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पैगंबर-ए-आज़म के पैगाम-ए-अमन व मोहब्बत को घर-घर पहुंचाएं : प्रो. अफरोज कादरी

तुर्कमानपुर में इस्लाह-ए-मिल्लत कांफ्रेस

गोरखपुर। डलास यूनिवर्सिटी केपटाउन, साउथ अफ्रीका के प्रोफेसर मोहम्मद अफरोज कादरी ने कहा कि पैगंबर-ए-आज़म हजरत मोहम्मद साहब (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) ने पूरी दुनिया को ईमान के साथ दीन-ए-इस्लाम के मुताबिक नेक अमल करने की तालीम दी। हम अपनी जिंदगी को नेक कामों से संवारें और बुराइयों से बचें। पैगंबर-ए-आज़म और आपके सहाबा की पैरवी हमारी पहली जिम्मेदारी है, इसलिए पैगंबर-ए-आज़म की शिक्षाओं पर हम सब अमल करें। रहती दुनिया तक खुलफा-ए-राशिदीन (हजरत अबूबक्र, हजरत उमर, हजरत उस्मान, हजरत अली) की सेवाओं को दुनिया भुला नहीं सकती।

यह बातें प्रो. अफरोज ने शनिवार को तुर्कमानपुर स्थित सुल्तान खां मस्जिद के सामने गुलामे गरीब नवाज़ कमेटी की ओर से आयोजित ‘इस्लाह-ए-मिल्लत’ कांफ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि कही।

उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-आज़म ने अपने जीवन में ही अपने सच्चे और अच्छे सहाबा की वह पाक जमात तैयार की जिसके हर व्यक्ति ने पैगंबर-ए-आज़म का हर पैगाम पूरी दुनिया में पहुंचाया। दुनिया आज जिस दौर से गुजर रही है, इन हालातों में हर कलमा पढ़ने वाले की यह जिम्मेदारी है कि वह पैगंबर-ए-आज़म के पैगाम-ए-अमन व मोहब्बत को घर-घर पहुंचाए। आला हजरत की नात “सबसे औला व आला हमारा नबी, सबसे बाला व वाला हमारा नबी’ ‘मुल्के कौनैन में अम्बिया ताजदार, ताजदारों का आका हमारा नबी’ पर अपनी बात खत्म की।

तंजीम कारवाने अहले सुन्नत के सदर मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने कहा कि नमाज, रोजा, जकात, हज दीन-ए-इस्लाम के स्तंभ हैं इनकी हिफाजत कीजिए। हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा कीजिए। उन्होंने आवाम से कहा कि  इल्म हासिल करने पर जोर दीजिए। बच्चों को दीनी शिक्षा हर हाल में दिए जाने की व्यवस्था कीजिए। दुनियावी तालीम पर भी फोकस कीजिए। बेटी को बचाइए भी और पढ़ाइए भी। हर हाल में औरतों का सम्मान कीजिए। स्वच्छता को अपनाइए। पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को अमल में लाइए, जमीन को हरा-भरा और पानी की बचत कीजिए।

उन्हाेंने बच्चों के चरित्र निर्माण के लिए शहर के हर मोहल्ले में मकतब इस्लामियात खोलने पर जोर दिया साथ ही शादियों में होने वाली खुराफातों-फिजूल खर्ची, दहेज मांगने के रिवाज, बैंड-बाजा, खड़े होकर खाने-पीने पर पाबंदी लगाने की अपील भी की। शहर में ऐसी तंजीम की जरूरत भी बताई जो गरीबों के शादी-ब्याह, रोजगार, इलाज व सरकारी योजनाओं में लोगों की निस्वार्थ भाव से मदद कर सके।

नात शरीफ कारी अरशद रज़ा व मो. अफरोज ने पेश की। आखिर में सलातो-सलाम पढ़कर मुल्क में अमन व सलामती के लिए दुआ की गयी। लंगर-ए-नवाज बांटा गया। संचालन हाफिज रहमत अली निजामी ने किया।

इस मौके पर मास्टर मो. कलीम अशरफ खान, हाजी भोनू मुस्तफा, मौलाना असलम रज़वी, मनौव्वर अहमद, हाजी अब्दुल्लाह, मो. अतहर, एड. तौहीद अहमद, इजहार उर्फ मुन्ना, गुड्डू, शमशाद, उमर कादरी, एड. शोएब अंसारी, अनवर आलम, मो. शहबाज खान, सैयद सदफ, तबरेज खान, दानिश मुस्तफा, मो. अकरम, मो. इस्लाम, मो. फारूक, नईम अहमद, तस्लीम अहमद, जाबिर अली, रमजान अली, रईस अनवर, कारी मेराजुद्दीन, नेमतुल्लाह चिश्ती, कारी मोहसिन, हाफिज कलाम सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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