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बीआरडी मेडिकल कालेज: पीएमआर सेंटर के 11 चिकित्सा कर्मियों को 36 महीने से वेतन नहीं मिला

बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर

इंसेफेलाइटिस वार्ड के 300 चिकित्सकों, कर्मचारियों को दो वर्ष से एरियर, मार्च 2018 का वेतन और रायल्टी बोनस भी नहीं मिला
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कालेज में कार्यरत चिकित्सकों, कर्मचारियों के वेतन, एरियर, बोनस के भुगतान की समस्या अब भी ठीक नहीं हो सकी है। इससे उनमें असंतोष बढ़ता जा रहा है। बीआरडी मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग के अन्तर्गत आने वाले 100 बेड के इंसेफेलाइटिस वार्ड और 12 नम्बर एपीडेमिक वार्ड में संविदा पर कार्य करने वाले 300 चिकित्सकों, कर्मचारियों, नर्सो को मार्च 2018 का वेतन, दो वर्ष का एरियर और लायल्टी बोनस नहीं मिला है।

इसी तरह प्रिवेंटिव मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन सेंटर (पीएमआर) के 11 संविदा कर्मियों को 36 महीने से वेतन नहीं मिला है।

इस सम्बन्ध में संविदा चिकित्सकों, नर्सों व कर्मचारियों ने जिलाधिकारी जो कि जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष भी होते हैं, उन्हें पत्र लिखकर बकाया वेतन, एरियर और बोनस दिलाने की मांग की है।
100 बेड के इंसेफेलाइटिस वार्ड और 12 नम्बर एपीडेमिक वार्ड में संविदा पर 300 चिकित्सक, नर्स, कर्मचारी कार्यरत हैं। इनको एनएचम मद से वेतन, एरियर मिलता है। जबसे इनकी नियुक्ति हुई है तभी से उनको वेतन, एरियर, बोनस नियमित रूप से नहीं मिल रहा था।

पिछले वर्ष अगस्त माह में आक्सीजन कांड के पहले छह माह का उनका वेतन बकाया था। इस घटना के कुछ दिन पहले ही उन्हें वेतन मिला था। इसके बाद से उन्हें वेतन तो नियमित हुआ लेकिन दो वर्ष से एरियर और एक वर्ष का रायल्टी बोनस नहीं मिला है। इस वर्ष का मार्च माह का वेतन भी उन्हें नहीं मिला है।

कुछ कर्मचारियों ने गोरखपुर न्यूज लाइन को बताया कि उन्हें 2016-17 और 2017-18 का एरियर नहीं मिला है। संविदा चिकित्सकों, कर्मचारियों और नर्सों को हर वर्ष वेतन में पांच फीसदी बढ़ोत्तरी का एरियर देने का प्राविधान है। इस तरह उन्हें 2016-17 का 6 लाख 50 हजार और वर्ष 2017-18 का 7 लाख 50 हजार यानि कुल 14 लाख रूपए एरियर बकाया है। इसी तरह उनका रायल्टी बोनस के मद में 23,07,884 रूपया बकाया है। मार्च 2018 के वेतन मद में 35 लाख रूपए बकाया है। इस प्रकार कुल 72,07,884 रूपए की देनदारी बकाया है।

प्रिवेंटिव मेडिसिन एवं रिहैबिलिटेशन सेंटर (पीएमआर )के 11 संविदा कर्मियों को 36 महीने से वेतन नहीं मिला है। उन्हें आखिरी बार मार्च 2015 में वेतन मिला था।

इसका काम इंसेफेलाइटिस व दूसरी बीमारियों से विकलांग बच्चों का इलाज करना है। विभाग की स्थापना के समय 37 पद सृजित किए गए लेकिन यहां पर सिर्फ 17 पदों पर ही नियुक्ति हुई। यह नियुक्ति संविदा पर की गई। समय पर वेतन न मिलने पर तीन चिकित्सक नौकरी छोड़ चले गए। अब यहां पर चार थेरेपिस्ट, दो आर्थेरिस्ट, एक प्राथेरिस्ट व पांच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी काम कर रहे हैं जो कि 36 महीने से वेतन मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

एक पखवारे पहले डीएम मेडिकल कालेज आए तो इन कर्मचारियों ने अपनी व्यथा उनके सामने रखी। डीएम के जाने के बाद मेडिकल कालेज प्रशासन ने इन कर्मचारियों से कहा कि वह मार्च 2018 का वेतन ले लें। शेष वेतन के भुगतान के बारे में कोशिश की जाएगी। इसी बीच शासन की ओर से 27 मार्च को बीआरडी मेडिकल कालेज को पत्र भेजा गया है कि पीएमआर सेंटर में सृजित पदों पर नियमित नियुक्ति होने तक इन संविदा कर्मियों को आउसोर्सिंग के माध्यम से वेतन दिया जाए।
अब ये संविदाकर्मी अपनी नौकरी जाने के खतरे से आशंकित है। इतने लम्बे वक्त बिना वेतन काम करने के सिला उन्हें हटाकर नियमित नियुक्ति कर दिया जाएगा।

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