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जिला अस्पताल के न्यू ओपीडी ब्लाक में मनकक्ष समेत मानसिक रोग कार्यक्रम के दो नये कक्षों का शुभारंभ

गोरखपुर. मानसिक अवसाद से ग्रसित मरीजों को आत्मघाती कदम उठाने से रोकने के लिए जिला अस्पताल के न्यू ओपीडी ब्लाक में मनकक्ष का शुभारंभ कर दिया गया है। यहां अवसाद से ग्रसित लोग नैदानिक मनोवैज्ञानिक से अपने दिल की बात खुल कर करेंगे और अपनी समस्या का समाधान भी पाएंगे।

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत यहां कमरा संख्या 50 में मनकक्ष चलेगा तो अवसाद ग्रसित रोगियों की ओपीडी भी न्यू ब्लाक के ही कमरा संख्या 49 और 51 में चलेगी। इन तीनों कक्षों का जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. राजकुमार गुप्ता और मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डा. श्रीकांत तिवारी ने शुक्रवार को उद्घाटन किया।

कार्यक्रम के तहत हेल्पलाइन नंबर 9336929266 भी जारी किया गया है जिस पर सोमवार से शनिवार तक सुबह 8.00 बजे से अपराह्न 2.00 बजे तक मनोवैज्ञानिक समस्याओं का समाधान पाया जा सकेगा।

सीएमओ ने बताया कि राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम है ‘आईये मिल कर आत्महत्या को रोकें . ’ आत्महत्या की रोकथाम और मोबाइल एडिक्शन पर नियंत्रण में मनकक्ष की अहम भूमिका होगी.

उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल के न्यू ओपीडी ब्लाक के कक्ष संख्या 49 में परामर्शदाता मनोचिकित्सक डा. अमित कुमार शाही, कक्ष संख्या 50 में नैदानिक मनोवैज्ञानिक रमेंद्र कुमार त्रिपाठी और कक्ष संख्या 51 में मनोरोगी सामाजिक कार्यकर्ता संजीव कुमार, साइकाट्रिक नर्स विष्णु शर्मा और कम्युनिटी नर्स प्रदीप वर्मा प्रत्येक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को सेवाएं देंगे।

परामर्शदाता मनोचिकित्सक डा. अमित कुमार शाही ने बताया कि विश्व में 8 लाख में से 1 व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है. एक आत्महत्या के पीछे 25 प्रयास होते हैं. पुरुषों में आत्महत्या की दर महिलाओं की तुलना में डेढ गुना ज्यादा है. हर 40 सेकेंड में एक आत्महत्या हो रही है. मनकक्ष लोगों के मन से अवसाद दूर कर आत्महत्या रोकने में कारगर होगा.

नैदानिक मनोवैज्ञानिक रमेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मनकक्ष में परामर्शदाता मनोचिकित्सक द्वारा भेजे गए मरीज आएंगे.  आवश्यकता पड़ने पर अवसादग्रसित व्यक्ति सीधे मनकक्ष में आ सकता है. हम ऐसे मरीजों को उचित परामर्श देंगे. हेल्पलाइन नंबर के जरिए भी मरीजों की काउंसिलिंग की जाएगी.

उन्होंने बताया कि कम नींद आना, ज्यादा सोना, उलझन, घबराहट, हीन भावना, जिंदगी के प्रति नकारात्मक सोच, एक ही विचार मन में बार-बार आना, एक ही कार्य को बार-बार करने की इच्छा होना, डर लगना, अनावश्यक शक होना, कानों में आवाज आना मानसिक रोग के लक्षण हैं। ऐसा लक्षण दिखने पर फौरन चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए.

इस अवसर पर जिला क्षय रोग अधिकारी डा. रामेश्वर मिश्रा, जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डा. एके प्रसाद, उप जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी सुनीता पटेल, जिला कार्यक्रम प्रबंधक पंकज आनंद, इंद्रदेव सिंह, मनीष तिवारी, अजय सिंह भी मौजूद रहे।

सीएमओ ने खुद करायी जांच

मनकक्ष में तनाव मापने का यंत्र भी स्थापित किया गया है। उद्घाटन के बाद सीएमओ ने खुद के तनाव के स्तर की जांच करायी। परामर्शदाता मनोचिकित्सक ने यंत्र से जांच के दौरान पाया कि सीएमओ तनावमुक्त हैं। तनावमुक्त होने पर मशीन की हरी बत्ती जल जाती है।

मानसिक रोगों पर हुयी चर्चा

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जिला अस्पताल परिसर में ही विशाल जनजागरूकता कार्यक्रम व शिविर का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बांसगांव के विधायक डा. विमलेश पासवान और विशिष्ट अतिथि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राहुल सिंह ने जनपद में अवसाद ग्रसित लोगों के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की सराहना की।

इस अवसर पर एसीएमओ डा. नीरज कुमार पांडेय, जिला मलेरिया अधिकारी डा. एके पांडेय, जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के मनोचिकित्सक डा. अमित कुमार शाही ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन नैदानिक मनोवैज्ञानिक रमेंद्र त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर सोशल वर्कर संजीव कुमार, साइकाट्रिक नर्स विष्णु शर्मा और कम्युनिटी नर्स प्रदीप वर्मा समेत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

23 हजार से ज्यादा मानसिक रोगी

मानसिक रोग कार्यक्रम के तहत ओपीडी और जिले भर में आयोजित शिविरों से एक वर्ष के भीतर करीब 23 हजार मानसिक रोगी चिन्हित किए गए हैं जिनमें से करीब 10 हजार ठीक हो चुके हैं और उनका फालो अप चल रहा है। मोबाइल की लत भी मानसिक रोग की श्रेणी में माना जा रहा है। ऐसे रोगियों का भी इलाज इस कार्यक्रम के तहत किया जाएगा जो इस लत से ग्रसित हैं।

यहां भी होता है मानसिक रोगियों का इलाज
प्रत्येक महीने के पहले मंगलवार को सरदारनगर, दूसरे मंगलवार को गोला, तीसरे मंगलवार को बांसगांव और चौथे मंगलवार को पाली में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी शिविर लगता है। इसके अलावा प्रत्येक महीने के पहले गुरुवार को डेरवा, दूसरे गुरुवार को पिपराईच, तीसरे गुरुवार को ब्रह्मपुर और चौथे गुरुवार को गगहा में शिविर लगा कर मानसिक रोगियों का इलाज किया जाता है। प्रत्येक शनिवार को जेल, सेल्टर होम, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, स्कूल, चयनित स्लम क्षेत्र या कार्यस्थल (इनमें से किसी एक स्थान पर) पर शिविर लगा कर काउंसिलिंग सत्र चलाया जाता है और मानसिक रोगियों को चिन्ह्त कर उनका इलाज किया जाता है।

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