राज्य

सरहद के दोनों पार जनता के दिलों में जिन्दा हैं भगत सिंह -किरनजीत सिंह संधू

मऊ में शहीद-ए- आजम भगत सिंह मंच का उद्घाटन

मऊ. ‘ पाकिस्तान में लाहौर के भगत सिंह चौक पर भगत सिंह के शहादत दिवस पर एक जलसा था. मैं भी उसमें शरीक हुआ था. तकरीबन तीन हजार नौजवानों ने एक जुलूस निकाला था. उनके भीतर जो जोश और जज्बा देखा, भगत सिंह के प्रति जो दीवानगी देखी उसे देखकर मैं दंग रह गया. वह नारे लगा रहे थे भगत सिंह सरहद के इस पार भी जिंदा है, उस पार भी जिंदा है. उन्हें पक्का यकीन है कि भगत सिंह मेरी मिट्टी का बेटा है और हिंदुस्तान का हीरो है. ‘

यह भावपूर्ण व्यक्तव्य राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ के दूसरे ब्लॉक में बने भगत सिंह मंच के उद्घाटन के अवसर पर भगत सिंह के भतीजे किरणजीत सिंह संधू ने कही. उन्होंने प्रोफेसर चमनलाल, विभूति नारायण राय, भारत भारद्वाज, प्रियदर्शन मालवीय व प्रोफेसर अनिल कुमार राय के साथ मंच का उद्घाटन किया.

मऊ नगर के उत्तरी छोर पर बना राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ दो ब्लॉकों में निर्मित है. खंड अ उसका पुस्तकालय एवं वाचनालय खंड है जबकि ब्लॉक ब नाटक ,मंचन, संगोष्ठी, चित्रकला मूर्तिकला की प्रदर्शनी के उद्देश्य से बना है. इस दूसरे खंड के लोकार्पण का गवाह यह नगर 30 नवम्बर की शाम को बना. शहीदे आजम भगत सिंह के भतीजे किरनजीत सिंह संधू ने भगत सिंह से जुड़े कई आत्मीय संस्मरण सुनाये.

कार्यक्रम का दूसरा सत्र भगत सिंह के सपनों का भारत विषय संगोष्ठी का था जिसका आरंम्भ आजमगढ़ से आए वक्ता जयप्रकाश नारायण के वक्तव्य से हुआ. उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन के ढुल-मूल चरित्र को सशक्त बनाने में भगत सिंह के योगदान और स्वतंत्रता के बाद शासन की दिशा हीनता को रेखांकित किया. श्री राय ने देश के समक्ष उपस्थित चुनौती से निकलने के लिए नायकों के पुनर्पाठ पर बल दिया।

इलाहाबाद से आए कथाकार प्रियर्शन मालवीय ने भगत सिंह की वैचारिकी व संघर्ष क्षमता को आज भी प्रासंगिक बताया। गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अनिल कुमार राय ने भगत सिंह के सपनों को आज भी जिंदा रखने और उसे बढ़ाते रहने के लिए संस्थाओं आयोजकों और समर्पित व्यक्तियों के महत्व की की. उन्होंने राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ की स्थापना को अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य बताया.

जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय सचिव मनोज कुमार सिंह ने भगत सिंह कई कई लेखों की चर्चा करते हाय कहा कि किसानों और नौजवानों के देश की आजाद भारत के हुक्मरानों ने किसानों और नौजवानों की सबसे अधिक आत्महत्या वाले देश में तब्दील कर दिया है. आज अपना देश भुखमरी, गरीबी में अपने पडोसी देशों से भी आगे है. ऐसा इसलिए हुआ क्योकि भगत सिंह के सपनों का भारत हम नहीं बना सके. हमें उस अधूरी लड़ाई को पूरा करने का संकल्प लेना होगा और उसे पूरा करना होगा.

भगत सिंह साहित्य के खोजकर्ता प्रोफेसर चमनलाल ने अपनी बात का आरंभ भगत सिंह के साहित्य की प्रमाणिक जानकारियों से कराते हुए कहा कि भगत सिंह न सिर्फ केक क्रांतिकारी थे बल्कि बड़े लेखक भी थे. बतौर लेखक उन्होंने जी वैचारिकी हमारे सामने प्रस्तुत की है , उसका अभी ठीक से मुल्यांकन बाकी है.उन्होंने कहा कि धर्म, संप्रदाय, जाति व धन की श्रेष्ठता वाली आजादी से मुक्त जिस देश ओ समाज की कल्पना भगत सिंह ने की थी , आज के हुक्मरान स सपने को दफन करने पर आमादा हैं. देश की जनता इसे बड़ी गंभीरता से देख रही है और वह इ का हिसाब भी करेगी.

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार विभूति नारायण राय ने भगत सिंह के सपनों को कल्पना का भंडार ना बता कर यथार्थ और देश की जरूरत बताया. कार्यक्रम का संचालन केके पांडे ने किया। मेहमानों का स्वागत नगरपालिका के अध्यक्ष तय्यब पालकी ने किया. राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ के निदेशक जयप्रकाश धूमकेतु में सृजन पीठ के निर्माण के उद्देश्य के बारे में बताया. धन्यवाद ज्ञापन ओमप्रकाश सिंह ने किया.

कार्यक्रम में देवेंद्र मिश्रा, वीरेंद्र कुमार,शेर मोहम्मद, राम अवतार सिंह ,अजीम खां ,अर्चना उपाध्याय ,प्रकाश सिंह एडवोकेट शमशुल हक चौधरी, डॉक्टर जमाली ,बद्रीनाथ सिंह, हरमिंदर पांडे, इरफान, अरविंद मूर्ति, शंभू रामू मास्टर ,बाबू रामपाल, रामजी सिंह ,राघवेंद्र, शकील अंसारी, जलीस अहमद, राजेंद्र सिंह पूर्व ब्लाक प्रमुख ,अवधेश गुप्ता, शिव मूरत गुप्ता ,अजय कुमार मिश्रा बसंत कुमार, सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे.

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