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विचार

जहर बुझी राजनीति का नया दौर

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  जावेद अनीस भारतीय राजनीति विशेषकर उत्तर भारत में दंगों और वोट का बहुत गहरा सम्बन्ध रहा है. कवि गोरख पांडे  की लाईनें  “ इस बार दंगा बहुत बड़ा था, खूब हुई थी खून की बारिश,अगले साल अच्छी होगी,फसल मतदान की  ” आज भी हकीकत है और हमारे समय में तो यह हकीकत और चुनौतीपूर्ण दिखाई पड़ती है जहाँ इस इस दलदल में हम और गहरे तक ...

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क्या अब योग से गरीबी और भुखमरी खत्म होगी

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डॉ संदीप पांडेय (प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता ) 21 जून को दुनिया में योग की लोकप्रियता, जो नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के गठन ये पूर्व ही स्थापित थी, का इस्तेमाल कर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस धूम-धाम से मनाया गया। प्रधान मंत्री का योगदान इतना है कि इधर-उधर चल रहे पृथक प्रयासों को उन्होंने संगठित कर दिया और योग के ...

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समान शिक्षा प्रणाली को लागू करने का संघर्ष

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डॉ संदीप पांडेय (प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता ) मैंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले जिसके तहत सरकारी व्यवस्था में काम करने वाले सभी लोगों को अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में ही अनिवार्य रूप से पढ़ाना चाहिए को लागू कराने के लिए गांधी प्रतिमा, हजतरगंज, लखनऊ में चल रहे अपने अनशन को दसवें दिन किसी आश्वासन पर नहीं बल्कि अपने ...

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इन्सेफेलाइटिस पर सरकार खामोश क्यों है

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डॉ आर एन सिंह खबर है कि हमारे  माननीय प्रधान मंत्री का जुलाई में गोरखपुर आगमन होगा।  ख़बरों के अनुसार इस मौके पर वह “एम्स ” का शिलान्यास करेंगे और गोरखपुर  के वर्षों से बंद पड़े फ़र्टिलाइज़र को  चलाने की घोषणा करेंगे। यह पूर्वांचल के लिए बहुत राहत की बात होगी। सभी इसके लिए कृतार्थ होंगे। लेकिन पूर्वांचल की सबसे ...

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आधुनिकता तथा बुद्धिवाद के प्रवर्तक गौतम बुद्ध

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स्वदेश कुमार सिन्हा 21 मई बुद्ध जयन्ती पर विशेष ‘ आधुनिकता मेेें तर्क बुद्धि और मनुष्य का अधिकार निहित होता हेै’ एक विचारक आज भी भारतीय समाज अपने तमाम जीवन मूल्योें में आधुनिकता के बावजूद एक गैर आधाुनिक समाज ही माना जाता है। शिक्षित जन भी अतार्किक मूल्योें तथा मानसिक पिछड़ेपन के शिकार हैै। ऐसी स्थिति मेेें यह विश्वास करना ...

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अब जरूरत “इंडियन पानी लीग” की है

  जावेद अनीस मानव सभ्यता का विकास पानी के बिना असंभव था, विश्व की सभी प्रमुख सभ्यतायें नदियों और समुद्र तटों पर ही परवान चढ़ी हैं. चाहे महान नील नदी के किनारे प्राचीन मिस्र की सभ्यता  हो या टिगरिस और सिंधु नदी घाटी की मेसोपोटामिया और मोहनजोदड़ो व हड़प्पा की सभ्यतायें. इन सबके बावजूद हम पानी और इसके स्रोतों के महत्व को समझने में नाकाम ...

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पानी नहीं तो क्या हुआ, कोका कोला पियो

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देखो भाई बात एकदम साफ है, क्रिकेट ज्यादा जरूरी है या खेती-किसानी? जाहिर है क्रिकेट ही ज्यादा जरूरी है क्योंकि ये तो राष्ट्रीय महत्व का खेल बन चुका है जो हमारे देश की आन बान शान है। यह सिर्फ देशभक्ति पैदा करने के लिए खेला जाता है। महानायक से लेकर नायक तक सिर्फ देश के लिए बिके हैं, कम्पनी के ...

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कैबिनेट से क्यों, मुल्क से बाहर करवा दें : आज़म ख़ां

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नूरा कुश्ती व्यंग्य डॉ. मुकेश कुमार उत्तरप्रदेश के मंत्री आज़म ख़ाँ का खाना तब तक हज़म नहीं होता जब तक वे किसी से पंगा न ले लें। फिलहाल उनकी राज्यपाल राम नाइक से ठनी हुई है। दोनों बिला नागा एक दूसरे के प्रति अपने प्रेम का सार्वजनिक प्रदर्शन करते रहते हैं।  मैंने पहले सोचा था कि आज़म ख़ाँ का एनकाउंटर ...

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बच्चों से पढ़ाई सीख भाजपा विधायक दे रहे बारहवीं की परीक्षा

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हरियाणा सरकार की नई शिक्षा नीति ने विधायकों को फिर से पढ़ाई की याद दिला दी है। नई शिक्षा नीति के अनुसार पंचायत व म्युनिसिपल चुनावों में शामिल होने के लिए सरकार ने शिक्षण योग्यता निश्चित की है। इसका परिणाम यह हुआ कि 19 साल पहले पढ़ाई को अलविदा बोल चुके भाजपा विधायक को अपने बच्चों से ट्यूशन ले परीक्षा ...

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मौजूदा छात्र प्रतिरोध और नये सियासी प्रयोग की संभावनायें

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जावेद अनीस विश्वविद्यालयों  का काम क्रिटिकल सोच को बढ़ावा देना है और ये अलग अलग विचारधाराओं के नर्सरी होते हैं लेकिन हमारे उच्च शैक्षणिक संस्थान निशाने पर हैं, मामला केवल जेएनयू और एचसीयू (हैदराबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी) का नहीं है, इस सूची में अभी तक आधा दर्जन से अधिक संस्थान शामिल किये जा चुके हैं. इस पूरे कवायद का मकसद इन ...

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