साहित्य - संस्कृति

‘तीर जितने तुम्हारी कमानों में हैं, उससे ज्यादा परिंदे उड़ानों में हैं ’

गोरखपुर। सोमवार देर रात हाजी वजीर अहमद वेलफेयर फाउंडेशन की ओर से रायगंज में मुशायरा हुआ। अध्यक्षता डा. कलीम कैसर ने और संचालन फरुख जमाल ने किया।

नाते पाक से मुशायरे का आगाज हुआ। कुवैत से आए शायर डॉ. अफरोज आलम ने शेर पढ़ा

‘तेरे ख्याल की वादी में गुम हुआ जो भी, यह आंखें बहने लगी मनचली नदी की तरह ’

नेपाल से आए शायर साकिब हारुनी ने शेर पढ़ा

‘खामोशियों ने पसारे हैं चार सू दामन, की बोलचाल का सिलसिला शुरू कीजिए’

डॉ. उर्फी फैजाबादी ने पढ़ा

‘तीर जितने तुम्हारी कमानों में हैं, उससे ज्यादा परिंदे उड़ानों में हैं  ’

नौजवान शायर दीदार बस्तवी ने मुशायरे को एक नई दिशा देते हुए आज के हालात पर गहरी चोट की और पूरा हाल तालियों से गूंज उठा उन्होंने शेर कुछ यूं कहां
‘मैं मानता हूं मुझे इंसाफ मिल गया, लेकिन मेरी जवानी अदालत ने छीन ली’

तनवीर जलालपुरी ने पढ़ा

‘मैं फसलों का शायर हूं मेरा बच्चा तूतलाएगा तो भी उर्दू बोलेगा ‘

बाराबंकी से आए शायर खुमार बाराबंकवी ने कुछ यू शमां बांधा-

‘तुम्हारे नाखुदा को जगाना पड़ेगा, सफीना भंवर से बचाना पड़ेगा ‘

असद मेहताब ने तरन्नुम से कुछ गजलें सुनाई उनका यह शेर बहुत पसंद किया गया
‘तमाम रात यही कारोबार करता हूं, मैं एक दिया हूं अंधेरे पे वार करता हूं ‘

 

मिनतुल्लाह मिन्नत ने पढ़ा

‘मेरे सफर का कोई एख्तेताम है कि नहीं, मेरी थकान के मुकद्दर में शाम है कि नहीं
इनके अलावा सोला टांडवी, अहमद फैजी, जुबेर सीतापुरी, अमीर फैसल लखनऊ, सरफराज राही, जलाल सामानी, नुसरत अतीक, चारूसीला सिंह ने भी अपना कलाम सुनाया।

इस मौके पर शोभित अग्रवाल, शमशाद आलम, हाजी अली हुसैन, सगीर अहमद, शब्बीर अहमद, रिजवान अहमद, फैसल खान, मेहताब हुसैन, अली हैदर, दीदार बस्तवी, शाहनवाज आलम, कामिल खां, हाजी कलीम फरजंद सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम में डॉ. रजनीकांत नवाब, मारकंडे मणि त्रिपाठी, सिद्दीक पहलवान, प्रवीण श्रीवास्तव , सैयद आसिम रउफ, सरदार जसपाल सिंह, डॉ. सत्या पांडे, शोएब अहमद, आशीष श्रीवास्तव, खैरुल बशर, इकरार अहमद, अचिंत्या लहरी, डॉ. हर्षवर्धन राय को सम्मानित किया गया.

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