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आमी बचाओ मंच का आरोप : उद्योगपतियों के दबाव में नहीं लग रही सीईटीपी

गोरखपुर. आमी नदी में प्रदूषण खत्म करने के लिए कामन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के एनजीटी के आदेश के बाद भी कुछ उद्योगपतियों के प्रभाव में हीलाहवाली के खिलाफ आमी बचाओ मंच और कांग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने विश्व विजय सिंह के नेतृत्व में मण्डलायुक्त की अनुपस्थिति में अपर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि गीडा के उद्योगों से निकले कचरा ने आमी नदी को मृत्यु के करीब पहुंचा दिया है। आमी बचाओ मंच के नेतृत्व में स्थानीय नागरिकों के लंबे जनसंघर्ष एवं कानूनी लड़ाई के बाद स्वीकृत कामन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने में देरी से यह साबित हो रहा है कि सरकार और प्रशासन उद्योगपतियों के हाथों में खेल रहा है। यह स्थिति नागरिकों के लिये अब बर्दाश्त से बाहर हो रहा है।

विश्व विजय ने कहा कि वर्ष 2014 में स्वीकृति के बाद उत्तरप्रदेश जलनिगम को कार्यदायी एजेंसी नामित किया गया था जिसने व्यापक जांच के बाद 35 एमएलडी की क्षमता का डिटेल प्रोजेक्ट बनाकर गीडा के माध्यम से सरकार के पास वित्तपोषण हेतु भेजा किन्तु पैसा जारी करने के बजाय सरकार में बैठे लोग कतिपय पूंजीपतियों के दबाव में लगातार प्रोजेक्ट को बदलवाने में लगे हैं। आश्चर्य एवं दुखद विषय है कि नदी बचने हेतु ट्रीटमेंट प्लांट लगाने में सहयोग के बजाय उत्तर प्रदेश के उद्योग मंत्री सतीश महाना पूंजीपतियों के दबाव में कम क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का दबाव अधिकारियों पर बना रहे थे जो बेहद निंदनीय है।

प्रतिनिधिमण्डल ने कहा कि सतीश महाना जब भी गोरखपुर आएंगे तो उनका विरोध किया जाएगा। आमी को मारने के दोषी पूंजीपतियों के पक्ष में खड़े लोगो को किसी कीमत पर बर्दाश्त नही किया जाएगा। प्रशासन अविलम्ब कामन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की प्रक्रिया आरम्भ करे वरना कानूनी लड़ाई के साथ ही पुनः सड़क की लड़ाई तेज की जाएगी।

प्रतिनिधि मंडल में प्रमुख रूप से कांग्रेस नेता आलोक शुक्ला, तौकीर आलम, दिनेशचंद्र श्रीवास्तव, महेंद्र मोहन तिवारी, घटोत्कच शुक्ला, कालन्जय तिवारी, कृष्णमोहन शाही, गोपाल गांधी, केतन तिवारी, अभिजीत पाठक, परवेज अख्तर, अतुल मिश्रा, सौरभ श्रीवास्तव, सन्तोष कुमार , सुनील सिंह, छोटेलाल आदि लोग मौजूद रहे।

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