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तीन तलाक : जुमा की तकरीर में केंद्र सरकार के खिलाफ उठे विरोध के स्वर

तलाक के बारे में दी गयी जानकारी, हस्‍ताक्ष्‍ार अभियान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने की अपील 

गोरखपुर, 28 अक्टूबर। तीन तलाक पर देश की सुप्रीम कोर्ट में हुकूमतें हिन्द (केंद्र सरकार) के रुख को लेकर गोरखपुर के मुसलमान गोलबंद हो गये हैं। आज जुमे के दिन शहर की मस्जिदों से एलान किया गया कि वे हुकूमतें हिन्द के इस फैसले के खिलाफ गोलबंद हैं। मुसलमान हस्‍ताक्ष्‍ार अभियान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेकर तेजी लायें। इस मसले को लेकर सड़क पर भी उतरना पड़ा तो उतरा जायेगा।
गाजी मस्जिद गाजी रौजा, रहमतनगर जामा मस्जिद, मस्जिद सुभानिया तकिया कवलदह, मस्जिद गौसिया छोटे काजीपुर सहित शहर की तमाम छोटी बड़ी मस्जिदों में जुमा की नमाज के दौरान इमामों ने हुकूमत के फैसले पर गुस्से का इजहार किया। शुक्रवार को मस्जिदों के इमामों ने लोगों के बीच तीन तलाक का मामला रखते हुए बताया कि किस प्रकार तीन माह के भीतर तीन तलाक कहा जाता है। तलाक किस प्रकार दिया जाता है और क्‍यों दिया जाता है, इसके बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गयी।
गाजी मस्जिद गाजी रौजा में मुफ्ती अख्तर हुसैन ने कहा कि कुरआन और हदीस शरीयत का आधार हैं। इसमें कोई बदलाव न कल हुआ हैं न आगे होने दिया जायेगा। तीन तलाक छुटकारे की एक सूरत हैं और जब बहुत ज्यादा जरुरत हो तो ही दिया जाता हैं। हमारे समाज के कुछ जाहिलों ने इसे खिलवाड़ बना लिया हैं, वह शरीयत के अन्य नियमों का तो पालन नहीं करते हैं और जब तलाक की बारी आती हैं तो गुस्से में एक बार में तीन तलाक दे देते हैं। हालांकि शरीयत ने एक तलाक दो तलाक की रियायत दी हैं। इसलिए बच्चों को दीनी इल्म सिखाईये, ताकि वह हर समस्या को हल करने का सही तरीका जान सकें। इल्म रोशनी हैं। शादी वगैरह करने में दो तीन साल पहले तैयारी की जाती हैं और तलाक देने में चंद मिनट भी नहीं लगते और फिर दौड़ते हैं उलेमा के पास। आज अदालतों में तलाक के अनगिनत मामलें हर समुदाय में हैं। सिर्फ सरकार को मुसलमानों का तीन तलाक ही नजर आ रहा हैं।

मस्जिद सुभानिया तकिया कवलदह के पेश इमाम मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 44 से लेकर अनुच्छेद 25, 26, 27 आदि में खास अधिकार हर मजहब के मानने को मिला हुआ। सरकार उन अधिकारों में दखल दे रही हैं।

मस्जिद दारोगा अफगानाहाता के पेश इमाम कारी हिदायतुल्लाह ने कहा कि इमाम हुसैन ने शरीयत को बचाने के लिए अपना सब कुछ कुरर्बान कर दिया। मस्जिद खादिम हुसैन तिवारीपुर के इमाम मौलाना अफजल बरकाती ने कहा कि शरीयत में रद्दो बदल मंजूर नहीं हैं। केंद्र सरकार समाज को बांटना चाहती हैं ताकि वोट हासिल किया जा सकें।
मस्जिदों में लोगों से अपील की गयी कि वह सरकार के खिलाफ गोलबंद हो जाएं। हस्ताक्षर अभियान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लें और विरोध दर्ज करायें।

बतातें चलें कि गोरखपुर में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा जारी प्रोफार्मा लाखों की तादाद में घरों में पहुंच चुंका हैं और हजारों की तादाद में भरा भी जा चुका हैं। पहले चक्र में भरे प्रोफार्मा को भेजे जाने की प्रकिया शनिवार से शुरु होगी।

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