जीएनएल स्पेशल पर्यावरण

एनजीटी की मानीटरिंग कमेटी ने हिरण्यवती, कुकुत्था, स्याही नदी की सेटेलाइट मैपिंग करने को कहा

कुशीनगर में हिरण्यवती नदी (फोटो-मनोज सिंह)

पूर्व कुलपति एवं पूर्वांचल नदी मंच के संयोजक प्रो राधेमोहन मिश्र ने तीनों नदियों और तालों की वर्तमान स्थिति के बारे में मानीटरिंग कमेटी को दी थी रिपोर्ट

गोरखपुर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा गठित ईस्टर्न यूपी रिवर्स एंड वाटर रिजरवार्यस मानीटरिंग कमेटी ने कुशीनगर की हिरण्यवती व कुकुत्था नदी, देवरिया में स्याही नदी, बलिया में सुरहा ताल, बहराइच जिले के बघेल ताल, संतकबीरनगर के बखिरा ताल की सेटेलाइट मैपिंग कर दो महीने में रिपोर्ट देने को कहा है। इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए कमेटी ने इन जिलों में डीएम या एडीएम स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का आदेश दिया है।

मानीटरिंग कमेटी ने यह आदेश गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं पूर्वांचल नदी मंच के संयोजक प्रो राधेमोहन मिश्र द्वारा इन नदियों और तालों पर अतिक्रमण, अविरलता में बाधा की शिकायत पर दिया है।

कमेटी की बैठक 13 मार्च की कमेटी के चेयरमैन सेवानिवृत्त न्यायधीश डीपी सिंह की अध्यक्षता में हुई थी।

कमेटी ने आदेश दिया है कि कुशीनगर, देवरिया, संतकबीरनगर, बहराइच में खुद डीएम अपनी अध्यक्षता में या एडीशनल डिस्ट्रिक मजिस्टेट की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करें। इस कमेटी में सिंचाई विभाग के इजीक्यूटिव इंजीनियर, जल निगम के इजीक्यूटिव इंजीनियर और डीएफओ शामिल होने चाहिए। इस कमेटी में जिलाधिकारी इस मुद्दे पर जानकार लोगों को भी शामिल कर सकते हैं। कमेटी 1359 फसली ( जमींदारी विनाश अधिनियम लागू होने के पहले एक जूलाई 1951 से 30 जून 1952 तक ) के आधार पर राजस्व रिकार्ड देखते हुए नदियों और तालों का सेटेलाइट मैपिंग कर दो महीने में रिपोर्ट तैयार कर मानीटरिंग कमेटी को देने का आदेश दिया गया है। इन जिलों में बनने वाली कमेटियां समय-समय पर अपनी कार्यवाही में प्रो राधेमोहन मिश्र को अवगत कराएंगी और उनसे सुझाव लेगी।

प्रो मिश्र ने मानीटरिंग कमेटी को कुशीनगर की हिरण्यवती व कुकुत्था नदी, देवरिया में स्याही नदी, बलिया में सुरहा ताल, बहराइच जिले के बघेल ताल, संतकबीरनगर के बखिरा ताल की वर्तमान स्थिति पर एक रिपोर्ट दी थी। उनका कहना था कि कुशीनगर में बुद्धकालीन ऐतिहासिक हिरण्यवती व कुकुत्था नदी लुप्त होने के कगार पर है। दोनों नदियों में वर्षो से पानी नहीं है। प्रशासन द्वारा कुशीनगर में मनरेगा के बजट से खुदाई करायी गई है और घाट बनाए गए हैं लेकिन इससे हिरण्यवती नदी को अवरिल बनाने में मदद नहीं मिली है। यह नदी कसया में बकिया नाला, रामकोला के पास स्थित पपउर में झरिहा नाला और इसके पहले कई बड़े तालों से जुडी है लेकिन इन स्थानों पर नदी का प्रवाह क्षेत्र अतिक्रमण का शिकार है। नदी अपने इन जल स्रोतों से कट गई है जिसके कारण नदी जलविहीन है।

पडरी बाज़ार के पास स्याही नदी ( फोटो-मनोज सिंह )

 

इसी तरह देवरिया की स्याही नदी एक दशक से अधिक समय से पूरी तरह सूख गई है और स्थानीय नागरिक भाकपा माले नेता छोटेलाल कुशवाहा के नेतृत्व में नदी को बचाने के लिए आंदोलन चला रहे हैं। श्री कुशवाहा ने छह जनवरी को देवरिया जिले के बंगरा बाजार के समीप पड़री बाजार के एमजी पब्लिक स्कूल के प्रांगण में में ‘ स्याही नदी बचाओ, जीवन- बचाओ महापंचायत ’ का आयोजन किया था जिसमें प्रो राधेमोहन मिश्र, पूर्वांचल नदी मंच से जुड़े पत्रकार मनोज कुमार सिंह शामिल हुए थे। प्रो मिश्र ने स्थानीय नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर स्याही नदी के सूख जाने की रिपोर्ट मानीटरिंग कमेटी को दी जिस पर कमेटी ने देवरिया जिले के डीएम से रिपोर्ट मांगी है।

इसी तरह बलिया जिले के सुरहा ताल, संतकबीरनगर जिले के बखिरा ताल और बहराइच के बघेल ताल के बारे में प्रो मिश्र ने मानीटरिंग कमेटी से शिकायत की थी कि इन तीनों तालों के वेटलैंड पर अतिक्रमण हो रहा है। इन्हें संरक्षित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।

Leave a Comment

aplikasitogel.xyz hasiltogel.xyz paitogel.xyz