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रोक के बावजूद बालिका गृह में लड़कियों को भेजने पर सभी थानों से रिपोर्ट मांगी गई

एस पी की प्रेसवार्ता के दौरान मौजूद गिरफ्तार गिरिजा त्रिपाठी व उनके पति मोहन त्रिपाठी साभार- देवरिया लाइव
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देवरिया। रोक के बावजूद एक वर्ष तक मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान द्वारा संचालित बालिका गृह व स्वाधार गृह में पुलिस द्वारा बालिकाओं और महिलाओं को भेजने के मामले में आखिरकार जांच शुरू हो गई है। हाईकोर्ट के कड़े रूख के बाद देवरिया के पुलिस कप्तान के निर्देश के बाद सभी थानों से 30 सितम्बर 2017 से 31 जुलाई 2018 तक मां मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान द्वारा संचालित बालिका गृह व स्वाधार गृह में भेजे गईं लड़कियों और महिलाओं के बारे में डिटेल रिपोर्ट मांगी गई है।
पुलिस कप्तान के निर्देश पर सभी थानों को वायरलेस सेट से यह रिपोर्ट देने को कहा गया। यह रिपोर्ट महिला थाने के प्रभारी जितेन्द्र तिवारी को देने को कहा गया है। इस रिपोर्ट में लड़कियों और महिलाओं को भेजने वाले थाने का नाम, थानेदार का नाम, विवेचक का नाम माँगा गया है।
गोरखपुर न्यूज लाइन ने 13 अगस्त की सुबह यह रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि रोक के बावजूद इस संस्था की बालिका गृह को पुलिस द्वारा 225 बालिकाओं और स्वाधार गृह को 210 महिलाओं की सुपुर्दगी दी गई।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने भी 13 अगस्त को इस मामले की सुनवाई करते हुए यह सवाल उठाया था कि रोक के बावजूद शेल्टर होम मंे लड़कियों और महिलाओं को भेजने वाले पुलिस कर्मियों पर अब तक क्यों कार्रवाई नहीं की गई है।
अब पता चला है कि रेलवे सुरक्षा बल आरपीएफ ने भी इस दौरान बरामद बालक-बालिकाओं, लड़कियों-महिलाओं को गिरिजा त्रिपाठी के शेल्टर होम में भेजा। आरपीएफ के आईजी ने भी इस बारे में देवरिया और भटनी पोस्ट से रिपोर्ट मांगी है।

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