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किसान को कर्ज नहीं, इनकम चाहिए: देवेन्द्र शर्मा

नागेन्द्र नाथ सिंह स्मृति व्याख्यान व सम्मान समारोह में प्रख्यात कृषि विशेषज्ञ एवं अर्थशास्त्री देवेन्द्र शर्मा का व्याख्यान

विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 10 विभूतियों को सम्मानित भी किया गया

गोरखपुर। प्रख्यात कृषि विशेषज्ञ एवं अर्थशास्त्री देवेन्द्र शर्मा ने कहा है कि किसान को कर्ज नहीं इनकम चाहिए। पिछले डेढ दशक में अमीरों को टैक्स में जितनी छूट दी गई है, कर्जे माफ किए गए है और बेल आउट पैकेज दिया गया है उतने पैसे यदि खेती से जुड़ी 50 फीसदी आबादी को दी गई होती तो देश में गरीबी इतिहास बन गई होती। जिम्मेदार है। यह इकनामिक डिजाइन साधन सम्पन्न लोगों की मदद करने वाला है। इस डिजाइन ने अमीर को और अमीर और शेष देश को गरीब बनाया है। हमे स्थिति बदलनी है तो कार्पोरेट की मदद करने वाले ‘ इकनामिक डिजाइन ’ से देश की तरक्की नहीं हो सकती। देश के सभी हिस्सों में खुशाहली के लिए नीति निर्धारण का केन्द्र खेती करनी होगी। हमें आज के विकास की अवधारणा और माडल को बदलना होगा और उसे देश के किसानों, मजदूरों और दूसरे वंचित तबको की मदद करने वाला बनाना होगा।

श्री शर्मा आज गोरखपुर क्लब परिसर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्व एमएलसी नागेन्द्र नाथ सिंह की स्मृति में आयोजित व्याख्यान व सम्मान समारोह में व्याख्यान दे रहे थे। व्याख्यान का विषय था-खेती से ही आ सकता है भारतीय अर्थव्यवस्था में बदलाव। ’ कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 10 विभूतियों को सम्मानित भी किया गया।

श्री देवेन्द्र शर्मा ने अपने व्याख्यान में कहा कि इकनामिक सर्वे 2016 के अनुसार देश के आधे हिस्से के किसानों की औसत आय सलाना 20 हजार रूपए है। यदि हम उनकी आय दोगुनी भी कर दें उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला है क्योंकि तब यह हर महीने करीब तीन हजार रूपए ही होगी। दरअसल अब तक की नीति किसानों को गरीब बनाए रखने की नीति है। वर्ष 1970 में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 76 रूपए और धान का 51 रूपया क्विंटल था। उसके बाद के 45 वर्षों बाद वर्ष 2015 में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 19 गुना बढ़कर 1450 रूपए और धान का 760 रूपए क्विंटल हुआ। इसके मुकाबले 1970 में स्कूल टीचर की सेलरी 90 रूपए महीने थी जो इन्हीं 45 वर्षों में 320 गुना बढ़ गई। राजकीय कर्मचारियों की इन 45 वर्षों में सेलरी 120 से 135 गुना और प्रोफेसर की 150 से 170 गुना बढ़ गई। उत्तर प्रदेश के कंस्टेबलरी को 21 हजार और सेना के अफसरों को 20 हजार रूपए वाशिंग एलाउंस मिलता हैं। एक किसान की आय इस एलाउस से भी कम है। कर्मचारियों को कुल 108 प्रकार के एलाउंसेज मिलते है। राजकीय कर्मचारियो की तरह यदि किसानों की आय बढ़ी होती तो उसे 2015 में गेहूं का दाम 5000 रूपया क्विंटल मिलता।

समारोह के आयोजक राजेश सिंह

उन्होंने कहा कि किसानों को उनके हक से वंचित किया गया है और उल्टे हम उन पर आरोप लगाते हैं कि वे घाटे की खेती क्यों करते हैं। खेती घाटे की इसलिए है क्योंकि किसानों का हक मारा गया है और उनके साथ अन्याय किया गया है।
श्री शर्मा ने कहा कि आज कहा जा रहा है कि देश के वेल्थ क्रियेटर कार्पोरेट हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए जबकि सही मायनों में किसान देश का वेल्थ क्रियेटर है लेकिन उसकी घोर उपेक्षा की जा रही है। आज की राजनीति किसानों के लिए एक अच्छा शब्द तक नहीं दे पा रही है।

श्री शर्मा ने कहा कि देश की प्रगति जीडीपी से नहीं समृद्धि और खुशहाली से मापी जानी चाहिए। आज यह तर्क दिया जा रहा है कि किसानी की आय इसलिए कम है क्योंकि उत्पादकता कम है। उत्पादकता बढ़ाने के लिए सिंचाई का दायरा बढ़ाने की जरूरत है लेकिन देश के सबसे अधिक सिंचित और पैदावार वाले पंजाब राज्य में आज क्या हो रहा है ? पंजाब में 98 फीसदी कृषि भूमि सिंचित है जो अमेरिका से भी अधिक है। पंजाब में पैदावार भी ज्यादा है। वहां खेती सबसे अधिक मशीनीकृत है और कीटनाशकों का भी सर्वाधिक प्रयोग होता है लेकिन आज पंजाब में किसानों की आत्महत्या की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले दस वर्ष में पंजाब में 10 हजार किसानों ने आत्महत्या की है।

प्रो. बलराम सिंह

पंजाब के एक किसान ने अपने पांच वर्ष के बेटे के साथ नहर में कूद कर आत्महत्या कर ली क्योंकि वह दस लाख के कर्ज में डूबा था। उसने मरने से पहले कहा कि वह जानता है कि उसका पांच वर्ष का बेटा पूरी जिंदगी कर्ज में डूबा रहेगा, इसलिए वह उसके साथ मर रहा है। पंजाब में किसान इसलिए आत्महत्या कर रहे हैं क्योंकि उनकी अपनी उपज का आय नहीं मिल रही है। इसलिए मूल सवाल है कि किसान की आय कैसे बढ़े।

श्री शर्मा ने कहा कि अमेरिका में भी किसान संकट पैदा हो रहा है जहां किसानों का सरकार 60 हजार डालर सब्सीडी देती है। अभी हाल में अमेरिका के एक डेयरी किसान ने आत्महत्या की । आत्महत्या के पहले उसने अपनी सभी गायों को गोली चलाकर मार दिया। उसका कहना था कि पूरी जिंदगी कर्ज में डूबे रहना भी कोई जिंदगी है।

उन्होंने कहा कि किसान को कर्ज नहीं चाहिए उसे इनकम चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के बड़े-बड़े आर्थिक विशेषज्ञ यही सुझाते रहे हैं कि लोगों को खेती से निकालकर शहर में लाना चाहिए क्योंकि शहरों को दिहाड़ी मजदूर की जरूरत है। अब तक विकास के इसी माडल को खड़ा किया जाता रहा है जो फेल हो चुका है। आज देश आजादी के बाद सबसे बड़े बेरोजगारी संकट से दोचार है क्योंकि खेती से निकालकर आप सभी को रोजगार नहीं दे सकते।

किसानों को मदद करने में पैसे की कमी के तर्क को फिजूल बताते हुए श्री शर्मा ने कहा कि देश में पैसे की कमी नहीं है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष का बयान आया है कि जीडीपी का पांच फीसदी टैक्स मेे छूट के रूप में खर्च किसा जा रहा है। वर्ष 2004-05 से अब तक 50 लाख करोड़ रूपए टैक्स में छूट दिए गए हैं। वर्ष 2007 से 2019 के बीच कार्पोरेट का 8.5 लाख करोड़ का कर्ज माफ किया गया है। वर्ष 2009 की मंदी के बाद हर वर्ष 1.89 लाख करोड़ का बेल आउट पैकेज दिया जा रहा है। इन दस वर्षों में 18 लाख करोड़ का बेल आउट पैकेज दिया जा चुका है।

ले. जनरल रविन्द्र प्रताप शाही

यदि यही पैसा गरीबों, किसानों की मदद में लगाया गया होता तो देश में गरीबी इतिहास की वस्तु बन गई होती। पचास हजार करोड़ की मदद से एक साल की गरीबी मिटती है। एक लाख करोड़ की मदद से दो साल की गरीबी मिटती है। अब तक अमीरों को टैक्स में जितना छूट दिया गया है उससे 100 साल तक की गरीबी खत्म की जा सकती थी।

उन्होंने कहा कि दो दिन पहले वित्तमंत्री ने कार्पोरेट को जो रियायतों की घोषणा की है वह पांच लाख करोड़ की है। देश में मंदी इसलिए है कि घरेलू मांग नहीं बढ़ रही है। लोगों के पास जरूरी वस्तुएं खरीदने के लिए पैसा नहीं है लेकिन पैसा उन्हें दिया जा रहा है जिन्होंने यह समस्या पैदा की है। यही पांच लाख करोड़ की मदद खेती से जुड़ी 50 फीसदी आबादी को दे दिया जाता तो सूरत दूसरी होती। आज यदि किसानों की आय एक चपरासी की बेसिक सेलरी के बराबर कर दिया जाए तो विकास दर सही हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों से सिर्फ तीन फीसदी लोगों का फायदा हुआ। आज सिर्फ एक फीसदी अमीर लोगों की वेल्थ में हर दिन 2200 करोड़ का इजाफा हो रहा लेकिन वही लोग आज सरकार के पास कटोरा लेकर खड़े हैं। एक किसान पत्नी का जेवर बेच कर बीज खरीद रहा है और जो लोग पैसे पर बैठे हैं वे सरकार से और पैसा मांग रहे हैं।

प्रो एसपी सिंह

उन्होंने कहा कि आज पर्यावरण का संकट बढ़ रहा है। समुद्र का तल बढ़ रहा है। रेगिस्तान बढ़ रहा है। सूखे का संकट आ रहा है। तापमान बढ़ रहा है तब सबको लग रहा है कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। इस स्थिति के लिए भगवान या जलवायु दोषी नहीं बल्कि हमारा ‘ इकनामिक डिजाइन ’ जिम्मेदार है। यह इकनामिक डिजाइन साधन सम्पन्न लोगों की मदद करने वाला है। इस डिजाइन ने अमीर को और अमीर और शेष देश को गरीब बनाया है। हमे स्थिति बदलनी है तो कार्पोरेट से फोकस बदल कर खेती पर करना होगा। उन्होंने लोगों से इसके पक्ष में आवाज उठाने की अपील की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्राधिकरण के उपाघ्यक्ष ले. जनरल रविन्द्र प्रताप शाही ने कहा कि देश में स्थितियां बदल रही हैं और उम्मीद है कि देश के किसानों की स्थिति में भी बदलाव आएगा। सरकार किसानों के हित में कदम उठा रही है। विशिष्ट अतिथि लखनउ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एसपी सिंह ने कहा कि कृषि प्राथमिक क्षेत्र है और इस पर सबसे ज्यादा ध्यान देना ही होगा। देश की 63 फीसदी आबादी आज भी कृषि पर ही निर्भर है। उन्होंने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में आने वाली कठिनाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि सबको भोजन उपलब्ध कराने के लिए कृषि उपज का मूल्य नियंत्रित करना मजबूरी है। उन्होंने बदलाव के लिए ढांचागत परिवर्तन पर जोर दिया।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नागेन्द्र नाथ सिंह

समारोह की अध्यक्षता कर रहे इंस्टीट्यूट आफ एडवांस साईेसेज, यूनिवर्सिटी आफ मैसाचुसेट के प्रेसीडेंट प्रो बलराम सिंह ने महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज्य की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि गांव और किसान पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने विश्व में बायोटेक्नोलाजी में हो रहे महत्वपूर्ण शोध का उल्लेख करते हुए कहा कि ये शोध पूरी दुनिया में बड़े बदलाव लाने वाले हैं।

समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 10 विभूतियों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में चिकित्सा व समाजसेवा के लिए वरिष्ठ चिकित्सक डा. अजीज अहमद व तलत अजीज, पत्रकारिता क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार संजय सिंह, कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले रामचेत चौधरी, राजनीतिक क्षेत्र में सुरेश राय, साहित्यकार डा. वेद प्रकाश पांडेय, ग्र्रामीण क्षेत्र में पुस्तकालय व स्त्री सशक्तीकरण के लिए हिना देसाई, खेल में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित प्रेम माया, पर्यावरण क्षेत्र में भुवनेश्वर पांडेय व न्यायिक क्षेत्र में कार्य करने के लिए राजेश मोहन सरकार को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन डा. मुमताज खान ने किया। स्वागत वक्तव्य नागेन्द्र नाथ सिंह स्मृति न्यास के अध्यक्ष राजेश सिंह ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन आयोजन के संयोजक ईजीनियर शम्स अनवर ने किया।

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