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बच्ची के माता-पिता
बच्ची के माता-पिता

झाड़ियों में घायल मिली बच्ची की 24 घंटे बाद मौत, बिना पोस्टमार्टम हुआ अंतिम संस्कार

रेलवे स्टेशन क्षेत्र में फुटपाथ पर माता-पिता के साथ सो रही बच्ची को उठा ले गया था कोई

सिर, गले और पीठ पर थे गहरे जख्म

इलाज के लिए दो बार जिला अस्पताल और दो बार मेडिकल कालेज ले जाया गया

गोरखपुर। शनिवार की आधी रात कैंट थाना क्षेत्र के रेलवे स्टेशन के पास अधिशासी अभियंता नलकूप खंड के आफिस के पास अपने माता-पिता के साथ सो रही पांच वर्ष की एक बच्ची को कोई उठा ले गया। कुछ देर बाद बच्ची घायल स्थिति में पास की झाड़ियों में मिली। उसे इलाज के लिए दो बार जिला अस्पताल और दो बार मेडिकल कालेज ले जाया गया लेकिन 24 घंटे बाद बीआरडी मेडिकल कालेज में उसकी मौत हो गई। पुलिस की जानकारी में घटना के होते हुए भी बच्ची का अंतिम संस्कार हो गया लेकिन पुलिस ने न तो बच्ची का पोस्टमार्टम कराया और न इस घटना के बारे में कोई एफआईआर दर्ज की जबकि घटना स्थल की परिस्थितियां और बच्ची को लगी चोटें साफ-साफ इशारा कर रही हैं कि बच्ची को बुरी नीयत से उठाया गया था और मकसद में सफल न होने पर उसको घायल कर हमलावर भाग गया।

रेलवे म्यूजियम से सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस की तरफ जाने वाले रास्ते पर ईमली के एक पेड़ के पास बिहार के सीवान जिले के महराजगंज का एक दलित परिवार ढाई-तीन वर्षो से रहता है। इस परिवार में गौरी और उसकी पत्नी गुड़िया के अलावा दो बेटे के अलावा पांच वर्ष की एक बेटी थी।  गौरी और उसकी पत्नी कबाड़ बीनते थे और उसे बेच कर गुजारा करते थे। वह खुले आसमान तले जमीन पर सोते थे।

शनिवार की रात सभी सोए थे। आधी रात गुड़िया की नींद खुली तो उसने पाया कि बेटी साथ में नहीं है। उसने पति गौरी को जगाया और दोनों शोर मचाते हुए बेटी को आस-पास खोजने लगे। कुछ ही देर में गुड़िया ने पास के एक पेड़ के पास झाड़ियों में कुछ हलचल महसूस की। जब वहां पहुंची तो उसने बेटी को घायल स्थिति में पाया।

गुड़िया के अनुसार उसने वहां से एक मानव आकृति को चहारदीवारी फांद कर भागते हुए देखा। बच्ची के सिर, गर्दन और पीठ पर जख्म के निशान थे। गुड़िया ने गोरखपुर न्यूज लाइन को बताया कि लगता था कि किसी ने लम्बे नाखूनों से सिर को फाड़ दिया हो। उसने बताया कि बच्ची के वस्त्र शरीर से जुदा थे।
गौरी ने फौरन इस घटना की जानकारी रेलवे म्यूजियम के पास तैनात पुलिस कर्मियों को दी। पुलिस कर्मियों की मदद से बच्ची को जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां से बच्ची को मेडिकल कालेज ले जाया गया। मेडिकल कालेज में बच्ची के सिर में टांके लगाए गए और इलाज किया गया।

गुड़िया गर्भवती हैं और उसका गर्भ नौ महीने का हो गया था। उसे कभी भी प्रसव पीड़ा हो सकती थी। इस लिए वह और गौरी बेहद परेशान थे। रविवार की सुबह उन्हें लगा कि बच्ची की तबियत ठीक है। इसके बाद वे उसे अपने डेरे पर लेते आए। दोपहर में घटना की जानकारी होने पर कई लोग जुट गए। एक पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता ने बच्ची को फिर से अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसी बीच गुड़िया को प्रसव वेदना शुरू हो गई। इसके बाद दोनों को फिर जिला अस्पताल ले जाया गया। गुड़िया को महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उसने कुछ देर बाद बच्चे को जन्म दिया।

गौरी के अनुसार जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने शाम को बच्ची को इलाज के लिए फिर बीआरडी मेडिकल कालेज भेज दिया। उस समय बच्ची को तेज बुखार हो गया था। मेडिकल कालेज में उसे ड्रिप चढ़ाया गया और कुछ इंजेक्शन लगाए गए। साथ ही चेहरे पर मास्क भी लगाया गया। रात 12 बजे बच्ची की मौत हो गई।

बेटी के शव को लेकर गौरी अपने डेरे पर आ गया। उसके अनुसार बीआरडी मेडिकल कालेज के चिकित्सकों ने शव ले जाने से रोका और कहा कि जरूरी औचारिकताएं पूरी हो जाने के बाद ही वह जा सकेगा लेकिन वह बेटी की मौत से बेहद सदमे में था। उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था। जिला अस्पताल में पुलिस वाले आकर घटना का ब्योरा नोट कर ले गए थे। दोपहर में उसने राजघाट जाकर राप्ती नदी के तट पर बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया।

यह पूछे जाने पर कि उसने पुलिस को एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई उसका जवाब था कि हम गरीब लोग हैं। हमारे सामने तीन बच्चों के लिए दो जून की रोटी का इंतजाम करना है। बेटी तो हम खो चुके हैं। अब किसी और बवाल में नहीं पड़ना चाहते। गुड़िया का कहना है कि उसकी बेटे को उठा कर ले जाने वाला और उसे घायल करने की हरकत किसी ‘ शैतान ’ की ही हो सकती है। उसका यह भी मानना है कि बच्ची का एक जगह ठीक से इलाज हुआ होता तो उसकी जान बच सकती थी। उसे दो बार जिला अस्पताल और दो बार मेडिकल कालेज ले जाया गया जिससे उसकी हालत और बिगड़ गई.

आस-पास के लोगों को शंका है कि बच्ची को बलात्कार की नीयत से उठाया गया था और असफल होने पर उसे जान से मारने की कोशिश की गई।

आश्चर्य यह है कि घटना की जानकारी होने के बावजूद जब बच्ची की मौत हो गई तो कोई पुलिस वाला मौके पर नहीं पहुंचा और न ही उसने बच्ची का पोस्टमार्टम कराने का प्रयास किया। अभी तक इस घटना के बारे में कोई एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई है।

सामाजिक संस्था स्माइल रोटी बैंक के संचालक आजाद पांडेय ने बताया कि संस्था द्वारा संचालित स्कूल में पढ़ने के लिए बच्ची आती थी। वह इस घटना से बेहद दुखी हैं। उन्होंने मंगलवार की शाम चेतना तिराहा स्थित इंदिरा गांधी प्रतिमा के पास मोमबत्तियां जलाकर बच्ची को श्रद्धांजलि दी। इन लोगों का कहना था कि बच्ची के साथ हुए वारदात की पूरी जांच होनी चाहिए और दोषियों को पकड़ा जाना चाहिए। श्रद्धांजलि सभा में आजाद पांडेय, प्रियेश मालवीय, प्रणव, डॉ0 कुसुम प्रिया, संजना, शोभनिका, विनय अभिषेक, प्रदीप यादव, अनिल दुबे व दिव्या आदि उपस्थित थे।

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