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विचार

क्या आप यह घण्टाध्वनि सुन रहे हैं ?

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        प्रो. सदानन्द शाही शरद की नवरात्रि स्त्री शक्ति की दृष्टि से विशेष महत्त्वपूर्ण है। इन दिनों दुर्गा अपनी विशेष शक्तियों के साथ जाग्रत होती हैं. नवरात्रि में कन्याओं की पूजा करने का चलन है क्योंकि वे दुर्गा के जीवित विग्रह के रूप में जानी और मानी जाती हैं। नवरात्रि के पहले दिन जब दुर्गा का शैलपुत्री रूप देश भर ...

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“ रागदेश ” जिसे अनसुना कर दिया गया

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जावेद अनीस उग्र राष्ट्रवाद के इस कानफाडू दौर में राज्यसभा टेलीविजन ने “ राग देश ” फिल्म बनायी है जो पिछले 28 जुलाई को रिलीज हुई और जल्दी ही परदे से उतर भी गयी. वैसे तो यह एक इतिहास की फिल्म है लेकिन अपने विषयवस्तु और ट्रीटमेंट की वजह से यह मौजूदा समय को भी संबोधित करती है.यह दक्षिणपंथी राष्ट्रवाद ...

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मध्यप्रदेश : बच्चों के साथ त्रासदियों का पुराना सिलसिला

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जावेद अनीस दुर्भाग्य से गोरखपुर की घटना कोई इकलौती घटना नहीं है इससे पहले भी देश के अनेक हिस्सों में इस तरह की घटनायें होती रही हैं . पूर्व में हुई घटनाओं से हम सीख हासिल सकते थे लेकिन हमने  कभी भी ऐसा नहीं किया है. हमने तो  जवाबदेही को एक दुसरे पर थोपने और हर नये मामले को किसी ...

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नदियों का व्यवहार जाने बिना बाढ़ को नहीं समझ सकते

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      डा. विमल सिंह बाढ़ एक ऐेसा शब्द है जिसे शायद ही कोई न समझता हो। इस शब्द से पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों का बहुत पुराना नाता है. दो नदियां जो इस क्षेत्र के लोगों को सबसे अधिक प्रभावित करती है, वह है घाघरा और राप्ती. इन दोनों नदियों का स्रोत हिमालय में है और यही कारण है कि ...

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नरेन्द्र मोदी सरकार में तानाशाही प्रवृत्ति-नलिनी रंजन मोहंती

नलिनी रंजन मोहंती, अजीत कुमार झा और प्रो. प्रभाशंकर पाण्डेय

गोरखपुर, 29 अगस्त। नरेन्द्र मोदी सरकार में तानशाही प्रवृत्ति है। ठीक वैसी जैसी इंदिरा गांधी सरकार में थी। मोदी सरकार एक तरफ वह गरीबों के लिए लोक लुभावन नारे दे रही है तो दूसरी तरफ लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट कर रही है। अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश लगा रही है और लोकतांत्रिक विरोध के हर आवाज को कुचल रही है। ...

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गोरखनाथ : धीरे धरिबा पाँव

गोरखनाथ

सदानंद शाही अठवीं से लेके बरहवी शताब्दी ले चौरासी सिद्ध लोग अपभ्रंश में कविता करत रहे.  सिद्ध लोगन के कविता में भोजपुरी शब्द आ क्रिया रूप मिलल शुरू हो गईल रहे. चौरासी सिद्धन में सबसे प्रसिद्ध रहलें सरहपा. उन कर एगो कविता देखल जाँ –नगर बाहर रे डोंबि तोहारि कुडिया/छोड़- छोड़ जाई सो बाभन नाड़िया /आलो डोंबि तो सम करबि ...

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भारतीय किसान की मृत्यु का शोकगीत है ‘ गोदान ’ -प्रो गोपाल प्रधान

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प्रेमचन्द जयंती पर ‘ प्रेमचन्द और किसान ’ पर व्याख्यान अलख कला समूह ने ‘ गुल्ली डंडा ’ का मंचन किया गोरखपुर, 31 जुलाई। प्रेमचन्द हिन्दी साहित्य के इतिहास में सबसे बड़े रचनाकार हैं। विषय वस्तु व कला दोनों के मामले में। प्रेमचन्द के साहित्य के केन्द्र में किसान इसलिए नहीं हैं कि वह किसानों की पूजा करते हैं बल्कि ...

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अवैज्ञानिकता के इस दौर में जनता के वैज्ञानिक का जाना…

प्रो यशपाल

राम नरेश राम जन संस्कृति मंच जन विज्ञान के लिए मशहूर बहुप्रतिभा के धनी प्रो. यशपाल हमारे बीच नहीं रहे। 24 जुलाई 2017 को 90 वर्ष की उम्र में नोएडा में उनका देहांत हो गया। वे महान वैज्ञानिक और शिक्षाविद थे। उनका जन्म 26 नवम्बर 1926 को पाकिस्तान वाले पंजाब के हिस्से में चिनाब के किनारे झंग नाम के शहर ...

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कृषि संकट की जड़ें

किसानों की आत्महत्या पर कलाकारों की पीड़ा (साभार -संभावना कला मंच )

जावेद अनीस आज भारत के किसान खेती में अपना कोई भविष्य नहीं देखते हैं. उनके लिये खेती-किसानी बोझ बन गया है. हालात यह हैं कि देश का हर दूसरा किसान कर्जदार है. 2013 में जारी किए गए राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के आंकड़े बताते है कि यदि कुल कर्ज का औसत निकाला जाए तो देश के प्रत्येक कृषक परिवार पर औसतम ...

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प्रेमचंद की एक तस्वीर के अर्थात

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                                               प्रमोद कुमार प्रेमचंद की एक बहुप्रचलित तस्वीर ही अलग-अलग स्केचिंग के साथ छपती व दिखती है. मैंने उसके अतिरिक्त उनकी तीन-चार तस्वीरें ही देखी है. एक में किसी बैठक में वह और नेहरु जी साथ-साथ बैठे हैं. एक दूसरे में वह व जयशंकर प्रसाद साथ खड़े हैं. एक अन्य में वह बिस्तर पकड़ चुके हैं, निराला जी बगल में ...

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