स्वास्थ्य

देवरिया के 106 बच्चों में फाइलेरिया के लक्षण मिले

मरीजों की जांच करते स्वास्थ्यकर्मी

रक्त पट्टिका की होगी अब मैनुअल जांच, पाजिटिव मिलने पर
शुरू होगा इलाज
 प्री-ट्रांसमिशन एसेसमेण्ट सर्वे में मिले फाइलेरिया से ग्रसित बच्चे

देवरिया। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले में प्री टास
(ट्रांसमिशन एसेसमेण्ट सर्वे) में  मलेरिया विभाग की टीम को 106 बच्चों
में फाइलेरिया के लक्षण मिले हैं। अब उन बच्चों का नाइट ब्लड सर्वे के
दौरान रक्त पट्टिका मैनुअल जांच की जाएगी और यदि फिर भी ब्लड पाजिटिव आता
है तो उन्हे बीमारी से निजात दिलाने के लिए 12 दिन के कोर्स की दवाएं दी
जाएंगी।
जिले में फाइलेरिया कार्यक्रम के अंतर्गत प्री  ट्रांसमिशन एसेसमेण्ट
सर्वे शुरू किया गया। मलेरिया विभाग की टीम ने एक सप्ताह नगर के गरूलपार
सहित  भागलपुर के सतराव, लार के चुनकी , भाटपाररानी ब्लाक के सराय
प्राथमिक विद्यालों  में शिविर लगाकर 1268 बच्चों में फाइलेरिया की जाँच
की। इसमे 106 बच्चे पॉजिटिव मिले। भागलपुर ब्लाक से 17 ,लार में 31
,भाटपाररानी में 40 और नगरीय क्षेत्र  में 18 फाइलेरिया के लक्षण वाले
बच्चे मिले।  सहायक  मलेरिया अधिकारी सुधाकर मणि ने बताया कि यह बीमारी
मच्छर के काटने से होती है। इसे सामान्यत: हाथी पांव के नाम से भी जाना
जाता है। इसके मच्छर अधिकतर गंदगी में पनपते हैं। संक्रमित व्यक्ति को
काटकर यह मच्छर संक्रमित हो जाते हैं। इसके बाद यही संक्रमित मच्छर
स्वस्थ व्यक्ति को काटकर संक्रमित कर देते हैं। इससे संक्रमित व्यक्तियों
को हाथी पाँव व हाइड्रोसिल का खतरा बढ़ जाता है। सामान्यत: तो इसके कोई
लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं।

12 दिन चलेगी दवा

जिला मलेरिया अधिकारी एसपी त्रिपाठी ने कहा कि उच्चाधिकारियों द्वारा
जिले को फाइलेरिया उन्मूलन हेतु प्री टास सर्वे के लिए चयनित किया गया
है। जिसके लिए जिले के चार स्थानों गरूलपार, भागलपुर ब्लाक के सतराव,
प्राथमिक स्वाथ्य केंद्र लार व भाटपाररानी ब्लाक के सरया गांव में  प्री
टास (ट्रांसमिशन एसेसमेण्ट सर्वे) का  आयोजन किया गया।  सर्वे के दौरान
1268 बच्चों का एफटीएस किट से खून  का सैम्पल लिया गया, जिससे 10 मिनट
में पता चल गया कि बच्चों का सैम्पल निगेटिव है या पाजिटिव। उन्होंने
बताया कि सैम्पल में 106 बच्चे पाजिटिव पाये गए। बच्चों की पुनः नाइट
ब्लड सर्वे के दौरान रक्त पट्टिका मैनुअल जांच की जाएगी और यदि फिर भी
ब्लड पाजिटिव आता है तो उन्हे बीमारी से निजात दिलाने के लिए 12 दिन के
कोर्स की दवाएं दी जाएंगी।

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