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डॉ अंबेडकर का सपना संवैधानिक भारत बनाने का था : डॉ दुर्गा प्रसाद यादव

दलित साहित्य एवं संस्कृति मंच ने  “ डा. अम्बेडकर के सपनों का भारत ” व्याख्यान एवं कवि गोष्ठी का आयोजन किया

गोरखपुर. दलित साहित्य एवं संस्कृति मंच गोरखपुर के तत्वावधान में भारत रत्न बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर के 63 वें महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर उनकी स्मृति में 8 दिसम्बर को “ डा. अम्बेडकर के सपनों का भारत” विषय पर डॉ दुर्गा प्रसाद यादव का व्याख्यान एवं कवि गोष्ठी का आयोजन मुंशी प्रेमचंद पार्क किया गया.

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व अपर आयुक्त, वाणिज्य कर हरिशरण गौतम और संचालन मंच के अध्यक्ष कवि सुरेश चन्द ने किया।


कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा बाबा साहब डा अम्बेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने से हुई. उसके बाद डा. दुर्गा प्रसाद यादव का व्याख्यान हुआ।

डा. दुर्गा प्रसाद यादव ने अपने व्याख्यान की शुरूआत करते हुए कहा कि बाबा साहब डा अम्बेडकर के जीवन का निचोड उनके द्वारा निर्मित भारतीय संविधान है। उन्होंने संविधान की उद्देशिका पढ़कर संविधान के मूल तत्वों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब तक आप अपने अधिकारों को नहीं जानेंगे तब तक आप उसकी रक्षा भी नहीं कर पायेंगे। अतः हर व्यक्ति को न केवल भारत का संविधान अपने घरों में रखना चाहिए बल्कि उसका अध्ययन भी करना चाहिये।

उन्होंने कहा कि बाबा साहब एक संवैधानिक भारत बनाना चाहते थे। इसमें वे सबकी बराबरी चाहते थे। वे वर्णव्यवस्था जातिप्रथा के बरक्स समतामूलक समाज का सपना देखते थे। बाबा साहब ने कहा है कि जो अपना इतिहास नहीं जानता है उसका न तो कोई वर्तमान होता है और न ही उसका कोई भविष्य। बाबा साहब ने हमें हमारे वैभवशाली इतिहास को बताया। हमारा वैभवशाली इतिहास बुद्ध से जुड़ा है। बुद्ध को जाने बिना हमारा इतिहास अधूरा है। इस देश में इतिहासकारों द्वारा हमें हमारे इतिहास को छुपाया गया। इतिहास में हमें बुद्ध से लेकर फुले तक हमारे महापुरूषों को कभी नहीं पढ़ाया गया। अतः हमें अपने महापुरूषों के इतिहास को एवं अपने गौरवशाली परंपरा को जानना जरूरी है।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज आर एस एस जैसी संस्थायें संविधान को नष्ट करने का कुचक्र रच रही हैं। इनके एजेण्डे में आरक्षण मुक्त भारत, मुस्लिम मुक्त भारत और संविधानमुक्त भारत है। ये मनुस्मृति को लाना चाहते हैं। वर्णव्यवस्था और असमानता को लाना चाहते हैं। अतः हमें संविधान की रक्षा करनी होगी। बाबा साहब के सपनों का भारत अगर हम बनाना चाहते हैं तो हमें संवैधानिक भारत का निर्माण करना होगा।’’

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हरिशरण गौतम ने कहा कि एक तरफ तो छब्बीस नवम्बर को संविधान दिवस मनाया जा रहा है तो दूसरी तरफ सत्ता द्वारा संविधान को कमजोर करने का कुचक्र रचा जा रहा है। आज रेलवे, ओ एन जी सी समेत अनेक सरकारी संस्थाओं का निजी हाथों में बेचने की तैयारी हो चुकी है। इससे आरक्षण की व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है। यह गहरी साजिश है। आज एस सी, एस टी और ओ बी सी का जो भी विकास हुआ है वह आरक्षण से ही हुआ है। निजी करण करके श्रम कानूनों को भी बदला जा रहा है। ऐसी खबर है कि काम के घण्टों को 8 से बढ़ाकर 12 घण्टे करने की योजना बन रही है। दुख है कि आज संवैधानिक आरक्षण के द्वारा संसद में पहुंचे एस सी, एस टी, ओ बी सी के सांसद अपनी आवाज नहीं उठाते हैं क्योंकि वे अपनी अपनी राजनैतिक पार्टियों के कठपुतली मात्र हैं। अतः आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती संविधान को बचाने की है। हमें लोगों को शिक्षित एवं संगठित करते हुए संघर्ष करना होगा तभी हम बाबा साहब के सपनों को पूरा कर सकेंगे।

इस अवसर पर प्रेमचन्द साहित्य संस्थान के सचिव एवं पत्रकार मनोज कुमार सिंह ने कहा कि डा. अम्बेडकर विश्व के महत्वपूर्ण क्रांतिकारी चिंतक हैं। वे समतामूलक जातिविहीन समाज की स्थापना करना चाहते थे। वे भूमि की समस्या को हल करना चाहते थे। जाति व्यवस्था का पूर्ण खात्मा उनका लक्ष्य था। वे स्त्री मुक्ति के भी हिमायती थे। बिना सामाजिक एवं आर्थिक असमानता दूर किये बाबा साहब का सपना अधूरा है। प्रेमचन्द भी महाजनी व्यवस्था खत्म करना चाहते थे। भगत सिंह भी सामंतवादी एवं पूजीवादी व्यवस्था खत्म करना चाहते थे। आज जरूरत है कि सभी मुक्ति के आकांक्षी लोग एकजुट हों तथा मिलकर समतामूलक समाज के निर्माण के लिये संघर्ष करें तभी हम बाबा साहब के सपनों को पूरा कर सकते है।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कविता पाठ का कार्यक्रम हुआ जिसमें डा. संजय कुमार आर्य ने अपने दोहों का पाठ करते हुए कहा –

” वाई फाई फोर जी, पीपल की है छांव।
पीने को पानी नहीं, पूरा डिजिटल गांव।।’’

हरिशरण गौतम ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा-

” चारो तरफ अंधेरा ही अंधेरा है, एक दीया जलाओ तो जानूं ’’

लोक गायक एवं गीतकार अच्छेलाल गोरखपुरी ने गीतों के माध्यम से आडंबर पर प्रहार किया तो रामचन्द्र प्रसाद त्यागी ने कहा-

” क्यूं मेरी ही बस्ती जलायी जाती है। बच्चे आग के हवाले होते हैं ? ’’

कवि अनिल कुमार गौतम ने आदमी शीर्षक कविता का पाठ करते हुए मनुष्य के गिरते हुए जीवन मूल्यों एवं उसके दोहरे चरित्र पर मार्मिक प्रकाश डाला.

कवि सुरेश चन्द ने अपने दोहे एवं गीत प्रस्तुत किया और कहा-

“उठत फिरत पूजा करत, तंत्र मंत्र दिन रात।
बिनु शिक्षा रोजगार के, कुछ हू ना फरियात।। “

कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि, गीतकार एवं गजलकार देवेन्द्र आर्य ने भी अपनी रचनायें पढ़ी.

पढ़ी गयी कविताओं पर प्रकाश डालते हुए अधिवक्ता श्याम मिलन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का कविता पाठ एवं विचारगोष्ठी का कार्यक्रम बहुत ही गुणवत्तापूर्ण है. पढ़ी गयी कविताएं बाबा साहब के सपनों का भारत बनाने के लिये हमें प्रेरित करती हैं. आज लड़ाई दर्शन की है. समता स्वतंत्रता एवं बंधुता पर आधारित समाज बनाने के लिये बाबा साहब के दर्शन को जानना जरूरी है.

धन्यवाद ज्ञापन रंगकर्मी बैजनाथ मिश्र ने किया तथा कहा कि इस तरह के कार्यक्रम निरंतर होते रहना चाहिए. कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अवधेश राम, जगदीश चन्द, रमाशंकर राम, श्रवण कुमार, संतराज, डी पी आनंद, इमामुद्दीन, रितुराज यादव, सुरलाल बौद्ध, संजय कुमार गुप्त ’अबोध’, अशोक कुमार, यदुनंदन तथा रघुपति प्रसाद सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

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