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छाया चित्रों में स्वाधीनता आंदोलन के नायक याद किये गये

प्रदर्शनी का अवलोकन करते डा वेदप्रकाश पांडेय

राजकीय बौद्ध संग्रहालय में स्वतंत्रता आंदोलन पर आधारित प्रदर्शनी

माह के अंत तक आम जन के अवलोकनार्थ खुली रहेगी प्रदर्शनी

गोरखपुर, राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर व संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में स्वतंत्रता आन्दोलन पर आधारित छायाचित्र  प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. प्रदर्शनी का उद्घाटन  शहरनामा गोरखपुर के सम्पादक डा वेदप्रकाश पाण्डेय द्वारा किया गया।
ब्रिटिश साम्राज्यवाद के अधीन वर्षों से परतन्त्रता की जंजीरों में जकड़े भारतीय रणबाकुरों द्वारा स्वाधीनता के लिये 10 मई, 1857 को प्रारम्भ किया गया प्राणान्तक संघर्ष विभिन्न चरणों एवं विचारधाराओं के साथ निरन्तर प्रगति करता हुआ 15 अगस्त, 1947 को अपने लक्ष्य तक पहुंचा. देशभक्तिपूर्ण संघर्ष की इस वीरगाथा को समकालीन अभिलेखों एवं छायाचित्रों के माध्यम से राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है.
प्रदर्शनी में एक तरफ जहां स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े क्रान्तिकारियों-मंगल पाण्डेय, तात्या टोपे, नाना साहब, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, वीर कुंवर सिंह, राना बेनीमाधव सिंह, हाथों में बेड़ियां पहने सरदार भगत सिंह, पं रामप्रसाद बिस्मिल, नेताजी सुभाष चन्द्रबोस के दुर्लभ छायाचित्र दर्शकों को आकृष्ट करते हैं. देशभक्ति गीत ‘‘कदम-कदम बढ़ाये जा.‘‘  के कम्पोजर कैप्टन रामसिंह द्वारा गांधी जी के सामने वायलिन बजाते हुए, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद, बिनोबा भावे के चित्र निश्चित रूप से जनसामान्य के आकर्षण का केन्द्र है.
प्रदर्शनी में क्रान्तिधरा मेरठ, लखनऊ, कानपुर, झांसी में हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम-1857 के दुर्लभ अभिलेखों के छायाचित्र भी लगाये गये हैं। जिसमें 10 मई 1857 को मेरठ में हुई क्रांति, झांसी की रानी की वीरगति एवं रेजीडेन्सी लखनऊ के विध्वंस के पश्चात का दृश्य, कानपुर में क्रान्ति का विस्फोट एवं उससे जुड़ी घटनाओं के भी छायाचित्र प्रदर्शित किये गये हैं. जिसमें औघड़नाथ मन्दिर में फकीर रूपी क्रान्ति के दूत को चर्बीयुक्त कारतूस के विषय में संदेश देते हुए तथा क्रान्ति की योजना बनाते हुए, तीसरी हल्की अश्वारोही रेजीमेन्ट के 85 सिपाहियों द्वारा चर्बीयुक्त कारतूस के प्रयोग करने से इनकार करने पर कोर्ट मार्शल की कार्यवाही, भारतीय सैनिकों के सामूहिक कोर्ट मार्शल के पश्चात सभी सैनिकों को बेड़ियां पहनाकर विक्टोरिया पार्क स्थित नई जेल में कैद, मेरठ सदर बाजार के नागरिकों तथा कैन्टोनमेंट के कर्मचारियों द्वारा अंग्रेजों पर हमला, भारतीय सैनिकों द्वारा विरोध स्वरूप अपनी बैरकों में आग लगाना, परेड ग्राउण्ड से अश्व सेना के हथियार बन्द सिपाहियों द्वारा विक्टोरिया पार्क स्थित नई जेल तोड़कर 85 सैनिकों को मुक्त कराना, कानपुर का सतीचौरा घाट, कर्नल फिनिश की हत्या, चाल्र्स डाउसन का बंग्ला जलाते क्रान्तिकारी, मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर एवं उनकी बेगम जीनत महल के अतिरिक्त स्वतंत्रता संग्राम के मुख्य उद्घोष- ‘‘दिल्ली चलो‘‘ का नारा देते हुए सभी सिपाहियों का दिल्ली कूच करना आदि महत्वपूर्ण घटनाओं को छायाचित्रों के माध्यम से रोचक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों, विद्वतजन एवं जनसामान्य को वीर अमर शहीदों के देशप्रेम, धैर्य और बलिदान की एक झलक दिखाने का प्रयास किया गया है.
प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि डा वेदप्रकाश पाण्डेय ने इस तरह के आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के लिए देशभक्तों के संघर्ष एवं तत्कालीन घटनाओं से सम्बन्धित छायाचित्र निश्चय ही हमारी राष्ट्रवादी भावनाओं को जगाने में सहायक सिद्ध होगी.
संग्रहालय के उप निदेशक डा मनोज कुमार गौतम ने कहा कि अभिलेख राष्ट्र की एक महत्वपूर्ण धरोहर है. इनकी सम्यक सुरक्षा एवं भावी पीढ़ी के उपयोगार्थ इनको संरक्षित रखना तथा जनसामान्य विशेष कर विद्यार्थियों में अभिलेखीय धरोहर के प्रति अभिरूचि उत्पन्न करना हमारा कर्तव्य है. कार्यक्रम के अन्त में संग्रहालय के उप निदेशक ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया.

प्रदर्शनी दिनांक 31 अगस्त, 2019 तक कार्यालय दिवस में प्रातः 10.30 बजे से सायं 4.30 बजे तक जनसामान्य के अवलोकनार्थ खुली रहेगी. प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर सर्वश्री डा जितेन्द्र कुमार, शिवदत्त पाण्डेय, जयनारायण चैबे, अशोक कुमार चतुर्वेदी, दीपक राव, राजकुमार यादव, अनुभव डैनियल, शिवानन्द यादव, आशुतोष सिंह, आयुष मल्ल, सुरेन्द्र सिंह, शिवम यादव, प्रदीप कुमार गौतम, शिवरतन पाण्डेय, विनोद कुमार, सुरेन्द्र तिवारी, मोहन कुमार, विजय बहादुर, सूरज पटेल, मनोज कुमार शुक्ला, ऋषिप्रताप सिंह, विनयशील, कपिल, मीरा शुक्ला, सोनी सिंह, प्रेमलता पाण्डेय, गीता पाण्डेय, विद्यावती, सुमन सिंह, इन्दुलता द्विवेदी, नीलम तिवारी, रीता, रानी सिंह, ममता मिश्रा, द्रोपती मिश्रा, गुलाबी तथा दुर्गा देवी आदि सहित तमाम गणमान्य लोगों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही.

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