राज्य साहित्य - संस्कृति

‘ ईमानदार बुद्धिधर्मी रचनाकार हैं डॉ पी एन सिंह ’

[highlight]गाजीपुर में डॉ० पी० एन० सिंह का अभिनन्दन समारोह और उन पर केन्द्रित पुस्तक  ‘ एक जन बुद्धिधर्मी की विचार-यात्रा ’ का लोकार्पण [/highlight]

गाजीपुर, 1 जुलाई। ‘ समकालीन सोच ’ परिवार के तत्वावधान में जनपद के बुद्धिजीवियों की ओर से समाजवादी चिंतक एवं समालोचक डॉ० पी० एन० सिंह के 77-वें जन्म दिन के अवसर पर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित प्रोफेसर सदानंद शाही द्वारा संपादित ‘ एक जन बुद्धिधर्मी की विचार-यात्रा ’ नामक कृति का लोकार्पण एवं डॉ० सिंह के अभिनंदन समारोह का आयोजन आदर्श इंटर कॉलेज महुआबाग के सभागार में किया गया।
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समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए दिल्ली से आए प्रो० गोपेश्वर सिंह ने कहा कि मैं पहले कुबेर नाथ राय और विवेक राय के नाम से गाजीपुर को जानता था किन्तु अब डॉक्टर पी०एन० सिंह के नाम से गाजीपुर को जानता हूं। इनके लेखन में अद्भुत पैनापन है। इसीलिए इन्हें जनपद का असीम प्यार मिला है और इन्होंने जनपद के बुद्धिजीवीयों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये स्वयं अपनी विचारधारा गढ़ते हैं। किसी के विचारधारा के चौखट में अपने को ढालने का प्रयास नहीं करते।

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मुख्य वक्ता के रूप में जयपुर से आए प्रो० रवि श्रीवास्तव ने कहा कि डॉ०पी०एन० सिंह हर तरह की कट्टरता के विरोधी हैं वह चाहे मार्क्सवादी कट्टरता ही क्यों न हो। आम जन के संघर्ष की मीमांसा करने वाले ’ के रूप में ही इनकी वास्यविक पहचान है। पी०एन० सिंह ही है जो साहस के साथ कह सकते हैं कि हमारी राष्ट्रीय राजनीति सांप्रदायिक हो गई है और सामाजिक सोच जातिवादी।
प्रो० अवधेश प्रधान ने कहा कि जिन्दा कौमें  ही अपनी परंपराओं को याद रखती हैं। डॉ०सिंह इसके प्रतीक हैं। इन्होंने संवाद की संस्कृति पैदा की है और गाजीपुर में रहकर देश विदेश के विद्वानों से संवाद बनाए रखते हैं।

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प्रो० राम सुधार सिंह ने कहा कि पी०एन०सिंह एक सुलझे हुए विचारक हैं जो बेबाक टिप्पणी करने के लिए जाने जाते हैं।
प्रो० सदानंद शाही ने आधार वक्तव्य देते हुए कहा कि पी०एन०सिंह बुद्धिजीवी कम, बुद्धिधर्मी अधिक हैं इसलिए कि ये अपने लिए कम समाज के लिए अधिक जीते आये हैैं।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में वाराणसी से आए प्रो० आर० के० शुक्ल ने कहा कि डॉ०पी०एन० सिंह एक ऐसे आलोचक हैं जो कसौटी पर कसते समय किसी के साथ कोई मुरौवत नहीं करते हैं चाहे अपना कोई  शुभचिंतक ही क्यों न हो। इनकी यही दृष्टि इनके समालोचना के स्तर को ऊंचा उठाती है।

समारोह संयोजक रामावतार ने आयोजन के उद्देश्य पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। स्वागत भाषण डॉ० अनिल कुमार सिंह एवं संचालन हरिनारायण हरीश ने किया। आभार ज्ञापन कन्हई राम प्रजापति ने किया।

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समारोह में पूर्व अपर डिप्टी कमिश्नर ओम धीरज, दीनानाथ शास्त्री, प्रो० महेंद्र प्रताप सिंह आदि प्रमुख थे। आयोजन को सफल बनाने में कमला शंकर यादव, डॉ० गजाधर शर्मा ‘गंगेश’, डॉ०अशोक कुमार सिंह, डॉ० बद्री सिंह, डॉ० समर बहादुर सिंह, डॉ० संतोष कुमार तिवारी, माधव कृष्ण, राम नगीना कुशवाहा, इरफान अली एवं अमितेश सिंह प्रमुख थे।

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