Templates by BIGtheme NET
e_page_level_ads: true });
Home » समाचार » यहाँ राप्ती ने तोड़ा तटबंध तो फोरलेन व गीडा सहित सैकड़ों गांव होंगे जलमग्न
s3

यहाँ राप्ती ने तोड़ा तटबंध तो फोरलेन व गीडा सहित सैकड़ों गांव होंगे जलमग्न

8.46 करोड़ की परियोजना के लिए तटबंध के नीचे खुदाई करने से खतरे में पड़ा तटबंध

राप्ती नदी के किनारे बने तटबंध से सटे होना है पक्का घाट का निर्माण

गोरखपुर, 8 जुलाई। सहजनवाँ तहसील क्षेत्र के कालेसर बगहा बाबा मोक्ष धाम पर घाट निर्माण, विद्युतीकरण व सौंदर्यीकरण की 8.46 करोड़ की परियोजना पूरी नहीं होने और इस परियोजना के लिए तटबंध के नीचे खुदाई कर देने से तटबंध के काटने का खतरा पैदा हो गया है. यदि तटबंध कटा तो गोरखपुर –लखनऊ फोरलेन, गीडा सहित सैकड़ों गांव जलमग्न हो जायेंगे.

यह परियोजना किसानों को कम मुआवजा देने की वजह से अधर में लटकी हुई है. परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को दी गयी थी. टेंडर के माध्यम से मऊ जिले के एक ठेकेदार को निर्माण की जिम्मेदारी मिली. टेंडर की शर्तों के अनुसार मानसून आने से पूर्व निर्माण कार्य पूरा हो जाना था पर कम मुआवजा देने के कारण किसानों ने अपनी जमीन देने से इंकार कर दिया.

s2

अधिकारी भी इस मामले में उदासीन बने रहे जिससे चलते बीच-बीच में निर्माण कार्य रुकता रहा. अब हालत यह है निर्माण के लिए तटबंध के नीचे खुदाई हो चुकी है. नदी की धारा सीधे तटबंध पर चोट पहुंचायेगी जिससे उस पर दबाव बढ़ गया है. यदि तटबंध कटा तो एनएच 28 फोरलेन, गीडा समेत सैकड़ों गांव जलमग्न हो जायेंगे.

कालेसर- जंगल कौडिया फोरलेन सड़क के लिए मुआवजे की दर एक लाख रुपया डिस्मिल  हैं जबकि सिंचाई विभाग इस परियोजना के लिए किसानों को सिर्फ 18600 रुपया प्रति डिस्मिल मुआवजा दे रहा है. इस भेदभाव के चलते किसान नाराज हो गये और जमीन देने से मना कर दिया.

किसानों ने बताया कि जिस समय हमसे जमीन के लिए सहमति ली गयी थी, उस समय सिंचाई विभाग के जिलेदार व अमीन ने बताया था कि घाट निर्माण के लिए कुल 8 डिस्मिल जमीन ली जायेगी पर रजिस्ट्रेशन के समय 23 डिस्मिल लिये जाने की बात की गई.

s1

इस 23 डिस्मिल जमीन के हिस्सेदार रामसहाय यादव, प्रहलाद यादव, अमरजीत, बुनेला यादव, अलबेला, जोखन, हरि, सुरेश सहित 10 किसान हैं. इन किसानों का कहना है कि कुछ ही दूरी पर फोरलेन के लिये अलग रेट दे रहे हैं और हमारी जमीन कौड़ी के मोल लेना चाहते हैं.

उधर विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि सहमति पत्र लेते समय  80 मीटर लंबाई में जमीन अधिग्रहण के लिए वार्ता हुई थी जिसको लेकर अधिशासी अभियंता रुपेश खरे ने किसानों से कई बार वार्ता की पर किसानों से सहमति नहीं बन पायी. इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में आया है. समस्या का समाधान कराया जायेगा.

राप्ती नदी का जल स्तर दो मीटर चढने के बाद ठेकेदार  ने निर्माण सामग्री समेट ली है. ठेकेदार का कहना है कि अब विवाद सुलझने और बारिश का मौसम खत्म होने के बाद ही काम शुरू हो पायेगा.

e_page_level_ads: true });

About गोरखपुर न्यूज़ लाइन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*