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‘ पेरियार के सांस्कृतिक आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ाने की जरूरत ’

गोरखपुर. सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्रान्ति के अग्रदूत पेरियार इरोड वेंकट रामासामी नायकर के 140 वीं जयंती के अवसर पर दलित साहित्य एवं संस्कृति मंच द्वारा प्रेमचंद पार्क में 17 सितम्बर को विचार गोष्ठी और कहानी पाठ का आयोजन किया गया.

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में विचार गोष्ठी “सांस्कृतिक आंदोलन एवं पेरियार” का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता कवि हरिशरण गौतम, पूर्व मंडलायुक्त एवं संयोजक अनु जाति जनजाति संगठनों का संयुक्त मोर्चा ने किया.

मुख्य वक्ता डॉ चन्द्र भूषण अंकुर, विशिष्ट वक्ता डॉ अनामिका एवं बीज वक्तव्य डॉ अलख निरंजन का रहा. इस सत्र को उपर्युक्त वक्ताओं के अतिरिक्त ध्रुव राम बौद्ध, राजेश साहनी, प्रदीप कुमार विक्रांत, कृपा शंकर आदि ने भी सम्बोधित किया.

सभी वक्ताओं ने पेरियार के सांस्कृतिक आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ाने की जरूरत को एक स्वर से स्वीकार किया.

द्वितीय सत्र में कथाकार अमित कुमार ने अपनी कहानी “अब निर्मला नहीं दफनायी जाएगी” का पाठ किया. कहानी सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार मदन मोहन ने किया.

मंच पर वरिष्ठ नाटककार राजाराम चौधरी, कवि देवेंद्र आर्य तथा डॉ अनामिका रहे. सभी ने कहानी पर अपने सारगर्भित विचार रखे. इनके अतिरिक्त आनंद पांडेय, हरिशरण गौतम, श्रवण कुमार ने भी कहानी पर अपनी बात रखी. वक्ताओं ने कहानी को बहुत ही मार्मिक, सामयिक, पठनीय तथा घरवापसी औऱ मॉब लीचिंग जैसी घट रही घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में सार्थक एवं सफल कहानी बताया.

दोनों सत्रों का संचालन कवि सुरेश चन्द ने किया। धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक महेंद्र कुमार गौतम ने दिया.

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कवि रामचन्द्र प्रसाद त्यागी, डॉ असीम सत्यदेव, सतीश कुमार राणा, एडवोकेट श्याम मिलन, गोरख प्रसाद सिद्धार्थ, चन्द्रिका प्रसाद भारती, इन्द्र जीत प्रसाद, रामआसरे बौद्ध, रघुपति प्रसाद सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे.

कार्यक्रम 4.30 से प्रारंभ हुआ और 7.30 तक रिमझिम बूंदों के साथ निर्बाध गति से चलता रहा.

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