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एबीवीपी का आरोप : लॉ विभागाध्यक्ष की साजिश से छात्र संघ चुनाव टला

गोरखपुर. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी ) ने  गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्र संघ का चुनाव स्थगित कराने के लिए लॉ विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर जितेंद्र मिश्रा की साजिश को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगया है कि उन्होंने एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला करवाया. एबीवीपी ने प्रोफेसर जितेंद्र मिश्रा के खिलाफ हत्या के प्रयास के मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की है.परिषद नेताओं ने विश्वविद्यालय को तत्काल खोलने और न्यायिक देखरेख में चुनाव कराने की मांग की.
आज एक पत्रकार वार्ता में एबीवीपी के गोरक्ष प्रांत के प्रांत मंत्री भूपेंद्र सिंह राणा,  महानगर कार्यकारिणी सदस्य अनामिका सिंह, विश्वविद्यालय छात्र अनूप कुमार भारती एवं तहसील संयोजक अभिषेक हरि सिंह ने लॉ विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर जितेंद्र मिश्रा पर कई गंभीर आरोप लगाये.
एबीवीपी नेताओं ने कहा कि 11 सितम्बर को हर दिन की तरह जब विश्वविद्यालय में शांति थी और सभी प्रत्याशी अपने चुनाव में व्यस्त थे. हमारे पुस्तकालय मंत्री पद के प्रत्याशी अनूप भारती अपने कुछ समर्थकों के साथ विश्वविद्यालय के विधि विभाग में प्रचार करने पहुंचे और अपने समर्थन में छात्रों से वोट मांगने के लिए आगे आए तब तुरंत ही विधि विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जितेंद्र मिश्रा ने उन्हें ऐसा करने से रोका. हमारे प्रत्याशी एवं कार्यकर्ताओं ने उन्हें इसका कारण बताने को कहा व प्रचार करने देने का निवेदन किया तब उन्होंने जवाब दिया कि, “यह मेरा विभाग है मैं जैसे चाहे वैसे चलाऊं, जिसे चाहूँ उसका प्रचार कराऊँ, इसका आप मुझे दिशा निर्देश नहीं दे सकते” । प्रत्याशी तथा समर्थकों ने उन्हें इस बात पर समझाने का प्रयास किया तो वे भड़क उठे और उन्हें भद्दी गालियां देनी प्रारंभ कर दी। इस दुर्व्यवहार का जब हमारे कार्यकर्ताओं ने प्रतिकार किया तो उन्होंने तुरंत सभी छात्रों को इकट्ठा करके भड़काऊ तरीके से उन्हें चढ़ाया तथा तुरंत ही झूठी अफवाह फैलाने शुरू कर दी कि विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने मेरे साथ मारपीट की है । हमारे प्रत्याशी कुछ समझ पाते इसके पहले ही उन्होंने छात्रों को चिल्ला कर कहा कि, “जहां में परिषद के लोग देखें उन्हें घेर के, दौड़ा के मारो” और गालियां देनी प्रारंभ कर दी । उग्र होते छात्रों को देख हमारे प्रत्याशी वहां से निकलने का प्रयास करने लगे और पीछे से विभाग के छात्र उनके पीछे दौड़ पड़े । जो भी कार्यकर्ता पकड़ में आए उन्हें बुरी तरह से पीटा गया और उन पर जानलेवा हमला किया गया । उनके ऊपर ईंटे पत्थर बरसाए गए तथा लाठी-डंडों से प्रहार किया गया । हमारे कार्यकर्ता किसी तरह वहां से जान बचाकर भागे । यह हमारे कार्यकर्ताओं की अच्छी किस्मत ही रही कि वहां हुए इस प्राणघातक हमले में किसी ने अपनी जान नहीं गंवाई. हालांकि कई उसमें गंभीर रूप से घायल हुए, किसी का सर फूटे किसी के अन्य भागों पर कई गंभीर चोटें आई ।
एबीवीपी पदाधिकारियों ने कहा कि इस घटना के तत्काल बाद प्रो. मिश्र ने वहां पर अन्य शिक्षकों व विभागाध्यक्षों को बुलाकर झूठ की कहानी गढ़नी प्रारंभ कर दी कि कैसे विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने उनसे हाथापाई करी । इस बात का कोई प्रमाण नहीं, ना ही कोई अन्य शिक्षक इस बात का गवाह है कि वहां पर प्रोफेसर जितेंद्र मिश्रा या अन्य किसी शिक्षक के साथ किसी भी प्रकार की हाथापाई हुई । तत्पश्चात, वहां पर उपस्थित शिक्षक संघ के अध्यक्ष के माध्यम से उन्होंने उन पर दबाव बनाकर कुलपति को एक पत्र भिजवाया जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा कि हमारे ऊपर हमला हुआ है व शिक्षकों में भय का वातावरण व्याप्त है और ऐसे माहौल में विश्वविद्यालय चुनाव ना कराएं । उन के दबाव में आकर शिक्षक संघ की ओर से विश्वविद्यालय कुलपति को एक चिट्ठी भी प्रेषित हुई जिसका परिणाम यह रहा कि प्रोफेसर जितेंद्र मिश्रा की साजिश सफल हुई और छात्रों के हक की आवाज उठाने वाले छात्र संघ के चुनाव स्थगित कर दिए गए और इन सारी घटना के जिम्मेदार उन्होंने अपने दुष्प्रचार तंत्र से पुनः विद्यार्थी परिषद को बना दिया ।
परिषद के नेताओं ने कहा कि प्रोफेसर जितेंद्र मिश्रा ने अपने ही विभाग के संस्थागत विद्यार्थियों को चुनाव लड़ने वह चुनाव में भाग लेने के लिए अयोग्य बना दिया, जिनकी संख्या लगभग ढाई सौ की है ताकि उसका भी ठीकरा विद्यार्थी परिषद पर फोड़ सके और उन्होंने किया भी ऐसा ही । अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए उन्होंने जिन विद्यार्थियों को अयोग्य करार दिया, उन्होंने उसके लिए स्वयं या विश्वविद्यालय प्रशासन को नहीं बल्कि विद्यार्थी परिषद को दोषी बनाया और छात्रों में यह भ्रम फैलाया कि इसके पीछे भी विद्यार्थी परिषद की सुनियोजित साजिश है । अन्य कई मौकों पर भी प्रोफेसर जितेंद्र मिश्रा की जातिवादी मानसिकता छलक कर बाहर आई है । अपने विभाग में जिस तरह से उन्होंने छात्रों के वर्णों के आधार पर उनके कक्षाओं के वर्गों को विभाजित किया है यह कुछ नहीं तो उनके घोर जातिवादी मानसिकता का परिचायक है ।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद यह मांग करती है कि अविलंब विश्वविद्यालय परिसर को छात्रों के पठन पाठन हेतु खोला जाए, प्रोफेसर जितेंद्र मिश्रा पर कार्यवाही की जाए तथा छात्र संघ चुनाव कराए जाएं ।

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