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टाइम्स नाऊ और अर्नब गोस्वामी के खिलाफ मानहानि का केस करेंगे डॉ कफील खान

लखनऊ. आक्सीजन कांड में बीआरडी मेडिकल कालेज के निलम्बित प्रवक्ता डॉ कफील खान अपने बारे में झूठी खबर चलाने के आरोप  टाइम्स नाऊ और टीवी पत्रकार अर्नब गोस्वामी के खिलाफ मानहानि का केस करेंगे.

यह जानकारी उन्होंने आज लखनऊ में प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता में दी. उन्होंने कहा कि हाल ही में योगी सरकार ने दावा किया था कि ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं थी. ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चों की मौतें नहीं हुई. इसके विपरीत सरकार ने हाई कोर्ट के हलफनामे में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी को स्वीकार किया है. माननीय उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल 2018 को अपने फैसले में कहा कि तरल ऑक्सीजन की आपूर्ति में आपूर्तिकर्ता को बकाया भुगतान न करने के कारण हुई और इसके परिणामस्वरूप इतने सारे बच्चों की मृत्यु हो गई.

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सीएमएस के पत्र में दिनांक 11/08/2017 को कहा गया है कि “तरल ऑक्सीजन पूरी तरह से खत्म हो गया है. ”
डॉ कफील खान ने कहा कि हाल ही में आरटीआई में सरकार ने स्वीकार किया है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 11,12 वें अगस्त 2017 को 54 घंटे तक तरल ऑक्सीजन की कमी थी और डॉ0 कफील खान ने बच्चों को बचाने के लिए वास्तव में जम्बो ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की थी. एक अन्य आरटीआई से पता चला कि डॉ0 कफील खान सबसे जूनियर डॉक्टर थे (08/08/16 को लोक सेवा आयोग द्वारा प्रवक्ता के रूप में नियुक्त ).  न तो डॉ0 कफील खान इंसेफेलाइटिस वार्ड के प्रमुख थे और न ही वाइस प्रिंसिपल. इसके बावजूद टाइम्स नाऊ ने मुझे बी0आर0डी0 मेडिकल कॉलेज का वाइस प्रिंसिपल बताते हुए फर्जी खबर चलायी. इसके लिए मैं जल्द ही टाइम्स नाऊ और उनके पूर्व पत्रकार अर्नब गोस्वामी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करूंगा ।

 

डॉ कफील ने आरोप लगाया कि इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण का योगी सरकार का दावा झूठा है. उन्होंने कहा कि सरकार वास्तविक डेटा जारी नहीं कर रही है. हाल ही में एक आरटीआई से 2018 में इंसेफेलाइटिस के कारण केवल बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 161 से अधिक मौतों का होने का खुलासा हुआ है.

आक्सीजन त्रासदी के पीड़ितों को मुआवजा मिले

डॉ कफील ने कहा कि बीआरडी ऑक्सीजन त्रासदी में जिन माता-पिता ने अपने मासूम को खो दिया, वे अभी भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं । मैं मांग करता हूं कि सरकार इस घटना के लिए माफी मांगे और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दे. उन्होंने कहा कि बीआरडी नरसंहार के दोषी वो सारे लोग है जिन्होंने लिक्विड ऑक्सिजन सप्लायर के 14 पत्रों के बाद भी कमीशन के चक्कर में पेमेंट नहीं किया. इनमे हेल्थ मिनिस्टर भी शामिल है. मेरी माँग है की स्वास्थ्य मंत्री को तुरंत बर्खास्त करना चाहिए और सारे मामले की सीबीआई जाँच होनी चाहिए.

भाई पर हमले की सीबीआई जाँच के लिए उच्च न्यायालय में याचिका 

डॉ कफील कहाँ ने कहा कि 9 महीने के कठिन समय एवं भावनात्मक और शारीरिक उथल-पुथल के बाद, जब मैं अपना जीवन शुरू करने की कोशिश कर रहा था तभी दो हमलावरों ने मेरे भाई को मुख्य मंत्री के आवास के पास मारने की कोशिश की. बाद मे यू0पी0 पुलिस के भयानक, असंवेदनशील रवैये के रूप मे उन्होने गोलियां निकालने के लिए ऑपरेशन मे देरी की, जो मेरे भाई की जान बचाने के लिए जरूरी था |
इस घटना को 10 महीने से अधिक हो गई है और जांच कहीं नहीं चल रही है. हमने सीबीआई द्वारा जांच के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है.

500 बेड का इन्सेफ़्लाइटिस उपचार केंद्र बनाना चाहता हूँ

डॉक्टर कफ़ील खान ने भविष्य की योजना के बारे में बताते हुए कहा कि इन्सेफ़्लाइटिस भारत में एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है. विशेष रूप से पूर्वी यू0पी0, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम पूरे देश में ए0ई0एस0 के लगभग 60% मामले योगदान रखते है. पिछले 25 वर्षो से लगभग 25000 बच्चों की जान चली गई है और 100000 से भी अधिक बच्चे जीवन के लिए अक्षम हो गए है. मेरे जीवन का मिशन और मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट पूर्वी उत्तर प्रदेश में घातक बीमारी से लड़ने के लिए 500 बेड का इन्सेफ़्लाइटिस उपचार केंद्र स्थापित करना है, जहां इलाज और दवाइयां और पुनर्वास दोनों ही गरीब मरीजों के लिए मुफ्त होंगे .

उन्होंने कहा कि खाली समय में मैं गरीब वंचित बच्चों के लिए मुफ्त चिकित्सा शिविर कर रहा हूं. जेल से बाहर आने के बाद मैंने 25 से अधिक मुफ्त चिकित्सा शिविर किए हैं और 5000 से अधिक बच्चों की जांच की है. मैंने अपनी पुस्तक का दूसरा संस्करण लिखकर भी अपने समय का सदुपयोग किया.
मेरी  “Manipal Manual of clinical paediatric ” जल्द ही प्रकाशित होने वाली है.

स्वस्थ भारत अभियान के साथ कर रहा हूँ कार्य

डॉ कफील ने कहा कि हमने एक स्वस्थ भारत अभियान बनाया है जिसमें पूरे भारत के प्रसिद्ध स्वास्थ्य कार्यकर्ता योगदान दे रहे हैं और 10 मुख्य मांग के साथ स्वास्थ्य नीति का प्रस्ताव बना रहे हैं
हम घोषणा पत्र में इसे शामिल करने के लिए सभी राजनीतिक दलों से मिलेंगे. स्वस्थ भारत अभियान  की मांग है –

1-बिना किसी वित्तीय कठिनाइयों का सामना किए, अच्छी गुणवत्ता की स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक पहुँच- जाति / धर्म / क्षेत्र  / लिंग / विकलांगता / आर्थिक स्थिति के बावजूद हर उम्र मे सभी के लिए

2-सरकार को अपने नागरिकों के लिए सस्ती, पर्याप्त, नई और स्वीकार्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करनी चाहिए- सभी सार्वजनिक अस्पतालों में मुफ्त परामर्श, मुफ्त दवाएं, मुफ्त निदान और मुफ्त आपातकालीन देखभाल सेवाएं करनी चाहिए |

3-सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को जीडीपी के 2.5% तक बढ़ाना |

4-कुल स्वास्थ्य बजट को बढाकर 1.2 लाख करोड़ / प्रति वर्ष
5-सभी 1.5 लाख मौजूदा रिक्त पदों को भरें और हर साल 10000 नौकरियाँ बनाए |

6-NHM कर्मचारियों को नियमित करना, समान काम के लिए समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा |

7-आशा कार्यकर्ताओं को 15000/- प्रति माह और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 10000/- प्रति माह वेतन देना |

8-स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी की दर को मौजूदा 18% से घटाकर 5% करना, जिससे कि यह आम आदमी के लिए सस्ती हो सके |

9-कैंसर और मधुमेह जैसी गम्भीर बीमारियों & ओपीडी उत्पादों और दवाओं के लिए जीएसटी दर मे छूट

10- मेडिकल टेक्नोलोजी  इक्यूपमेंट की जीएसटी की दर 5% तक कम हों

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