स्वास्थ्य

डेरवा माडल पर एनक्वास के लिए तैयार होंगी सूबे की 29 पीएचसी

गोरखपुर की टीम को फीडबैक के लिए लखनऊ बुलाया गया

 गोरखपुर. जनपद का बड़हलगंज स्थित डेरवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) प्रदेश की 29 पीएचसी के लिए मार्गदर्शक बनेगा। डेरवा माडल पर ही प्रदेश की अन्य पीएचसी को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्विसेज (एनक्वास) के लिए तैयार किया जाएगा। इसी उद्देश्य से मिशन निदेशक ने सीएमओ गोरखपुर को भेजे पत्र में यहां के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी व नोडल आरसीएच डा. नंद कुमार और जिला क्वालिटी कंसल्टेंट डा. मुस्तफा की टीम को लखनऊ बुलाया है। राजधानी में इन सभी 29 पीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी और संबंधित मंडलीय क्वालिटी कंसल्टेंट व जिला क्वालिटी कंसल्टेंट के साथ गोरखपुर से गयी टीम एक दिवसीय कार्यशाला में अपना फीडबैक साझा करेगी।

डेरवा में अगस्त महीने में एनक्वास की टीम ने विजिट किया था और स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि इस सर्टिफिकेशन के लिए डेरवा का चयनित होना तय है।

एनक्वास सर्टिफिकेशन में चयनित होने वाली पीएचसी को 10 लाख रुपये मिलते हैं जिनसे विकास के कार्य कराए जा सकते हैं। यह सर्टिफिकेशन उन्हीं अस्पतालों को मिलता है जो 1500 बिंदुओं पर खरे उतरते हैं। इन पंद्रह सौ बिंदुओं में प्रत्येक बिंदु के लिए 2 अंक निर्धारित है। कायाकल्प एवार्ड के लिए एसेसमेंट सात मानकों पर होता है जबकि एनक्वास के लिए 1500 बिंदुओं के मानक तय किए गए हैं।

सूबे की अन्य पीएचसी को एनक्वास की राह दिखाने जा रहे गोरखपुर के एसीएमओ व नोडल आरसीएच डा. नंद कुमार ने बताया कि डेरवा पीएचसी ही इस श्रेणी में प्रथम पीएचसी है जिसका एनक्वास एसेसमेंट हुआ है, बाकी पीएचसी अभी इस दिशा में तैयारी कर रही हैं।

इन पीएचसी को बताएंगे एनक्वास का टिप्स

मिर्जापुर की चुनार व गनसंडी, जालौन की रामपुरा, जौनपुर की मूंगराबादशाहपुर, प्रयागराज की प्रतापपुर व दारागंज यूपीएचसी, मुरादाबाद की कुन्डर्की, लखनऊ की सरोजनीनगर, रायबरेली की हरचंदपुर, बदायूं की सैदपुर, ललितपुर की बिरधा, शाहजहांपुर की खुदागंज, बरेली की फतेहगंज,वाराणसी की बड़ागांव, गाजीपुर की मनाहारी गाजीपुर, झांसी की वरूआसागर, कौशाम्बी की मूरतगंज व नेवादा, कानपुर देहात की सरवखीरा व राजपुर, बलरामपुर की बलरामपुर पीएचसी, बागपत की धनोरा पीएचसी, संतकबीरनगर की बघौली, बांदा की बिसण्डा, देवरिया की भागलपुर, चित्रकूट की सीतापुर, बलिया की पंडाट, मथुरा की राया और सहारनपुर की नांगल पीएचसी को गोरखपुर से गई टीम एनक्वास से जुड़े टिप्स देगी।

 

इसलिए खास है डेरवा माडल

डेरवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 1998 की बाढ़ में डूब गया था। जब बाढ़ का पानी उतरा तो हालात काफी दयनीय थे। परिसर में बड़ी-बड़ी घासें हुआ करती थीं और विषैले जानवर घूमते थे। बमुश्किल 100 मरीजों की ओपीडी होती थी। इस समय इस पीएचसी की ओपीडी 250 के करीब है। आनबेड आक्सीजन का इंतजाम है। नर्सिंग बेल, पब्लिक एनाउंसमेंट सिस्टम, केएमसी कार्नर, ब्रेस्टफीडिंग कार्नर समेत दर्जनों ऐसी सुविधाएं यहां उपलब्ध हैं जो इसे एक संपूर्ण अस्पताल का दर्जा देती हैं। वित्तीय वर्ष 2018-2019 में कायाकल्प योजना के तहत 84.7 अंकों के साथ पीएचसी कैटगेरी में डेरवा को यूपी में पहला अवार्ड मिला है। इसके पिछले वित्तीय वर्ष में भी 79.4 अंकों के साथ यह पीएचसी कायाकल्प अवार्ड पा चुकी है। हाल ही में 6 और 7 अगस्त को यहां पर एनक्वास की टीम आई थी और इसका एनक्वास एसेसमेंट कराया गया।

बुलायी गयी है टीम

 सीएमओ डा. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि लखनऊ में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया है जिसमें उन पीएचसी के अधिकारियों को बुलाया गया है जिनका एनक्वास के लिए एसेसमेंट होना है। गोरखपुर से एसीएमओ व नोडल आरसीएच डा. नंद कुमार और जिला क्वालिटी एश्योरेंस कंसल्टेंट डा. मुस्तफा  को इसमें खासतौर से बुलाया गया है ताकि वे एनक्वास के संबंध में बारीक अनुभवों को साझा कर सकें जिसका लाभ प्रदेश की 29 पीएचसी को मिल सके।

 

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