स्वास्थ्य

अब बसंतपुर यूपीएचसी का होगा ‘एनक्वास’ मूल्यांकन

भारत सरकार की दो सदस्यों की टीम करेगी जांच, अंतिम तैयारियों में जुटा स्वास्थ्य विभाग 

गोरखपुर. प्रदेश में सबसे पहले नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्वास) का सर्टिफिकेशन पाने वाले जनपद के डेरवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की तर्ज पर शहरी स्वास्थ्य केंद्र (यूपीएचसी) बसंतपुर का भी मूल्यांकन होने जा रहा है। बसंतपुर यूपीएचसी सूबे में सबसे पहले एनक्वास प्रमाणन के लिए परखा जाने वाला यूपीएचसी बनने जा रहा है।

भारत सरकार की दो सदस्यों की टीम 27 और 28 नवम्बर को 1500 बिंदुओं पर इस यूपीएचसी का परीक्षण करेगी। मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डा. श्रीकांत तिवारी के निर्देश पर सभी राष्ट्रीय कार्यक्रमों के नोडल अधिकारी व कंसल्टेंट यूपीएचसी के निरीक्षण के पूर्व अंतिम तैयारियों में जुटे हुए हैं।

सीएमओ ने बताया कि इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च से एसोसिएट प्रोफेसर डा. पंकज तलरेजा और रोहतक के जिला राजकीय चिकित्सालय की क्वालिटी कंसल्टेंट इंदु चौहान यूपीएचसी का मूल्यांकन करने आ रही हैं।

दो दिन तक यह टीम एनक्वास के मानकों पर यूपीएचसी की जांच करेगी। अगर जांच में 70 फीसदी से ज्यादा अंक प्राप्त होता है तो बसंतपुर एनक्वास प्रमाणित प्रदेश की पहली यूपीएचसी बन जाएगा। उन्होंने बताया कि शहरी स्वास्थ्य मिशन के नोडल अधिकारी व अपर मुख्य चिकित्साधकारी (एसीएमओ) डा. आईवी विश्वकर्मा, एसीएमओ डा. नंद कुमार, एसीएमओ डा. नीरज कुमार पांडेय, मंडलीय कार्यक्रम प्रबंधक अरविंद पांडेय, जिला कार्यक्रम प्रबंधक पंकज आनंद, शहरी स्वास्थ्य समन्वयक सुरेश सिंह चौहान, जिला क्वालिटी कंसल्टेंट डा. मुस्तफा और उनके सहयोगी विजय समेत सभी संबंधित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम और स्वयंसेवी संगठन पापुलेशन इंटरनेशनल सर्विसेज (पीएसआई) व विश फाउंडेशन की टीम को एक-एक बिंदु पर बेहतर तैयारी सुनिश्चित करने को कहा गया है। 

प्रदेश की कायाकल्प टॉपर है बसंतपुर

बसंतपुर यूपीएचसी कायाकल्प एवार्ड स्कीम में पूरे उत्तर प्रदेश में टॉपर रही है। बसंतपुर को कुल 83 फीसदी अंक शहरी स्वास्थ्य केंद्र की श्रेणी में प्राप्त हुए हैं। इस यूपीएचसी की प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. पल्लवी श्रीवास्तव व उनकी टीम के प्रयासों से यहां काफी बदलाव हुए हैं।

बसंतपुर यूपीएचसी पर शुगर, बीपी समेत कई प्रमुख बीमारियों की वह दवाएं भी निशुल्क उपलब्ध हैं जो प्राइवेट में मिलती हैं। इसके लिए डा. पल्लवी ने कई मौकों पर खुद स्टोर पहुंच कर इन दवाओं को स्क्रीन किया। अगर कोई दवा नहीं मिली तो उच्चाधिकारियों से अनुरोध कर इंतजाम करवाया। वह अपने यूपीएचसी के कर्मचारियों को लगातार प्रोत्साहित करती रहती हैं कि वे टीम भावना के साथ काम करें। डा. पल्लवी व उनकी टीम किसी भी ट्रेनिंग व इवेंट को नहीं छोड़ती है। यूपीएचसी परिसर की साफ-सफाई के लिए सभी लोग समर्पित रहते हैं।

डा. पल्लवी ने उच्चाधिकारियों के मार्गदर्शन में फ्रंट डेस्क समेत अलग-अलग विंग को साज-सज्जा के साथ संचलित करवाया। उन्होंने यूपीएचसी से बाहर निकल कर 20-25 साफ-सफाई, बीमारियों के प्रति जागरूकता, किशोरी स्वच्छता सरीखे आउटसाइड कैंपेन चलवाए जिससे यूपीएचसी का समुदाय से जुड़ाव हुआ।

रोचक है बसंतपुर यूपीएचसी का सफर

वर्ष 2015 से पहले बसंतपुर यूपीएचसी का संचालन बसंतसराय में एक हेल्थ पोस्ट के तौर पर होता था जहां एक दिन में बमुश्किल 20-25 मरीज सेवा लेते थे। राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (एनयूएचएम) के तहत इस हेल्थ पोस्ट को अपग्रेड कर वर्ष 2015 में कुल 23 हेल्थ पोस्ट को यूपीएचसी का दर्जा दे दिया गया। हांलाकि तब भी यूपीएचसी का संचालन एक पुरानी बिल्डिंग में होता था जिसकी दशा बहुत अच्छी नहीं थी।

यहां से ओपीडी के अलावा बमुश्किल परिवार नियोजन कार्यक्रमों, गर्भवती महिलाओं की जांच और टीकाकरण के कार्यक्रम चल पाते थे।वर्ष 2017 में सिफ्सा द्वारा वित्तपोषित ई-यूपीएचसी कार्यक्रम के तहत गोरखपुर और इलाहाबाद की पांच-पांच यूपीएचसी को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पेपरलेस करने के लिए चयनित किया गया।

गोरखपुर में बसंतपुर के अलावा दीवान बाजार, नथमलपुर, शाहपुर और शिवपुर सहबाजगंज यूपीएचसी को भी पेपरलेस किया गया। इन यूपीएचसी पर मरीजों का पंजीकरण, परामर्श, लैब टेस्ट और फार्मेसी सबकुछ आनलाइन हो गया। ई-यूपीएचसी कैटेगरी में भी बसंतपुर का पूरी प्रदेश में पहला स्थान रहा है। 2017 तक यहां की ओपीडी 50-70 तक पहुंचने लगी। इसी बीच यूपीएचसी का चयन प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना (पीएमजेवाई) के तहत हो गया जिससे यहां के भौतिक प्रगति के साथ-साथ अन्य सभी व्यवस्थाएं काफी सुदृढ़ हुयीं।

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