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विन्ध्यवासिनी पार्क का नाम बदले जाने का निर्णय एक सप्ताह में वापस नहीं हुआ तो आन्दोलन

विन्ध्यवासिनी पार्क

बैठक और पत्रकार वार्ता में लोग बोले-विन्ध्यवासिनी पार्क का नाम बदला जाना स्वाधीनता आंदोलन, गोरखपुर के इतिहास, विरासत व पहचान के साथ भद्दा मजाक

गोरखपुर. मोहद्दीपुर स्थित विन्ध्यवासिनी पार्क का नाम बदले जाने पर 23 नवम्बर को कायस्थ समाज के साथ-साथ कई संगठनों ने चित्रगुप्त मंदिर में बैठक कर आक्रोश व्यक्त किया और जिला प्रशासन को एक सप्ताह में अपना निर्णय वापस लेने की चेतवानी दी.

बैठक में कहा गया कि विन्ध्यवासिनी पार्क का नाम बल्ले जाने से गोरखपुर के नागरिक अत्यन्त क्षुब्ध, मर्माहत व आक्रोशित हैं। इस पार्क का नाम प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और नगर पालिका गोरखपुर अब नगर निगम के तीसरे अध्यक्ष रहे बाबू विन्ध्यवासिनी प्रसाद वर्मा के नाम से था। मनमाने तरीके से पार्क का नाम बदला जाना गोरखपुर के गौरवमयी इतिहास, विरासत और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अपमान है। पार्क का नाम बदले जाने के पक्ष में जिलाधिकारी व कुछ अन्य अधिकारियों द्वारा दिया गया बयान पर भी नाराजगी व्यक्त की गई.

बैठक और पत्रकार वार्ता में चित्रगुप्त महासभा के अध्यक्ष अनूप श्रीवास्तव, गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र नायक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू विन्ध्यवासिनी प्रसाद वर्मा के पुत्र प्रदीप रंजन वर्मा, अमित विक्रम वर्मा ने कहा कि हम सभी लोगों को समाचार पत्र से ज्ञात हुआ कि विन्ध्यवासिनी पार्क का नाम बदलकर हनुमान प्रसाद पोद्दार पार्क का दिया गया है। यह निर्णय गुपचुप और मनमाने तरीके से लिया गया और यह करते हुए गोरखपुर के नागरिक समाज से कोई विमर्श नहीं किया गया। एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जिन्होंने अपना पूरा जीवन आजादी की लड़ाई में न्यौछावर कर दिया, उनके नाम वाले पार्क का इस तरह नाम बदला जाना बेहद व्यथित करने वाला है। गोरखपुर जिला प्रशासन का यह निर्णय गोरखपुर के इतिहास, विरासत और पहचान के साथ भद्दा मजाक है।

पत्रकार वार्ता में कहा गया कि हमें इस बात पर कोई ऐतराज नहीं है कि हनुमान प्रसाद पोद्दार जी के नाम से किसी पार्क व अन्य स्थान का नामकरण है। गोरखपुर के लोगों के लिए हनुमान प्रसाद पोद्दार जी बेहद सम्मानित, अनुकरणीय व्यक्तित्व हैं लेकिन एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम से पहले से नामांकित पार्क का नाम बदल कर एक दूसरे सम्मानीय, अनुकरणीय व्यक्तित्व के नाम से नामकरण करना ओछी दृष्टि, सोच और समाज में विघटन की राजनीति का परिचायक है. अच्छा होता कि हनुमान प्रसाद पोद्दार जी के नाम से किसी अन्य पार्क का या किसी नए पार्क का निर्माण कराकर उनके नाम का नामकरण किया जाता और विन्ध्यवासिनी पार्क में बाबू विन्ध्यवासिनी प्रसाद वर्मा जी की आदमकद प्रतिमा स्थापित कर उनके व्यक्तित्व व कृतित्व का उस पर उल्लेख किया जाता ताकि लोग अपने गौरवमयी इतिहास, विरासत व पहचान से भली भांति जान सकें और अपने जीवन को उत्प्रेरित कर सकें.

पत्रकार वार्ता में विन्ध्वासिनी पार्क का नाम बदले जाने का निर्णय अविलम्ब वापस लेने,  पार्क के मुख्य द्वार पर बाबू विन्ध्यवासिनी प्रसाद वर्मा जी की आदमकद प्रतिमा स्थापित किया जाय और उनके जीवन-कृतित्व का पूर्ण विवरण दर्ज किये जाने की मांग की गई.

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