लोकसभा चुनाव 2019

गोरखपुर शहर में अधिक मतदान होने से भाजपा को कितना फायदा होगा ?

गोरखपुर। लोकसभा चुनाव में गोरखपुर सीट पर मतदान प्रतिशत बढ़ने से भाजपा उत्साहित है। गोरखपुर शहर में भी मतदान प्रतिशत 2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले बढ़ा है। इसी आधार पर भाजपा को लग रहा है कि गोरखपुर शहर में बढ़ा मतदान प्रतिशत उसे निर्णायक लीड दे देगा जिसे गठबंधन उम्मीदवार अन्य विधान सभा क्षेत्रों में बढ़त पाने के बावजूद कम नहीं कर पाएंगे.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकसभा चुनाव में कई सभाओं में कहा था कि यदि गोरखपुर शहर में 70 फीसदी मतदान हुआ तो भाजपा प्रत्याशी को दो लाख से अधिक की बढ़त मिल जाएगी। इसी तरह गोरखपुर नगर के विधायक डा. राधा मोहन दास अग्रवाल ने एक सभा में कहा कि जीत के लिए भाजपा प्रत्याशी को साढ़े पांच लाख वोट दिलाना जरूरी है।

अब जबकि मतदान सम्पन्न हो गया है और 24 घंटे बाद परिणाम आने वाले हैं तो इन दो कसौटियों पर यदि भाजपा की संभावनाओं को परखा जाए तो दिलचस्प नतीजे निकलते हैं।

 

  2019 loksabha
2018 loksabha Byelection
2014 Loksabha Election
Gorakhpur Urban 55-00 % 37-36 % 48-80 %
Gorakhpur Rural 56-30% 47-74 % 53-98 %
Pipraich 59-30 % 52-24 % 59-26 %
Sahajanwa 62-63 % 50-07 % 54-75 %
Caimpiyarganj 59-30 % 49-43 % 54-67 %
Total 58-02 % 47-45 % 54-67 %

गोरखपुर में आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 58.02 फीसदी मतदान हुआ है। विधानसभा वार मतदान प्रतिशत देखें तो गोरखपुर शहर में 55.00, गोरखपुर ग्रामीण में 56.30 , कैम्पियरगंज में 59.30, पिपराईच में 58.00 और सहजनवा में 62.63 फीसदी मतदान हुआ है। ये आंकडे़ चुनाव आयोग के एप के हैं।

2018 के उपचुनाव के मुकाबले इस बार गोरखपुर सीट पर 16.57 फीसदी और 2014 के मुकाबले 3.35 फीसदी अधिक मतदान हुआ है। विधानसभा वार देखे तो सभी क्षेत्रों में 2014 के मुकाबले गोरखपुर शहर में 6.2, गोरखपुर ग्रामीण में 2.32, पिपराइच में 0.04, सहजनवा में 7.88 और कैम्पियरगंज में 4.63 फीसदी अधिक मतदान हुआ है।

लोकसभा उपचुनाव के मुकाबले गोरखपुर शहर में 17.64, ग्रामीण में 8.56, पिपराइच में 7.06, सहजनवा में 12.56 और कैम्पियरगंज में 9.87 फीसदी अधिक मतदान हुआ है।

इस तरह इस बार गोरखपुर शहर में लोकसभा उपचुनाव के मुकाबले 17.64 फीसदी और 2014 के मुकाबले 6.2 फीसदी अधिक मतदान हुआ है। गोरखपुर शहर भाजपा का सबसे मजबूत किला है। यहां से हर चुनाव में भाजपा को बढ़त मिलती रही है। यहां तक लोकसभा उपचुनाव जिसमें भाजपा की हार हुई थी, उसमें भी शहर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को 24,777 वोट से बढ़त मिली थी। इस सीट पर 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी योगी आदित्यनाथ को एक लाख से अधिक वोटों से लीड मिली थी।

इस हिसाब से देखें तो गोरखपुर शहर विधानसभा में बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत भाजपा को काफी अधिक मतों से बढ़त दे सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कथनानुसार जोड़-घटाव करें तो शहर में 70 फीसदी मतदान होने पर दो लाख की लीड मिल सकती है। अब 70 फीसदी मतदान तो नहीं हुआ लेकिन 55 फीसदी मतदान अवश्य हुआ है। योगी आदित्यनाथ ही कहते हैं कि शहर में एक फीसदी अधिक मतदान होने से भाजपा को 10 हजार वोट की बढ़त मिलती है। इस तरह 70 फीसदी के बजाय 55 फीसदी मतदान होने से दो लाख की बढ़त के बजाय गोरखपुर शहर से भाजपा को 50 हजार वोटों से अधिक की बढ़त मिल सकती है। भाजपा के एक नेता का अनुमान है कि गोरखपुर शहर से 65 हजार तक की लीड मिल सकती है।

लोकसभा उपचुनाव में भाजपा शहर विधानसभा के अलावा तीन विधानसभा क्षेत्रों में सपा प्रत्याशी से हार गई थी जबकि पिपराइच से उसे सिर्फ 243 वोटों की बढ़त मिली थी। लोकसभा उपचुनाव में भाजपा सहजनवां में 16.370, गोरखपुर ग्रामीण में 16,281 और कैम्पियरंगज में 14,133 मत से सपा से पीछे हो गई थी।
इस चुनाव में कमोवेश लोकसभा उपचुनाव जैसे ही समीकरण थे। निषाद पार्टी जरूर भाजपा के साथ थी लेकिन जैसी रिपोर्ट मिल रही है उसके अनुसार वह समाजवादी पार्टी के पक्ष में निषाद वोटों को एकतरफा जाने से रोकने में कामयाब नहीं हो पाई।

यदि उपचुनाव जैसे ही समीकरण रहते हैं तो इस चुनाव में कांटे का मुकाबला होने का आसार है। भाजपा के लिए सारा दारोमदार शहर विधानसभा क्षेत्र पर है। यहां की लीड ही उसकी हार-जीत में निर्णायक भूमिका अदा करेगी।

इस चुनाव में शहर विधानसभा क्षेत्र के अलावा सहजनवां, कैम्पियरगंज और गोरखपुर ग्रामीण में भी मतदान प्रतिशत बढ़ा है जहां सपा लोकसभा चुनाव में भाजपा से बीस पड़ी थी। पिपराइच में मुकाबला बराबर का रहा था।

इस हिसाब से देखें तो यदि भाजपा गोरखपुर शहर के अलावा किसी अन्य विधानसभा में गठबंधन प्रत्याशी पर बढ़त बनाने में कामयाब नहीं होगी तो उसके लिए इस चुनाव में सफलता पाना एक बार फिर कठिन चुनौती होगी। यदि वह पिपराइच या कैम्पियरगंज में से किसी भी विधानसभा में अपना वोट गठबंधन प्रत्याशी के मुकाबले बढ़ा ले जाती है तो उसकी राह आसान हो सकती है।

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