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विचार

टीपू सुल्तानः विविध आख्यान

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  राम पुनियानी पिछले कुछ सालों से, 10 नवंबर के आसपास, भाजपा, टीपू सुल्तान पर कीचड़ उछालने का अभियान चलाती रही है। पिछले तीन सालों से कर्नाटक सरकार ने आधिकारिक तौर पर टीपू की जयंती मनाना शुरू कर दिया है। टीपू सल्तान देश के एकमात्र ऐसे राजा हैं जिन्होंने अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ते हुए अपनी जान गंवाई। इस साल भी, ...

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चुनाव गुजरात में और दांव पर 2019 है

  जावेद अनीस गुजरात में चुनावी बिगुल बज चूका है और इसी के साथ ही यहाँ की हवा बदली हुई नजर आ रही है. अमित शाह और मोदी का अश्वमेध रथ अपने ही गढ़ में ठिठका हुआ नजर आ रहा है. गुजरात बीजेपी की शीर्ष जोड़ी का गढ़ हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यही के अपने “विकास मॉडल” को पेश करके ...

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ताजमहल और विघटनकारी राजनीति के खेल

–राम पुनियानी भारत, प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर तो है ही, यहां मानव-निर्मित चमत्कारों की संख्या भी कम नहीं है। ये न केवल भारत वरन पूरी दुनिया से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते रहे हैं। अचम्भित कर देने वाली ऐसी ही इमारतों में शामिल है ताजमहल, जिसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी प्रिय पत्नी मुमताज़ महल की याद में ...

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क्या आप यह घण्टाध्वनि सुन रहे हैं ?

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        प्रो. सदानन्द शाही शरद की नवरात्रि स्त्री शक्ति की दृष्टि से विशेष महत्त्वपूर्ण है। इन दिनों दुर्गा अपनी विशेष शक्तियों के साथ जाग्रत होती हैं. नवरात्रि में कन्याओं की पूजा करने का चलन है क्योंकि वे दुर्गा के जीवित विग्रह के रूप में जानी और मानी जाती हैं। नवरात्रि के पहले दिन जब दुर्गा का शैलपुत्री रूप देश भर ...

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“ रागदेश ” जिसे अनसुना कर दिया गया

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जावेद अनीस उग्र राष्ट्रवाद के इस कानफाडू दौर में राज्यसभा टेलीविजन ने “ राग देश ” फिल्म बनायी है जो पिछले 28 जुलाई को रिलीज हुई और जल्दी ही परदे से उतर भी गयी. वैसे तो यह एक इतिहास की फिल्म है लेकिन अपने विषयवस्तु और ट्रीटमेंट की वजह से यह मौजूदा समय को भी संबोधित करती है.यह दक्षिणपंथी राष्ट्रवाद ...

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मध्यप्रदेश : बच्चों के साथ त्रासदियों का पुराना सिलसिला

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जावेद अनीस दुर्भाग्य से गोरखपुर की घटना कोई इकलौती घटना नहीं है इससे पहले भी देश के अनेक हिस्सों में इस तरह की घटनायें होती रही हैं . पूर्व में हुई घटनाओं से हम सीख हासिल सकते थे लेकिन हमने  कभी भी ऐसा नहीं किया है. हमने तो  जवाबदेही को एक दुसरे पर थोपने और हर नये मामले को किसी ...

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नदियों का व्यवहार जाने बिना बाढ़ को नहीं समझ सकते

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      डा. विमल सिंह बाढ़ एक ऐेसा शब्द है जिसे शायद ही कोई न समझता हो। इस शब्द से पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों का बहुत पुराना नाता है. दो नदियां जो इस क्षेत्र के लोगों को सबसे अधिक प्रभावित करती है, वह है घाघरा और राप्ती. इन दोनों नदियों का स्रोत हिमालय में है और यही कारण है कि ...

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नरेन्द्र मोदी सरकार में तानाशाही प्रवृत्ति-नलिनी रंजन मोहंती

नलिनी रंजन मोहंती, अजीत कुमार झा और प्रो. प्रभाशंकर पाण्डेय

गोरखपुर, 29 अगस्त। नरेन्द्र मोदी सरकार में तानशाही प्रवृत्ति है। ठीक वैसी जैसी इंदिरा गांधी सरकार में थी। मोदी सरकार एक तरफ वह गरीबों के लिए लोक लुभावन नारे दे रही है तो दूसरी तरफ लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट कर रही है। अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश लगा रही है और लोकतांत्रिक विरोध के हर आवाज को कुचल रही है। ...

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गोरखनाथ : धीरे धरिबा पाँव

गोरखनाथ

सदानंद शाही अठवीं से लेके बरहवी शताब्दी ले चौरासी सिद्ध लोग अपभ्रंश में कविता करत रहे.  सिद्ध लोगन के कविता में भोजपुरी शब्द आ क्रिया रूप मिलल शुरू हो गईल रहे. चौरासी सिद्धन में सबसे प्रसिद्ध रहलें सरहपा. उन कर एगो कविता देखल जाँ –नगर बाहर रे डोंबि तोहारि कुडिया/छोड़- छोड़ जाई सो बाभन नाड़िया /आलो डोंबि तो सम करबि ...

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भारतीय किसान की मृत्यु का शोकगीत है ‘ गोदान ’ -प्रो गोपाल प्रधान

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प्रेमचन्द जयंती पर ‘ प्रेमचन्द और किसान ’ पर व्याख्यान अलख कला समूह ने ‘ गुल्ली डंडा ’ का मंचन किया गोरखपुर, 31 जुलाई। प्रेमचन्द हिन्दी साहित्य के इतिहास में सबसे बड़े रचनाकार हैं। विषय वस्तु व कला दोनों के मामले में। प्रेमचन्द के साहित्य के केन्द्र में किसान इसलिए नहीं हैं कि वह किसानों की पूजा करते हैं बल्कि ...

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