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केंद्र सरकार मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को 30 माह से नहीं दे रही है मानदेय

गोरखपुर। केंद्र पुरोनिर्धारित मदरसा (एसपीक्यईएम) आधुनिकीकरण योजना के तहत जिले के सैकड़ों व प्रदेश के हजारों शिक्षकों का करीब 30 माह का बकाया मानदेय केंद्र सरकार ने रोका हुआ है। रविवार को अखिल भारतीय मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ के बैनर तले मदरसा शिक्षकों की बैठक मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार में हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि शिक्षकों द्वारा केंद्र सरकार के खिलाफ विशाल धरना-प्रदर्शन 18 दिसंबर को जंतर-मंतर नई दिल्ली में किया जायेगा।

धरना-प्रदर्शन के जरिये मांग की जायेगी कि मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों का बकाया मानदेय जल्द दिया जाए, शिक्षकों को स्थायी करने के साथ ही केंद्र सरकार के बराबर उप्र सरकार द्वारा अंशदान दिया जाए और प्रतिमाह मानदेय दिए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

बैठक का संचालन करते हुए संघ के मंडल अध्यक्ष नवेद आलम ने कहा कि मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को केंद्र सरकार माहवार मानदेय नहीं दे पा रही है और इसी वजह से शिक्षकों का करीब 30-30 माह का मानदेय बकाया हो गया है। यह केंद्र सरकार का शिक्षकों पर जुल्म है। इससे शिक्षकों में बहुत गुस्सा है।

संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुस्लिम रज़ा खान ने कहा कि शिक्षकों को रोजी-रोटी, चिकित्सा समेत तमाम दुश्वारियों से दो चार होना पड़ रहा हैं। जिंदगी चलाना बहुत मुश्किल हो गया है। इन्हीं शिक्षकों पर मदरसों में हिन्दी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी पढ़ाने का दारोमदार है। ऐसे में सरकार का रवैया बेहद गैर जिम्मेदाराना है।

संघ के प्रदेश संयोजक बदरे आलम अंसारी ने कहा कि मदरसों में आधुनिक शिक्षा की वकालत करने वाली केंद्र व प्रदेश सरकार के कथनी और करनी में काफी अंतर देखने को मिल रहा हैं। दोनों सरकारें मदरसों में आधुनिकीकरण शिक्षा को बढ़ावा देने की बात तो करती हैं लेकिन मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को मानदेय देने में हीलाहवाली कर रही हैं।

अध्यक्षता संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मो. अहमद ने की।  इस मौके पर डा. मधु शाही, महजबी, अम्बरीन फातमा, गौसिया सुम्बुल, शीरीं फातमा, शबाना खातून, अब्दुस्सलाम, जावेद आलम, क्षमा श्रीवास्तव, अख्तर कमाल मेकरानी, फैजान अहमद, इरफ़ान खान, निसार अहमद, शहाबुल हसन, मो. आज़म, मो. हाशिम, जलालुद्दीन, मो. इरफ़ान, इश्तियाक अहमद, मेहताब, गौरी, जरीना खातून सहित तमाम शिक्षक मौजूद रहे।

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