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मच्छर जनित रोगों और उससे बचाव के बार में लोगों की जानकारी कम : रूचि झा

विश की प्रोग्राम मैनेजर रूचि झा

डेंगी की रोकथाम हेतु मीडिया एडवोकेसी कार्यक्रम
गोरखपुर। मच्छर जनित रोगों और उनसे बचाव के बारे में लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। अभी भी लोग मच्छर जनित रोगों और उससे बचाव के बारे में ज्यादा नहीं जानते। लोग अमूमन बुखार को गंभीरता से नहीं लेते हैं और अपनी सहूलियत के हिसाब से इलाज कराते हैं। इसी कारण डेंगी जो आसाीन से उपचार योग्य है, गंभीर स्थिति उत्पन्न कर दतेा है।

यह बातें (विश वाधवानी इनिशिएटिव फार सस्टेनेबल हेल्थकेयर ) की प्रोग्राम मैनेजर रूचि झा ने 25 जुलाई को शहर के एक होटल में डेंगी की रोकथाम हेतु मीडिया एडवोकेसी कार्यक्रम में कही। उन्होने कहा कि विश हाशिए पर रह रहे लोगों तक प्राथमिक चिकित्सा सेवाओं की पहुंच एवं गुणवत्ता में सुधार के लिए कार्य कर रहा है। इसके लिए हम नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। फाउंडेशन आसाम, दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्थान और यूपी में राज्य सरकारों, अन्तरराष्ट्रीय  एजेंसियों, निजी क्षेत्र की सहभागिता सेकार्य कर रहा है। यूपी में गोरखपुर में दो वर्ष से डेंगी के बचाव, नियंत्रण एवं प्रबंधन की कम्यूनिटी बेस्ड परियोजना संचालित कर रहा है। इसके तहम हम जल्द केस रिपोर्टिंग और उसका प्रबंधन, फ्रंट लाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का क्षमता निर्माण,उ सामुदायिक जागरूकता, व्यहार परिवर्तन संचार, अंतर क्षेत्रीय सहयोग, निरंतर चिकित्सा शिक्षा गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि डेंगी की रोकथाम पर कार्य शुरू करने के पहले हमने सर्वे किया तो पाया कि शहर में बुखार के मामले में इलाज के लिए अधिकतर लोग गैरसरकारी चिकित्सकों के पास जाते हैं। हमने सर्वे में पाया कि बुखार के इलाज में लोगों का 5 से 50 हजार तक खर्च हो जाता है। हमने सर्वे के माध्यम से डेंगी के बारे में लोगों से जानकारी प्राप्त की तो पाया कि जागरूकता का स्तर बहुत कम है। सिर्फ 10 फीसदी लोग बुखार की पहचान के बारे में बता पाए जबकि 93 फीसदी लोगों को यह नहीं पता था कि डेंगी किस मच्छर से होता है। केवल 13 फीसदी लोगों को डेंगी के दो तरह के लक्षणों के बारे में पता जबकि 53 फीसदी पांच लक्षणों के बारे में बता पाए।

सर्वे में यह भी पाया गया कि शहर में गंदे पानी व ठहरे हुए पानी का जमाव अत्यधिक है जो डेंगी के लिए उपयुक्त है। सेवा प्रदाता डेंगी के टीटमेंट प्रोटोकाल से प्रशिक्षित नहीं हैं और गैरसरकारी सेक्टर में प्लेटलेट्स को लेकर बेवजह का हौव्वा खड़ा किया जाता है। नोटिफाएबल डिजीज होने के बावजूद इसकी रिपोर्टिंग बहुत कम हो रही है।

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी आई वी विश्वकर्मा

रूचि झा ने कहा कि संस्था ने गोरखपुर शहर में रोकथाम के लिए कृषि, पशुपालन, पीडब्ल्यूडी, आईसीडीएस सहित सात विभागोें के साथ मिलकर काम शुरू किया है। संस्थान ने 11 हजार घरों , 63 स्कूलों, 24 कालेज में डेंगी और इससे बचाव के बारे में लोगों को बताया है। कुल 1,65,430 लोगों तक हमने अपनी पहुंच बनायी है। डेंगी के पहचान और इलाज के लिए सेवा प्रदाताओं को टैब प्रदान किया है। हम लैब सर्विसेज को बेहतर करने, डेंगी मरीजों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ने का भी काम कर रहे हैं।

कार्यशाला में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी आईवी विश्वकर्मा ने मीडिया कर्मियों के सवालों को जवाब दिया। उन्होंने मीडिया कर्मियों से अपील की कि वे लोगों का मच्छर जनित रोगों के बारे में जागरूक करने में सहयोग करें। इस मौके पर जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी ओपीजी राव, विश के कार्यक्रम प्रबंधक अंजुम गुलवेज, सेंटर फार एडवोकेसी एंड रिसर्च के गोरखपुर-बस्ती मंडल के मंडलीय समन्वयक वेद प्रकाश पाठक आदि उपस्थित थे।

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