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वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव दिवस पर लोकसभा चुनाव के लिए जारी हुआ भोजपुरी जनपद का विचार पत्र

वाराणसी। महान स्वतन्त्रता सेनानी वीर कुंवर सिंह के 162वें विजयोत्सव दिवस पर जन भोजपुरी मंच द्वारा, लंका स्थित सभागार में भोजपुरी क्षेत्र के मतदाताओं व प्रत्याशियों के लिए विचारपत्र का लोकार्पण किया गया।

इस अवसर पर प्रो. अवधेश प्रधान ने भोजपुरी जनपद के वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि प्रथम स्वतन्त्रता संघर्ष के समय जहाँ बड़े सामन्त अंग्रेजों के समर्थन में थे वहीं कुंवर सिंह अपने जनपद से निकल कर कैमूर की पहाड़ियों से लगायत मध्यप्रदेश और बनारस से लेकर आजमगढ़ तक अंग्रेजों से लोहा लिया और पुनः अपनी समाज-व्यवस्था को स्थापित किया। इसमें समाज के हर वर्ग का सम्मानजनक हिस्सा समान हिस्सा था।

प्रो. बलिराज पाण्डेय ने कहा कि भोजपुरी क्षेत्र और भोजपुरी भाषा की उन्नति के लिए यहाँ की ठोस परिस्थितियों के अनुरूप खाका तैयार किया जाना चाहिए। आश्चर्य की बात है कि इस दिशा में अभी तक किसी ने ठोस पहल नहीं की है। प्रो. मृदुला सिन्हा ने कहा कि भोजपुरी के लिए आज वीर कुंवर सिंह के जैसे धैर्य व उत्साह की आवश्यकता है। अभी तक भोजपुरी को लोग हेय दृष्टि से देखते हैं जबकि वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में अपना हित साधने के लिए भोजपुरी को साध्य के रूप में प्रयोग करते हैं।

अतिथियों का स्वागत धीरज कुमार गुप्ता, संचालन सूर्यप्रकाश तिवारी व धन्यवाद ज्ञापन विश्वमौलि ने किया। इस अवसर पर प्रो. सदानन्द शाही, वाचस्पति, डॉ. शैलेन्द्र कुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार सियाराम यादव, सत्यप्रकाष, प्रियंका, रूद्रप्रताप सिंह, राणा अवधूत, उज्जवल, शत्रुघ्न, गौरव, रामबचन, वैभव सिंह, अरुण आदि लोग उपस्थित रहे।

17वीं लोकसभा चुनाव में जन भोजपुरी मंच की ओर से जारी विचार-पत्र

जन भोजपुरी मंच, वाराणसी की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव के दो चरण बीत गये हैं, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने भोजपुरी भाषा और भोजपुरी क्षेत्र की उन्नति का कोई खाका प्रस्तुत नहीं किया है। जबकि भोजपुरी क्षेत्र और भोजपुरी भाषा की उन्नति के लिए यहाँ की ठोस परिस्थितियों के अनुरूप खाका तैयार किया जाना चाहिए। आश्चर्य की बात है कि इस दिशा में अभी तक किसी ने ठोस पहल नहीं की है।

राजनीतिक दल भोजपुरी की छवि खराब करने वाले अभिनेताओं और गायकों के भरोसे भोजपुरी क्षेत्र को बहलाने में लगे हैं। चुनाव के समय भोजपुरी की प्रतिष्ठा धूमिल करने वाले ऐसे कलाकार भी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए कभी इस पार्टी तो कभी उस पार्टी से सौदेबाजी करके भोजपुरी का मानमर्दन करते हैं।

इसलिए हमें यह बात समझनी और समझानी होगी कि भोजपुरी क्षेत्र के पिछड़ेपन के मूल में, भोजपुरी भाषा की उपेक्षा और उससे उपजा हीनता-बोध है। शिक्षा की दयनीय स्थिति भी इसके लिए जिम्मेदार है। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक का ढ़ांच चरमराया हुआ है। भोजपुरी क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा को मजबूत एवं प्रभावी ढ़ंग से लागू करने की जरूरत है। भोजपुरी क्षेत्र में आधारभूत ढ़ाँचे चिकित्सा, शिक्षा, सड़क, यातायात का घोर अभाव है। क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताओं और प्राकृतिक आपदाओं को ध्यान में रखकर कृषि नीति तैयार करने की जरूरत है। स्वरोजगार विकसित करने के लिए इस क्षेत्र के लघु और कुटीर उद्योगों का संरक्षण और संवर्धन बेहद जरूरी है। भोजपुरी क्षेत्र में पर्यटन की पर्याप्त संभावनाएं है, उसका पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन और विकास किया जाना चाहिए।

भोजपुरी भाषा, साहित्य, संस्कृति, लोककलाएँ, देशज ज्ञान और समाज के विकासात्मक अध्ययन के लिए स्वतंत्र विश्वविद्यालय तथा शोध केंद्रों की स्थापना की जानी चाहिए। ताकि इस क्षेत्र की ज़रूरतों के हिसाब से विकास का खाका तैयार किया जा सके। आश्चर्य है कि किसी भी राजनीतिक दल के एजेंडे में भोजपुरी क्षेत्र नहीं है। इस क्षेत्र के पिछड़ेपन का फायदा उठाकर तरह तरह के काल्पनिक मुद्दों पर भोजपुरी क्षेत्र को गुमराह किया जाता रहा है। इसी को ध्यान में रखकर जन भोजपुरी मंच ने लोकसभा के सभी प्रत्याशियों और मतदाताओं से विचार करने के लिए दस सूत्रीय विचार पत्र जारी किया है –

1- भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के बारे में।

2- शिक्षाविदों की राय में मातृभाषाएँ समझ का बेहतर माध्यम हैं। इसलिए भोजपुरी एवं क्षेत्रीय भाषाओं में प्राथमिक शिक्षा के लिए कुछ माडल स्कूल स्थापित किए जायें तथा हर गाँव के स्तर पर प्राथमिक शिक्षा प्रणाली को आधुनिक ढंग से विकसित करने के बारे में।

3- भोजपुरी भाषा साहित्य, संस्कृति, लोककलाएँ, देशज ज्ञान और समाज के विकासात्मक अध्ययन के लिए स्वतंत्र विश्वविद्यालय तथा शोध केंद्रों की स्थापना ।

4- भोजपुरी क्षेत्र में कृषि और कृषि आधारित उद्योग विकसित करने का सतत प्रयास किया जाय। साथ ही बाढ़, सूखा, कटान एवं ऊसर, सिंचाई, खड़ी फसलों में आग लगने आदि कृषि से संबंधित समस्याओं से निपटने हेतु स्थायी एवं समुचित उपाय की तलाश।

5- भोजपुरी क्षेत्र में पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन का विकास और प्रबंधन ।

6- भोजपुरी क्षेत्र में बुनकरी सहित तमाम लघु एवं कुटीर उद्योगों के संरक्षण एवं संवर्धन की नीतियाँ बनें और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने के बारे में।

7- भोजपुरी क्षेत्र में आधारभूत ढाँचे(चिकित्सा, शिक्षा, सड़क, यातायात आदि) के समग्र विकास का खाका तैयार करना।

8- प्रवासी भोजपुरी समाज के साथ विशेष सांस्कृतिक एवं राजनीतिक सम्बन्ध बनाने का प्रयास ।

9- भोजपुरी क्षेत्र के परंपरागत खेलों को ध्यान में रखते हुए एक प्रभावी खेल नीति बनायी जाय तथा ब्लाक स्तर पर खेल संस्थान बनाने के बारे में।
10- भोजपुरी क्षेत्र में स्वरोजगार प्रशिक्षण केंद्र खोले जायँ।

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