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विन्ध्यवासिनी पार्क का नाम बदले जाने का विरोध तेज, आन्दोलन के लिए संघर्ष मोर्चा बना

विन्ध्यवासिनी पार्क का नाम बदले जाने के विरोध में बैठक करते सामाजिक, राजनितिक कार्यकर्ता

गोरखपुर. गोरखपुर के विंध्यवासिनी पार्क (व्ही पार्क) का नाम बदले जाने का विरोध तेज होता जा रहा है. हिन्दू मुस्लिम एकता कमेटी ने 21 नवम्बर को इस मुद्दे पर ज्ञापन दिया तो गोलघर में प्रबुद्ध नागरिकों, राजनीतिक-सामाजिक संगठनों के नेताओ, कार्यकर्ताओं ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष वीरेन्द्र नायक की अध्यक्षता में बैठक कर विरोध जताया. बैठक में कहा गया कि यह कृत्य आजादी के आंदोलन को खारिज करने का कुत्सित प्रयास है जिसे गोरखपुर का नागरिक समाज किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा।

बैठक में तय किया गया कि नाम बदले जाने का आदेश वापस नहीं हुआ तो व्यापक स्तर पर जनांदोलन छेड़ा जाएगा। इसके लिए संघर्ष मोर्चा का गठन करते हुए संचालन समिति भी बनाई गई जो कल बैठक कर आन्दोलन की प्रभावी रणनीति तय करेगी।

बैठक में लोगों ने  कहा कि विंध्यवासिनी बाबू यानी बाबू विंध्यवासिनी प्रसाद वर्मा आजादी की लड़ाई के अप्रतिम योद्धा थे। गांधीजी के आह्वान पर ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने के लिए उस वक़्त हजारों रुपये महीने की वकालत की चली चलायी प्रैक्टिस छोड़कर जंगे आजादी में कूद पड़ने वाले विंध्यवासिनी बाबू इस इलाके में बड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उनकी एक आवाज पर आस-पास के जिलों के लोग अंग्रेजी सरकार के खिलाफ घरों से निकल पड़ते थे। स्वाधीनता संग्राम के दिनों में गांधीजी की गोरखपुर में दो सभा हुई थी। एक बाले मियां के मैदान में और दूसरी आज के व्ही पार्क में। व्ही पार्क तब खाली मैदान था, जहां मौजूद एक टीले को मंच की जगह इस्तेमाल किया गया था। माइक टिकाने के लिए सभा के व्यवस्थापक विन्ध्यवासिनी बाबू के घर से एक मेज गया था जो बिस्मिल संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया था।

विंध्यवासिनी बाबू बाद में नगरपालिका के चेयरमैन बने और आज नगर निगम का जो कार्यालय है, उसे वहां स्थापित किया। चेयरमैन रहते हुए उन्होंने शहर में कई प्रसिद्ध इमारतें तामीर करायीं। महात्मा गांधी ने अपनी आत्म कथा ‘सत्य के प्रयोग’ में गोरखपुर के सिर्फ एक व्यक्ति, विंध्यवासिनी बाबू की चर्चा की है जिससे पता चलता है कि आजादी की लड़ाई में उनका योगदान कितना महत्वपूर्ण है।

बैठक में कांग्रेस के प्रदेश महासचिव विश्वविजय सिंह, वरिष्ठ नेता जितेंद्र राय, सिविल बार एसोसिएशन के मन्त्री अजय कुमार शुक्ल, अनुज अस्थाना एडवोकेट, रवि श्रीवास्तव, अजय शंकर श्रीवास्तव, शिवाजी शुक्ल, हृदय नारायण भट्ट, ओम नारायण पान्डेय, कांग्रेस जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान, आशुतोष तिवारी, अरुण अग्रहरी, चित्रगुप्त महासभा के अध्यक्ष अनूप लाल श्रीवास्तव, हिन्दू मुस्लिम एकता कमिटी के संरक्षक शाकिर सलमानी, गौतम श्रीवास्तव, अयोध्या साहनी, विंध्यवासिनी बाबू के पौत्र सती वर्मा, प्रदीप रंजन वर्मा, वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार सिंह समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.

हिन्दू मुस्लिम एकता कमेटी ने 21 नवम्बर को इस मुद्दे पर ज्ञापन दिया और कहा कि यदि पार्क का नाम पूर्ववत नहीं किया गया तो वे अनशन करेंगे. ज्ञापन देने वालों में कमेटी के संरक्षक शाकिर अली सलमानी, महासचिव विजय कुमार श्रीवास्तव, जद यू नेता गौतम लाल, वासिर अली, रत्नेश श्रीवास्तव, कैश अख्तर सलमानी आदि के नाम प्रमुख हैं.

भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई ) की 21 नवम्बर को हुई बैठक में विंध्यवासिनी पार्क का नाम बदले जाने का विरोध करते हुए आन्दोलन करने का निर्णय लिया गया.

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