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स्वास्थ्य विभाग ने माना-गोरखपुर में डेंगू के 59 केस

गोरखपुर. स्वास्थ्य विभाग ने गोरखपुर में डेंगू के 59 केस की पुष्टि की है. विभाग के अनुसार अक्तूबर में 39 और नवम्बर महीने में अब तक 9 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है.

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ ए के पाण्डेय ने बताया कि जुलाई से सितम्बर महीने तक डेंगू के सिर्फ 11 मामले पुष्ट हुए थे। अकेले अक्टूबर माह में 39 डेंगू के मरीज सामने आए जबकि नवम्बर महीने में अभी तक 9 मामलों में डेंगू कंफर्म हुआ है

उन्होंने बताया कि सबसे अधिक डेंगू के मामले वर्ष 2016 में सामने आए थे। डीएमओ ने बताया कि उस साल संदिग्ध डेंगू के कुल 1105 केस रिपोर्ट हुए थे जिनमें से 168 में डेंगू पुष्ट हुआ था। इस वर्ष अभी तक 326 संदिग्ध केस रिपोर्ट हुए हैं जिनमें से 59 में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। वर्ष 2017 में डेंगू के 11 मामले जबकि 2018 में 25 मामले पुष्ट हुए थे।

डेंगू में सिर्फ क्रिटिकल केस में ही पड़ती है प्लेटलेट चढ़ाने की आवश्यकता

मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डा. श्रीकांत तिवारी ने कहा है कि डेंगू की बीमारी में सिर्फ क्रिटिकल मामलों में ही प्लेटलेट चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसका सामान्य इलाज होता है। सामान्यतया इलाज में भी पैरासिटामॉल दी जाती है। मरीज की स्थिति के अनुसार ही अन्य दवाइयां देने की आवश्यकता पड़ती हैं। अगर बुखार होने के बाद लोग प्रशिक्षित चिकित्सक के पास जाएं तो समय रहते डेंगू का मरीज स्वस्थ हो जाएगा और प्लेटलेट की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।

उन्होंने बताया कि जिले में डेंगू के 59 मरीजों की पुष्टी के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम 5302 घरों में डेंगू के वाहक मच्छर के लार्वा की जांच कर चुकी है। सबसे अधिक लार्वा इन घरों में रखे कूलर में जमा साफ पानी में मिले हैं।

सीएमओ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि शहरी क्षेत्र में घरों मे रखे फ्रीज की ट्रे, सिमेंट की टंकी, प्लास्टिक के कंटेनर, गमले और कूलर में भी डेंगू के मच्छरों के लार्वा हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि डेंगू की रोकथाम में नगर निगम, पंचायती राज विभाग और स्वास्थ्य विभाग से अधिक महत्वपूर्ण सामान्य जन का प्रयास है। डेंगू का मच्छर गंदगी में नहीं बल्कि साफ और स्थिर पानी में पनपता है। ऐसे में घरों के भीतर प्रत्येक ऐसे स्थान की सफाई कर दें जहां साफ और स्थिर पानी जमा है ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके।

जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) डा. एके पांडेय ने बताया कि जहां कहीं से भी डेंगू मरीज की सूचना मिल रही है, वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंच कर सर्वे कर रही है और निरोधात्मक कार्यवाही की जा रही है। सितम्बर के दूसरे पखवाड़े में हुई बारिश के बाद अक्टूबर माह में साफ और स्थिर पानी में ही डेंगू को पनपने का मौका मिला है।

ये लक्षण दिखे तो हो सकता है डेंगू

· त्वचा पर चकत्ते

· तेज सिर दर्द

· पीठ दर्द

· आंखों में दर्द

· तेज़ बुखार

· मसूड़ों से खून बहना

· नाक से खून बहना

· जोड़ों में दर्द

· उल्टी

· डायरिया

यह भी जानिए

डेंगू मादा एडिज मच्छर के काटने से होता है। इस मच्छर के काटने के 5 से 6 दिन बाद डेंगू के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। डेंगू के सबसे खतरनाक लक्षणों में हड्डियों का दर्द शामिल है। इसी वजह से डेंगू बुखार को ‘हड्डीतोड़ बुखार’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इससे पीड़ितों को इतना अधिक दर्द होता है कि जैसे उनकी हड्डियां टूट गई हो।

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