साहित्य - संस्कृति

शायरों ने अपने कलाम से जंगे आजादी के शहीदों को याद किया

गोरखपुर। इस्लामिया कॉलेज ऑफ कॉमर्स के प्रांगण में 14 अगस्त की शाम जंगे आजादी के शहीदों को याद किया गया जिन्होंने मुल्क के लिए अपनी जान की कुर्बानी पेश की .

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सजी इस शाम में शहर और आसपास के कवियों और शायरों ने अपना कलाम पेश किया.

शायर वसीम मजहर ने तिरंगे की शान में ‘नफरत के पुजारी को उभरने नहीं देंगे, हम देश किसी तरह बिखरने नहीं देंगे, हम सींचते रहते हैं अपने लहू से हम रंग अपने तिरंगे का उतरने नहीं देंगे’ को पेश कर सभी में जोश भरा।

युवा शायर मिन्नतउल्लाह ने ‘दिया बनो तो पतिंगा का नसीब हो मुझको, नहाना चाहूं तो गंगा नसीब हो मुझको, मेरी आरजू है और तमन्ना तो बस यही है यूं मरूं कि तिरंगा नसीब हो मुझको’, सौम्या यादव ने ‘चलूंगी गिरूंगी इस पथ पर मैं कोशिश करूंग ये हर पल’, भावना द्विवेदी ने ‘शत-शत वन्दन अभिनन्दत करती उनका, मातृभूमि पर प्राण न्योछावर है जिनका, भारत मां के बेटो की क्या बात करूं सागर को घाट, पर्वत को कर दे तिनका’, शाकिल अली शाकिर ने ‘मिलजुल के यहां रहते हैं सब हिन्दू-मुस्लमान, हम इस मुल्क पर कुर्बान-हम इस मुल्क पर कुर्बान’, कमालुद्दीन कमाल ने ‘मेरे वतन की इसी से शान है दुनिया में, मेरे तिरंगे को कोई झुका नहीं सकता’ खुर्शीद आलम कुरैशी ‘ए पाक जरा सुन ले कानों को खोलकर, कश्मीर हमारा है हमारा ही रहेगा’ और रहबर नवाज ने ‘मजहब का नहीं है यह लोगों की अमानत है चल मुल्क को हम आईन दिखाते हैं’ जैसे कलामों से देश की शान से रू-ब-रू कराया।

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