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ईद-उल-अजहा का त्यौहार 22 को मनाया जायेगा

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गोरखपुर। तंजीम उलेमा-ए-अहले सुन्नत की एक मीटिंग नार्मल स्थित दरगाह पर हुई जिसमें निर्णय लिया गया कि ईद-उल-अजहा का त्यौहार 22 अगस्त बुधवार को अकीदत के साथ मनाया जायेगा।

मीटिंग में मुफ्ती खुर्शीद अहमद मिस्बाही, मुफ्ती अख्तर हुसैन, मुफ्ती मो. अजहर शम्सी, कारी अफजल बरकाती, कारी नियाज अहमद, मौलाना गुलाम दस्तगीर, मौलाना शम्सुज्जमा, मौलाना मकसूद आलम, कारी शराफत हुसैन, मौलाना जहांगीर अहमद, मौलाना मोहम्मद अहमद, कारी अंसारुल हक कादरी, कारी मोहसिन बरकाती, कारी अय्यूब बरकाती, मौलाना अब्दुल्लाह बरकाती, मौलाना असलम रजवी, मौलाना हिदायतुल्लाह कादरी आदि की सहभागिता रही।

जुमा की तकरीर में इमामों ने बयान की कुर्बानी की फजीलत

22 अगस्त को ईद-उल-अजहा त्यौहार के मद्देनजर शहर की विभिन्न मस्जिदों में इमामों ने जुमा की तकरीर में कुर्बानी की फजीलत बयान की। हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम व हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम का वाकिया बयान किया। आवाम से अपील भी की गयी कि त्यौहार में साफ-सफाई का खास ध्यान रखा जाये। यह भी अनुरोध किया गया कि कुर्बानी का गोश्त पास-पड़ोस, गरीबों, फकीरों में जरूर बांटा जाये। कुर्बानी के जानवर की खाल मदरसों व दीनी दर्सगाह को दी जाये। जिससे मदरसों में पढ़ने वाले तालिबे इल्म को सहूलियत हो।

मस्जिद जामे नूर बहादुर शाह जफ़र कालोनी बहरामपुर में इमाम मौलाना कलीमुल्लाह ने तकरीर में कहा कि खास जानवर को खास दिनों में कुर्बानी की नियत से जिब्ह करने को कुर्बानी कहते है। हदीस में इसकी बेशुमार फजीलतें आयी है।

गाजी मस्जिद गाजी रौजा में मुफ्ती अख्तर हुसैन (मुफ्ती-ए-गोरखपुर) ने कहा कि अल्लाह ने कुरआन शरीफ में कुर्बानी का हुक्म दिया हैं। मालिके निसाब पर कुर्बानी वाजिब है। उन्होंने लोगों से शंति व्यवस्था बनाये रखने व साफ-सफाई रखने की अपील की, साथ ही कहा कि कुर्बानी की तस्वीरात व वीडियो न बनाये जायें और न ही सोशल मीडिया पर शेयर किया जाये। दिखावा अल्लाह को पसंद नहीं हैं। कुर्बानी से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को गड्ढ़ों में दफन करें। हड्डियां सड़कों पर न फेंके। कुर्बानी का गोश्त पास-पड़ोस, गरीबों व फकीरों में जरुर बांटे।

नूरी जामा मस्जिद अहमदनगर चक्शा हुसैन में मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने बताया कि कुर्बानी हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है। कुर्बानी में भेड़, बकरी, दुम्बा सिर्फ एक आदमी की तरफ से एक जानवर होना चाहिए और भैंस, ऊंट में सात आदमी शिरकत कर सकते हैं। कुर्बानी के लिए ऊंट पांच साल, भैंस दो साल, बकरी व खशी एक साल का होना चाहिए।

सब्जपोश मस्जिद जाफरा बाजार में इमाम हाफिज व कारी रहमत अली ने सामूहिक कुर्बानी स्थलों पर पर्दा लगाकर कुर्बानी करने की अपील की साथ ही कहा कि इस्लाम ने कई सौ साल पहले स्वच्छता को आधा ईमान करार दिया हैं। इस्लाम चौदह सौ साल से साफ-सफाई का दर्स देता चला आ रहा हैं। साफ-सफाई अल्लाह को पसंद हैं इसका हर मुसलमान को खास ख्याल रखना चाहिए। कुर्बानी खुश दिल से करें। कुर्बानी को लेकर किए जा रहे मजाकिया मैसेजों से सख्ती के साथ खुद भी बचें और दूसरों को भी बचायें।

मस्जिद सुभानिया तकिया कवलदह में इमाम मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी ने हजरत इब्राहीम व हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम का वाकिया बयान किया। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का हर त्यौहार शांति का दर्स देता हैं। लिहाजा इसका ख्याल रखें कि हमारे किसी काम से किसी को भी जर्रा बराबर तकलीफ न होने पायें।

नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में इमाम मौलाना मो. असलम रजवी ने कहा कि जिलहिज्जा की 10,11,12 तारीख (22, 23 व 24 अगस्त) कुर्बानी के लिए खास दिन है। मगर पहला दिन अफजल है। देहात में 10 जिलहिज्जा की तुलू फज्र के बाद ही से कुर्बानी हो सकती है मगर बेहतर यह है कि तुलू आफताब के बाद कुर्बानी की जाये।

मकबरे वाली मस्जिद बनकटीचक में इमाम मौलाना गुलाम दस्तगीर ने कहा कि इस त्यौहार में हर वह मुसलमान जो आकिल बालिग मर्द औरत जिसके पास तकरीबन 25 हजार रूपया हो हाजते अस्लिया को छोड़कर उसके ऊपर कुर्बानी वाजिब है। कुर्बानी के तीन दिनों के अंदर अगर उक्त रकम अा जायेगी तो कुर्बानी करवानी पड़ेगी।

रहमतनगर जामा मस्जिद में इमाम मौलाना अली अहमद कहा कि कुर्बानी स्थलों पर साफ-सफाई का उचित प्रबंध किया जाये। अपशिष्ट पदार्थ, हड्डी खून वगैरह गड्ढ़ों में दफन किया जाये।

गौसिया मस्जिद छोटे काजीपुर में इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद ने कहा कि कुर्बानी के दिन रोजा रखना हराम हैं, क्योंकि यह दिन मेहमान नवाजी का है।

मस्जिद खादिम हुसैन तिवारीपुर में इमाम कारी अफजल बरकाती ने कहा कि कुर्बानी के दिनों में अमीर-गरीब सब बराबर हो जाते हैं। कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से कर लें। एक हिस्सा गरीबों में, एक हिस्सा दोस्त व अहबाब और एक अपने घर वालों के लिए रख छोड़े।

बरकातिया मस्जिद मिर्जापुर में मौलाना मो. सद्दाम हुसैन ने कहा कि कुर्बानी के दिनों में साफ-सफाई का सभी खास ख्याल रखें।

चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में इमाम हाफिज महमूद रजा ने कहा कि कुर्बानी की खाल सदका कर दें या किसी दीनी मदरसें को दे।

हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद नार्मल में इमाम मौलाना मकसूद आलम ने कहा कि कुर्बानी हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है। जिसे अल्लाह ने इस उम्मत के लिए बाकी रखा। बेहतर है दसवीं जिलहिज्जा को नमाज से पहले कुछ न खायें, गुस्ल करें साफ सुथरे या नये कपड़े पहने, खुशबू लगाये, ईदगाह को तक्बीरे तशरीक बाआवाजें बुलंद कहता हुआ एक रास्ते से जायें और दूसरे रास्ते से वापस आयें।