स्वास्थ्य

घर पर शिशुओं की देखभाल के लिये आशा कार्यकर्ताओं को दिया प्रशिक्षण

घर पर बच्चों की देखभाल का प्रशिक्षण ले रही आशा कार्यकत्री

माँ-बच्चे देखभाल करना आशा की जिम्मेदारी: डॉ हरेंद्र

देवरिया । माता एवं शिशु की बेहतर देखभाल के लिए  गुरुवार को महेन महेन स्थित
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सभागार में चौथे बैच की आशा
कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में मौजूद सीएचसी अधीक्षक
डा. हरेंद्र कुमार ने कहा कि नवजात शिशुओं का घर पर देखभाल कैसे हो, इसके
लिए होम बेस्ड न्यूओनेटल केयर (एचबीएनसी) के तहत आशाओं को प्रशिक्षित
किया जा रहा है जिससे शिशु मृत्यु दर में कमी आए।
प्रशिक्षक डॉ प्रवीण कुमार ने आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देते हुए
कहा कि आशा कार्यकर्ता सीधे गांव के हर घर के संपर्क में  होती हैं। ऐसे
में अगर इन्हें प्रशिक्षित किया जाए तो शिशु मृत्यु दर में कमी दिखेगी और
माताओं के बेहतर स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया जा सकेगा।  प्रशिक्षकों ने
बताया कि नवजात शिशु गर्मी और सर्दी के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं।
लगातार बदलते मौसम में उन पर ध्यान देने की जरूरत होती है। कार्यकर्ता हर
घर तक पहुंचकर यह बताएंगे कि नवजात के पालन पोषण में किस तरह का ध्यान
देना है। प्रशिक्षकों ने कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या अगर बच्चों में
दिखे तो घरेलू उपचार अथवा झोलाछाप डाक्टरों के पास ले जाने की जगह
प्राथमिक अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही ले जायें।सरकारी
अस्पतालों पर हर तरह के जांच व इलाज की सुविधा है जिसके चलते नवजात शीघ्र
स्वस्थ्य हो सकेगा। उन्होंने कहा कि  महिलाओं में स्तनपान को लेकर
जागरूकता लाना बेहद आवश्यक है। एक घण्टे के अन्दर नवजात को स्तनपान कराना
चाहिए और ऐसा तब सम्भव है, जब हम प्रसूता को इसके बारे में सही जानकारी
देंगे। उन्होंने कहा कि प्रसव के बाद 42 दिन तक जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य
की देखभाल की जिम्मेदारी संबंधित आशा की होती है।
प्रशिक्षण में डा. कलिका प्रसाद,  रणजीत बहादुर सिंह, बीसीपीएम अजित
शर्मा, बीसीपीएम भागलपुर आबिद अली सहित आशा  अंजलि सिंह, प्रतिमा सिंह,
शादिया, निर्मला , आशा, सक्रांति, सविता, संजू, रीता रंजना  मौजूद रहीं।

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