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डा. कफील ने प्रशासनिक जांच कमेटी के अध्यक्ष से मिल आरोप पत्र का जवाब दिया

चार विंदुओं पर लगाए गए आरोप का लिखित और मौखिक साक्ष्य दिया
प्रमुख सचिव खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन हिमांशु कुमार हैं जांच कमेटी के अध्यक्ष

गोरखपुर, 21 मई। बीआरडी मेडिकल कालेज के निलम्बित प्रवक्ता एवं एनएचएम के नोडल प्रभारी रहे डा. कफील अहमद खान ने आज लखनउ में प्रमुख सचिव खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग से मिलकर अपने खिलाफ चल रही प्रशसनिक जांच से सम्बन्धित सभी आरोपों पर लिखित और मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किया.

आक्सीजन हादसे के आठ आरोपी जिनमें चार चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट और तीन कर्मचारी हैं, को इस घटना में आरोपी बनाए जाने के बाद निलम्बित कर दिया गया था. घटना की पुलिस जांच के अलावा अलग से प्रशासनिक जांच भी चल रही है.

जांच कमेटी के अध्यक्ष खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव हिमांशु कुमार हैं. जांच कमेटी ने डा. कफील को 12 सितम्बर 2017 को आरोप पत्र दिया था जिसमें चार आरोप थे. यह आरोप चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक की जांच आख्या पर आधारित थे.

आरोप पत्र में पहला आरोप यह था कि बीआरडी मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग में डा. कफील को 23.05.2013 को सीनियर रेजीडेंट नियुक्त किया गया था. इस पर पर रहते प्राइवेट प्रैक्टिस की अनुमति नहीं थी, फिर भी उन्होंने मेडिस्प्रिंग हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, नहर रोड रूस्तमपुर में प्राइवेट प्रैक्टिस की. दूसरा आरोप यह था कि डा. कफील का उत्तर प्रदेश मेडिकल कौंसिल में पंजीकरण नहीं है. इसके बावजूद उन्होंने प्राइवेट प्रैक्टिस की जबकि बिना पंजीकरण कर वह ऐसा नहीं कर सकते थे.

आरोप पत्र में तीसरा आरोप यह लगाया गया था कि उन्होंने मेडिकल आक्सीजन की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों को जानकारी नहीं दी और उनके द्वारा चिकित्सकीय लापरवाही किया गया. चौथा आरोप यह लगाया गया था कि 100 बेड के एईएस वार्ड का प्रभारी के पद के दायित्व का उन्होंने ठीक से निर्वहन नहीं किया और अधीनस्थों पर समुचित नियंत्रण नहीं रखा .

आज डा. कफील लखनउ जाकर प्रमुख सचिव हिमांशु कुमार से मिले और उन्होंने आरोपो के सम्बन्ध में लिखित जवाब प्रस्तुत किया। वह करीब आधा घंटे प्रमुख सचिव के दफ्तर में रहे। आरोपों के जवाब में डा. कफील ने लिखा है कि उन्होंने बीआरडी मेडिकल कालेज में स्थायी प्रवक्ता का पद 8 अगस्त 2016 को ज्वाइन किया था. अपनी ज्वाइनिंग के बारे में सीएमओ को जानकारी दी थी और सीएम्ओ ने मुझे मेडिकल सर्टिफिकेट भी जारी किया था. वह 100 बेड के एईएस वार्ड के प्रभारी नहीं थे.  इस वार्ड के प्रभारी डा. भूपेन्द्र शर्मा थे. वह विभाग में सबसे कनिष्ठ थे और आक्सीजन के टेंडर, खरीद, भुगतान की किसी भी प्रक्रिया से वह जुड़े नहीं थे.

डा. कफील ने अपने जवाब में लिखा है कि आक्सीजन की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत न कराने का आरोप एकदम निराधार है. उन्होंने सभी उच्चाधिकारियों-प्रिंसिपल, बाल रोग विभाग की अध्यक्ष, डीएम गोरखपुर, सीएमओ गोरखपुर आदि को अवगत कराया था. उन्होंने एक नहीं तीन दिन तक आक्सीजन की कमी से उत्पन्न परिस्थितियों को संभालने का अपने सहयोगियों के साथ हर संभव प्रयास किया.

उन्होंने अपने जवाब में यह भी लिखा है कि पुलिस जांच में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, इंडियन मेडिकल मेडिकल काउंसिल एक्ट, आईटी एक्ट, धारा 420 के सम्बन्ध में कोई सबूत नहीं मिला और इस कारण यह सभी आरोप उनसे हटा लिए गए हैं. उच्च न्यायालय ने जमानत आर्डर में उल्लेखन किया है कि उनके खिलाफ चिकित्सकीय लापरवाही का कोई आरोप नहीं बनता है और वे आक्सीजन के टेंडर, खरीद, भुगतान से उनका कोई वास्ता नहीं था.

उन्होंने लिखित जवाब में अनुरोध किया है निष्पक्ष जांच कर उनका निलम्बन वापस लिया जाय और उन्हें बीआरडी मेडिकल कालेज में सेवा का अवसर दिया जाय ताकि वह गरीब बच्चों, इंसेफेलाइटिस से ग्रस्त बच्चों के इलाज में अपना योगदान कर सकें.

इसके पहले डा. कफील ने 19 मई को बीआरडी मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य डा. गणेश कुमार से मिलकर उन्हें लिखित पत्र देते हुए निलम्बन समाप्त करने की मांग की थी.  इस पत्र में उन्होंने पुलिस जांच में आरोपों की पुष्टि न होने और हाईकोर्ट के बेल आर्डर में चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप नहीं बनने का उल्लेख करते हुए निलम्बन समाप्त कर बीआरडी मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग में प्रवक्ता पद पर ज्वाइन कराने का अनुरोध किया है.

डा. कफील ने गोरखपुर न्यूज लाइन को बताया कि प्रमुख सचिव हिमांशु कुमार ने उन्हें भरोसा दिलाया कि जांच पूरी तरह से निष्पक्ष होगी और उम्मीद जतायी कि एक पखवारे में जांच पूरी जो जाएगी.

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