विचार

प्रत्याशियों से पूछिए -सांसद बनने पर अपनी निधि से प्रति वर्ष एक करोड़ सरकारी स्कूलों को देंगे ?

फाइल फोटो

रामवृक्ष गिरि, सामाजिक कार्यकर्ता

वर्ष 2019 में देश की दशा और दिशा बदलने वाले सबसे बड़े चुनाव की तैयारियां शुरू हो गयीं हैं.  कुछ पार्टियों के कंडीडेट तय कर दिये गए हैं तो कुछ के तय किये जाने हैं.  देश में वर्तमान समय में मजदूरों, किसानों, गरीबों, बंचितो, दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, किशोर, किशोरियों, युवाओं, बच्चों के ढेरो  सवाल हैं.

ये सवाल शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों, सम्मान और सुरक्षा, पहचान, सामाजिक सुरक्षा आदि  के हैं. गांव-गली और नगर की जनता आस लगाई बैठी है कि इन सवालों का समाधान कौन करने वाला है. वे सभी प्रत्याशियों से सवाल करना चाहते हैं कि यदि वे सांसद बनते हैं तो  इन सवालों का समाधान कैसे करेंगे .

इन सवालों पर प्रत्याशियों की राय चुनाव के मंचों से लोग सुनना चाहते हैं. खासकर शिक्षा के सवाल.

शिक्षा से जुड़े कई सवाल अहम हैं. आउट ऑफ स्कूल बच्चों का
चिन्हांकन कर उन्हें मुख्यधारा से कैसे जोड़ा जाय. तमाम प्रयास के बावजूद अभी भी ड्राप आउट बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा है.  मौसमी पलायन से प्रभावित बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए
एक राज्य स्तरीय नीति और कार्ययोजना बनाए जाने की जरूरत महसूस हो रही है. लड़कियों की शिक्षा सुनिश्चित करने
के लिए गांव और स्कूल में सुरक्षा एवं भयमुक्त वातावरण की व्यवस्था, आरटीई एक्ट 2009 का दायरा बढ़ाते हुए 12वीं तक किये जाने, एन0पी0आर0सी0 स्तर पर 10वीं और 12वीं के विद्यालय खोले जाने, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की 6% धनराशि शिक्षा पर व्यय करने, प्रत्येक सरकारी स्कूल को केंद्रीय
विद्यालय के तौर पर विकसित करने का सवाल निश्चित ही चुनाव का मुद्दा बनना चाहिए.

हमें प्रत्याशियों से ये सवाल पूछना चाहिए कि वे अपने चुनावी मंचों से और चुनाव जीतने के बाद लोक सभा में इन सवालों को लेकर दबाव बनायेंगे ? साथ में यह सवाल पूछना भी जरूरी है कि क्या आप अपनी निधि (5 करोड़ प्रति वर्ष ) में से एक करोड़ प्रति वर्ष अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूलों के विकास के लिए देंगें ?

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