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कांग्रेस ने विंध्यवासिनी पार्क (व्ही पार्क) का नाम बदले जाने पर आपत्ति की, आन्दोलन की चेतावनी

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू विंध्यवासिनी प्रसाद वर्मा

गोरखपुर. गोरखपुर के विंध्यवासिनी पार्क (व्ही पार्क) का नाम बदले जाने पर कांग्रेस ने आपत्ति जताते हुए आन्दोलन की चेतावनी दी है.

कांग्रेस के प्रदेश महासचिव विश्वविजय सिंह ने एक बयान में कहा है कि एक पखवारे पहले गोरखपुर में ही पण्डित रामप्रसाद बिस्मिल की स्मृति में स्थापित संग्रहालय और पुस्तकालय की बिल्डिंग ढहा कर प्रशासन ने कब्जा कर लिया.अब स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू विंध्यवासिनी प्रसाद वर्मा के नाम पर बने पार्क का नाम प्रशासन ने मनमाने तौर पर बदल दिया.

श्री सिंह ने कहा कि विंध्यवासिनी बाबू यानी बाबू विंध्यवासिनी प्रसाद वर्मा आजादी की लड़ाई के अप्रतिम योद्धा थे. गांधीजी के आह्वान पर ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने के लिए उस वक़्त हजारों रुपये महीने की वकालत की चली चलायी प्रैक्टिस छोड़कर जंगे आजादी में कूद पड़ने वाले विंध्यवासिनी बाबू इस इलाके में बड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, उनकी एक आवाज पर आस-पास के जिलों के लोग अंग्रेजी सरकार के खिलाफ घरों से निकल पड़ते थे. स्वाधीनता संग्राम के दिनों में गांधीजी की गोरखपुर में दो सभा हुई थी. एक बाले मियां के मैदान में और दूसरी आज के व्ही पार्क में. व्ही पार्क तब खाली मैदान था, जहां मौजूद एक टीले को मंच की जगह इस्तेमाल किया गया था. माइक टिकाने के लिए सभा के व्यवस्थापक विन्ध्यवासिनी बाबू के घर से एक मेज गया था जो बिस्मिल संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया था. विंध्यवासिनी बाबू बाद में नगरपालिका के चेयरमैन बने और आज नगर निगम का जो कार्यालय है, उसे वहां स्थापित किया. चेयरमैन रहते हुए उन्होंने शहर में कई प्रसिद्ध इमारतें तामीर करायीं.  महात्मा गांधी ने अपनी आत्म कथा ‘सत्य के प्रयोग’ में गोरखपुर के सिर्फ एक व्यक्ति, विंध्यवासिनी बाबू की चर्चा की है जिससे पता चलता है कि आजादी की लड़ाई में उनका योगदान कितना महत्वपूर्ण है। उनके पुत्र स्व. अष्टभुजा प्रसाद वर्मा श्यामदेउरवा से विधायक हुए जिन्होंने कई शिक्षण संस्थानों की स्थापना की.

कांग्रेस के महासचिव विश्वविजय सिंह ने कहा कि इन दोनों घटनाओं, पहले बिस्मिल भवन को ढहाना और अब विंध्यवासिनी पार्क का नाम बदलना, यह साबित करता है कि यह सरकार और इसके मुखिया आजादी की लड़ाई और उसके नायकों से कितनी नफरत पाले बैठे हैं. वे नाम बदलकर आजादी के संघर्ष को खारिज करना चाहते हैं, लेकिन यह सम्भव कहां है. सरकार के इस कृत्य के खिलाफ गोरखपुर के लोग लड़ेंगे और ठीक से लड़ेंगे.

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