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सात समुन्दर पार से आ रहे मेहमानों के स्वागत में सज-धज कर तैयार हुआ जोगिया

जोगिया (फाजिलनगर).  बारहवें ‘लोकरंग’ के लिए जोगिया गांव सज-धज कर तैयार हो गया है. यूं तो जोगिया गांव हर वर्ष लोकरंग के आयोजन के मौके पर लोक कलाकारों और देश के विभिन्न स्थानों से आने वाले साहित्यकारों, लेखकों, रंगकर्मियों के स्वागत में  तैयार होता है लेकिन इस बार की सज -धज अनूठी है क्योंकि गाँव में पहली बार विदेशी मेहमान आ रहे हैं. मारीशस, गयाना और सूरीनाम से.

ये मेहमान विदेश से जरूर आ रहे हैं लेकिन विदेशी नहीं हैं. ये तो हमारी ही जमीन से सैकड़ों वर्ष पहले गए गरीब-मजदूरों के वंशज है जो अपने पुरखों की जमीन पर सात समुन्दर पार संजोयी गई लोक गीत- संगीत-कला से परिचित कराने आ रहे हैं.

गाँव के लोगों ने जोगिया से लेकर फाजिलनगर ता पूरे रास्ते में बैनर -पोस्टर लगाये हैं. सडक की सफाई की है. गांव को सफ्फई कर चमका दिया है.

हर वर्ष गाजीपुर से चलकर जोगिया आने वाले सम्भावना कला मंच के कलाकार भी आपनी कलाकृतियों के साथ 10 अप्रैल की सुबह पहुँच गए.  पिछले 8 सालों से यह टीम ‘लोकरंग’ में शामिल हो रही है. इस टीम के कलाकार छोटे-छोटे गाँवो और कस्बों से आते हैं. ये लोक-कला की बनावट की समझ रखते हैं.  साथ ही साथ उसकी शब्दावलियों को भी जानते हैं जिसे वे अपने भिन्न-भिन्न कला-रूपों में उकेरते हैं, दिखाते हैं.

इन कला कलाकारों में से कुछ अध्यापक हैं और कुछ स्कूल-कॉलेजों-विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएँ हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जो स्वतंत्र कलाकार हैं। ‘सम्भावना कला मंच’ टीम के संयोजक डॉ. राजकुमार सिंह अपने एक साथी कलाकार के रूप में बताते हुए कहते हैं कि ‘एक कलाकार की कला के प्रति समर्पण ही है जो रवि कुमार चौरसिया जैसा हमारा साथी जो डब्लिन (आयरलैण्ड) से लौटते हुए घर ना जाकर सीधे हमारे साथ इस कार्यक्रम में शामिल हुआ है।’

‘सम्भावना कला मंच’ की टीम ने आज पूरे दिन गाँव की दीवारों पर कलाकृतियों को उकेरने का कार्य किया. मंच की सजावट से लेकर गाँव के बखारों, छतों, मुंडेरों पर भित्तिचित्रों को बनाया.  भित्ति चित्रों के साथ-साथ स्टालेशन आर्ट, पब्लिक आर्ट, स्कल्पचर आर्ट, लोक कला, फिटोग्राफी, कविता पोस्टर के साथ पूरे गाँव को कलागाँव का रूप दे दिया.

लोक कला, जहाँ मनोरंजन हैं वहाँ इसमें नयी अभिव्यक्तियाँ भी हैं. लोक कला में मानव जीवन के आवेग मुखर हो उठते हैं. लोक कलाओं में सुगमता व सरलता होती है और यही वह कारण है कि भिन्न-भिन्न देश की लोक कलाओं में भी हमें समानता देखने को मिलती है। और इसी वजह से ये सभी कलाकार लोक-कलाओं में आ रही फूहड़ता को लेकर चिंतित है।

‘सम्भावना कला मंच’ के सदस्य  भी इसकी गंभीरता को समझते हुए इस बार रंग, ब्रश, कैमरा के साथ इस फूहड़पन के विरोध में अपनी आवाज मिला रहे हैं. साथ ही साथ ये नौजवान अपने देश, समाज और समय को भी गंभीरता से देख और समझ रहे हैं. ये कलाकार अपनी और अपने जैसे तमाम लोगों की समस्याओं के साथ अपनी कलाकृतियों के साथ इस पूरे कार्यक्रम में उपस्थित हैं.

इस बार लोकरंग में शामिल साथी कलाकारों में डॉ. राजकुमार सिंह, सीमा सिंह, राजीव कुमार गुप्ता, सपना सिंह, एजाज अहमद, कृष्ण कुमार पासवान, रवि कुमार चौरसिया, मीरा वर्मा, नूपुर वर्मा, चंदन यादव, मृदुल चौधरी, निहाल सिंह, योगेश कुमार, राहुल यादव एवं उत्कर्ष सिंह शिरकत जार रहे हैं.

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