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dr rajeev mishra

बीआरडी मेडिकल कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य डा. राजीव मिश्र 10 महीने 11 दिन बाद जमानत पर रिहा

गोरखपुर, 10 जुलाई. आक्सीजन हादसे में जेल में बंद बीआरडी मेडिकल कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य  डा. राजीव मिश्र 9 जुलाई को जमानत पर 10 महीने 11 दिन बाद रिहा हो गए. जेल से बहार आने के बाद बड़ी संख्या में वहां उपस्थित चिकित्सकों ने फूल -माला पहनाकर उनका स्वागत किया. डॉ मिश्र ने इस मौके पर पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि  बाद में बात करेंगे.

डॉ मिश्र को 3 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी. डॉ मिश्र  29 अगस्त 2017 को अपनी पत्नी डॉ पूर्णिमा शुक्ल के साथ कानपुर से गिरफ्तार किये गए थे.डॉ पूर्णिमा शुक्ल अभी भी जेल में बंद हैं. उनकी जमानत हाई कोर्ट से ख़ारिज हो गई है. उनकी जमानत अर्जी पर इसी हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है.

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डॉ राजीव मिश्र कल रात 8.30 बजे मंडलीय कारागार से रिहा हुए. शाम 5 बजे से ही जेल के बाहर मेडिकल कालेज के चिकित्सक-डॉ राजकिशोर सिंह, डॉ अश्वनी मिश्र, डॉ अशोक यादव, डॉ एम क्यू बेग, डॉ रामजी सिंह, डॉ मामून खान, डॉ रणविजय दुबे, डॉ सुधीर,  इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, गोरखपुर  के अध्यक्ष जेपी जायसवाल, सचिव आर पी शुक्ला, डॉ बीबी त्रिपाठी, डॉ मंगलेश श्रीवास्तव, परिवारीजन और शुभचिन्तक उनके स्वागत में खड़े थे. डॉ राजीव मिश्र के जेल से बाहर आने पर कई लोगों ने उन्हें माला पहनाई तो कुछ ने उनके पैर छुए. जेल से रिहा होने के बाद डॉमिश्र अपने बेटे डॉ पूरक मिश्र, भाई  डॉ अनूप मिश्र के साथ बीआरडी मेडिकल कालेज स्थित अपने आवास पहुंचे. वहां भी उनके स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.

जेल में रहने के दौरान डॉ मिश्र की तबियत कई बार ख़राब हुई और उन्हें इलाज के लिए लखनऊ स्थित राम मनोहर लोहिया इंस्टिट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया था.

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आक्सीजन हादसे में पुलिस ने डॉ मिश्र के विरूद्ध 409, 308,120 बी आईपीसी, 7/13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत और उनकी पत्नी डा. पूर्णिमा शुक्ल के विरूद्ध 120 बी आईपीसी, 7/13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया है. दोनों को 29 अगस्त को कानपुर से गिरफ्तार किया गया था। डॉ राजीव मिश्र की जमानत अर्जी 30 अप्रैल को हाई कोर्ट ने ख़ारिज कर दी थी.उसके बाद पूर्णिमा शुक्ल की भी जमानत अर्जी हाई कोर्ट से ख़ारिज हो गई थी.

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