समाचार

आक्सीजन कांड में चीफ फार्मासिस्ट और दो लिपिकों को भी जमानत मिली, जेल से रिहा

बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर
  • 10
    Shares

गोरखपुर. बीआरडी मेडिकल कालेज के आक्सीजन कांड में आरोपित चीफ फार्मासिस्ट गजानंद जायसवाल, सहायक लिपिक लेखा कार्य संजय कुमार त्रिपाठी और कनिष्ठ सहायक लेखा अनुभाग उदय प्रताप शर्मा को 14 सितम्बर को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई. संजय त्रिपाठी 18 सितम्बर को और गजानंद जायसवाल व उदय प्रताप शर्मा आज मंडलीय कारागार गोरखपुर से रिहा हो गए. इसके साथ ही आक्सीजन कांड के सभी 9 आरोपी जमानत पर रिहा हो गये हैं.

चीफ फार्मासिस्ट गजानंद जायसवाल, सहायक लिपिक लेखा कार्य संजय कुमार त्रिपाठी और कनिष्ठ सहायक लेखा अनुभाग उदय प्रताप  शर्मा की जमानत अर्जी पर १४ सितम्बर को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की अदालत में अलग-अलग सुनवाई हुई.  हाई कोर्ट ने तीनों आरोपियों को इस बिना पर जमानत मंजूर कर ली कि इनके सह आरोपियों की पहले ही जमानत हो गई है और इस केस की जाँच पूरी होकर चार्जशीट दाखिल हो चुकी है.

बीआरडी मेडिकल कालेज के आक्सीजन  हादसे में बीआरडी मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य डॉ राजीव मिश्र, बालरोग विभाग के प्रवक्ता एवं एनएचएम के नोडल अधिकारी डॉ कफील खान सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

सबसे पहले नौ अप्रैल 2018 को आक्सीजन सप्लायर पुष्पा सेल्स के निदेशक मनीष भंडारी की सुप्रीम कोर्ट से जमानत हुई. इसके बाद 25 अप्रैल को बाल रोग विभाग के प्रवक्ता एवं एनएचएम के नोडल अधिकारी रहे डा. कफील की जमानत हाईकोर्ट से मंजूर हो गई और वे दोनों जेल से रिहा हो गए. इसके बाद एनस्थीसिया विभाग के अध्यक्ष डॉ सतीश कुमार को हाई कोर्ट से जमानत मिली. पूर्व प्राचार्य डॉ राजीव मिश्र और उनकी पत्नी डॉ पूर्णिमा शुक्ल को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली. सहायक लिपिक सुधीर कुमार पांडेय को 7 अगस्त 2018 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली.  उन्हें 120 बी आईपीसी और7/13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का आरोपी बनाया गया है.

चीफ फार्मासिस्ट  58 वर्षीय गजानंद जायसवाल  के विरुद्ध पुलिस ने 120 बी, 466, 468, 469, 471 आईपीसी तथा 7/13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है. उन्हें 13 सितम्बर को गिरफ्तार किया गया था। मूल रूप से गोरखपुर जिले के पीपगंज कस्बे के रहने वाले हैं गजानंद जायसवाल पांच वर्ष पहले वह तबादला होकर बीआरडी मेडिकल कालेज आए थे। जेल से छूटने के बाद उन्होंने गोरखपुर न्यूज़ लाइन से बात करते हुए कहा कि आक्सीजन कांड से उनका कोई सम्बन्ध नहीं था. फिर भी उन्हें इस मामले में फंसा दिया गया और उन्हें एक वर्ष तक जेल में रहना पड़ा.

श्री जायसवाल के घर में पत्नी और इकलौता बेटा वैभव जायसवाल है। 26 वर्षीय वैभव नई दिल्ली में कम्प्यूटर कम्पनी में काम कर रहे थे। पिता के जेल जाने के कारण उन्हें नौकरी छोड़कर घर लौटना पड़ा है क्योंकि मां की मदद करने और पिता के लिए कानूनी लड़ाई  लड़ने वाला और कोई नहीं था।

सहायक लिपिक लेखा कार्य संजय कुमार त्रिपाठी के विरूद्ध 120 बी आईपीसी और7/13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया है।

आक्सीजन हादसे के नवें आरोपी कनिष्ठ सहायक लेखा अनुभाग उदय प्रताप शर्मा के खिलाफ 120 120 बी आईपीसी और7/13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है.

Add Comment

Click here to post a comment