॉ एसके पांडेय  सहित स्टाफ नर्स मौजूद रहे।

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