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एपी तटबंध पर पांच स्थानों पर कटान, बचाव कार्य के लिए धन का इंतजार

जंगली पट्टी के पास कटान से आक्रोशित ग्रामीण विधायक के साथ धरने पर बैठे, एक्सईएन को भी धरने पर बिठाया

कटान से बचाव की परियोजना को अभी भी शासन से मंजूरी का इंतजार

कुशीनगर। कुशीनगर जिले के तमकुही तहसील क्षेत्र में स्थित एपी तटबंध का बचना इस मानसून में मुश्किल लग रहा है। तटबंध के बचाने के लिए बनाई गई परियोजना को अब तक मंजूरी व धन न देने के कारण तटबंध को मजबूत करने का कोई कार्य नहीं हो रहा है।

 बड़ी गंडक (नारायणी) नदी में 80 हजार क्यूसेक पानी से ही चार से पांच स्थानों पर नदी कटान करते हुए तटबंध की तरफ बढ़ रही है। जंगली पट्टी के पास नदी की कटान को रोकने के लिए बनाया गया स्पिल 150 मीटर तक कट गया है और पानी की धारा तटबंध से सिर्फ 30 मीटर ही दूर रह गई है। यहां पर कटान होता देख ग्रामीण नाराज हो गए और क्षे़त्रीय विधायक अजय कुमार लल्लू की अगुवाई में 24 जुलाई से धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के एक्सीईन भरत राम को भी दो घंटे तक धरने पर बिठाये रखा।

धरना आज दूसरे दिन भी चल रहा है। एपी तटबंध पर इस समय मुख्यतः पांच स्थानों पर कटान हो रही है। तटबंध के 800 मीटर के पास जंगली पट्टी के निकट तटबंध को बचाने के लिए बनाया गया स्पिल कट रहा है। अहिरौलीदान के कचहरी टोला, खरखूूंटा आदि टोलों में बसे लोगों के घर, खेत को काटते हुए नदी तटबंध की तरफ बढ़ रही है। अब तक 200 से अधिक लोगों के घर कट चुके हैं।

बरवा पट्टी के पास रिंग तटबंध लगातार कट रहा है और अब इसका मामूली हिस्सा ही बचा हुआ है। रामपुर बरहन और लक्ष्मीपुर के समीप नदी और तटबंध के बीच सिर्फ दस मीटर की दूरी रह गई है। नोनिया पट्टी और बाघाचौर के पास नदी 300 मीटर क्षेत्र कट रहा है।

धरने पर बैठे क्षेत्रीय विधायक अजय कुमार लल्लू और ग्रामीणों के साथ एसडीएम व एक्सीईएन

कटान की यह हालत तब है जब नदी में सिर्फ 96 हजार क्यूसेक पानी है। जब पहाड़ में और भारतीय सीमा में जोरदार बारिश होती है तो नदी में पानी की मात्रा डेढ़ लास क्यूसेक से बढ़ते-बढते छह लाख तक पहुंच जाती है। ऐसा हुआ तब तटबंध का बच पाना मुश्किल होगा और तमकुहीराज क्षेत्र के सैकड़ों गांव बाढ़ के चपेट में आएंगे और उनका सब कुछ बर्बाद हो जाएगा।

ऐसा नहीं है कि नदी की कटान से सरकार और प्रशासन तथा सम्बन्धित विभागों को जानकारी नहीं है। क्षेत्रीय ग्रामीण इस मुद्दे को लेकर लगातार आंदोलन कर प्रशासन को चेताते रहे हैं कि वह कटान को रोकने का उपाय करे और कटान से विस्थापित हो रहे लोगों को मुआवजा दे व उन्हें पुनर्वासित करे।

क्षेत्रीय विधायक एवं कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री, सिंचाई मंत्री, बाढ़ मंत्री सहित कमिश्नर, डीएम को ज्ञापन दे चुके है और उनसे मिल भी चुके हैं। डीएम और कमिश्नर तो मौके का दौरा भी कर चुके हैं। इसके बावजूद कटान रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किया जा रहा है।

अभी तक मौके पर कुछ बोल्डर ही गिराए गए हैं। अब तो बोल्डर गिराने का काम भी बंद है। सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि तटबंध को नदी के कटान से बचाने के लिए उन्होंने परियोजना बनाकर शासन को भेज दी है। परियोजना के मंजूर होने और धन अवमुक्त होने का इंतजार है।

परियोजना के मंजूर होने में शासन स्तर से हो रही देरी घातक साबित हो रही है। अब और देरी होने पर कटान रोकने के लिए बचाव कार्य कराना भी मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में यदि तटबंध कटता है और सैकड़ों गांव बाढ़ की जद में आते हैं तो उसके लिए सिर्फ और सिर्फ शासन-प्रशासन भी जिम्मेदार होगा जिसने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया।

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