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मुज़फ्फरनगर और मेरठ में पुलिसिया हिंसा के पीड़ितों के परिजनों से मिलीं प्रियंका गांधी

जहां जहाँ अन्याय हुआ है, वहां वहां हम खड़े होंगे, सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के जज की निगरानी में हो जांच, बिना तथ्य और जांच किये बिना प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं : प्रियंका गाँधी 

दिल्ली/लखनऊ । कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी ने शनिवार को मुजफ्फरनगर और मेरठ में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन के बाद पुलिसिया हिंसा के शिकार हुए पीड़ित परिवारों से मुलाकात कीं।

मुज़फ्फरनगर में उन्होंने मौलाना असद रज़ा हुसैनी से मुलाकात की। मौलाना असद रज़ा मुज़फ्फरनगर के नामचीन लोगों में से हैं. देश -विदेश में शिक्षा जगत में उनका नाम बड़े अदब से लिया जाता है। वे गरीब और अनाथ बच्चों को मुफ़्त में मदरसे में शिक्षा देते हैं। पुलिस ने उनको बुरी तरह से पीटा है। उनके हाथ तीन जगह से बुरी तरह टूट गए हैं। मदरसे से पुलिस 17 बच्चों को उठा कर ले गयी, जिसमें से ज्यादातर नाबालिग बच्चे हैं। गिरफ्तार किए गए बच्चों को भी पुलिस ने बर्बर तरीके से मारापीटा है। अभी भी ज्यादातर बच्चे हिरासत में हैं। मौलाना असद रजा का मेडिकल तक नहीं हुआ है।

महासचिव ने हिंसा में मारे गए नूर मोहम्मद के पत्नी सन्नो से खालापार्क दक्षिण में उनके घर पर मुलाकात कीं। नूर मोहम्मद दिहाड़ी मजदूर थे और अपने घर में इकलौते कमाने वाले थे। उनके मां-बाप की पहले ही मौत हो चुकी थी। मारे गए नूर मोहम्मद की पत्नी सन्नो के पेट में सात माह का बच्चा है। घर पर बाप की राह जोह रही 15 माह की बेटी है। नूर मोहम्मद की मौत का एफआईआर जबरन पुलिस ने अज्ञात के नाम दर्ज कर दिया। अभी तक उनकी बेवा सन्नो पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के लिए ऑफिसों का चक्कर लगा रहीं हैं।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने रुकैया परवीन से मुलाकात कीं। रुकैया और उनकी बहन की फरवरी में शादी है। उनके घर पर पुलिस रात के वक्त पहुंची और पूरे घर में तोड़फोड़ मचा दी। परिजनों का आरोप है कि दहेज का सामान और कैश भी पुलिस लूट कर ले गयी। रुकैया परवीन ने जब गिड़गिड़ाते हुए पुलिस से गुजारिश की तो पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। पुलिस ने इतनी बुरी तरह से पीटा है कि उसके सर में 16 टांके लगे हैं।

प्रियंका गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जहां जहाँ अन्याय हुआ है हम वहां खड़े होंगे। उन्होंने नूर मोहम्मद की पत्नी सन्नो के बारे में कहा कि बड़ी दर्दनाक दर्दनाक स्थिति है। 22 साल की लड़की 7 माह की प्रैग्नेंट है। गोद में छोटी सी बच्ची है। उसके पति नूर मोहम्मद को हिंसा में मार दिया गया। वह एकदम अकेले है।

उन्होंने कहा अगर कोई हिंसा किया है तो पुलिस कार्यवाही करे, उसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन पुलिस खुद घर में घुसकर मारपीट कर रही है। एक लड़की की शादी होने वाली थी उसके यहां मारपीट हुई है। तोड़फोड़ हुई है। उस लकड़ी को भी मारा पीटा है, उसके सर में 16 टांके लगे हैं।

उन्होंने कहा कि पुलिस का काम क्या है जनता की सुरक्षा और न्याय दिलाना लेकिन यहां तो उल्टा हुआ है तो जहां-जहां उल्टा हुआ है उसके खिलाफ हम लड़ेंगे।

महासचिव प्रियंका गांधी मेरठ में ओम साई धाम कालोनी में पुलिसिया हिंसा में मारे गए मो अलीम पुत्र श्री हबीब, आसिफ पुत्र श्री ईद उल हसन, मोहसिन पुत्र मौ अहसान, आसिफ पुत्र सईद और जहीर पुत्र मुन्शी के परिजनों से मुलाकात कीं। उन्होंने कहा कि मेरठ में सीएए के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन में मारे गए सभी मृतक बेहद गरीब परिवार से आते हैं। हिंसा मेंं मारे गए अलीम होटल पर वेटर का काम करते थे। उनके परिजनों का कहना है कि वे अपने घर लौट रहे थे कि रास्ते में पुलिस ने गोली मार दी। आसिफ रिक्शा चलाते थे। मोहसिन, आसिफ और जहीर दिहाड़ी मजदूरी करके किसी तरह अपना परिवार पालते थे। जहीर के परिजनों का दावा है कि जहीर गली में समान लेने गए थे पर वे लौट कर नहीं आ पाएं, पुलिसिया हिंसा में वे मारे गए।

महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि वे हर उस व्यक्ति के साथ खड़ी हैं, जिनको सताया गया है। जिनके साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों से वे मेरठ में मिलीं हैं उनके साथ सरासर अत्याचार हुआ। मारे गए लोगों के परिवारों के लोगों का एफआईआर तक दर्ज नहीं हो पाई है। परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक नहीं दी गई जोकि उनका कानूनी हक है। इस तरह की नाइंसाफी और अत्याचार हुआ है।

उन्होंने कहा कि सीएए के खिलाफ हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद हुई पुलिसिया हिंसा के खिलाफ उन्होंने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा था और चार प्रमुख मांग कीं थीं। हम फिर से उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से अपनी मांगें दोहरा रहें हैं. उ0प्र0 सरकार के गृह विभाग और डीजीपी द्वारा तुरन्त आदेश जारी करके पुलिस और सरकार द्वारा किये जा रहे गैर कानूनी, हिंसात्मक और आपराधिक कार्यवाही को तुरन्त रोका जाए।  मौजूदा हाईकोर्ट के जज या सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के जज की निगरानी में कानूनी ढंग से शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लगाये गये आरोपों की सत्यता और तथ्य की निष्पक्ष जांच का आदेश दिया जाए। न्यायिक प्रक्रिया पूरी किये बिना सम्पत्तियों को सीज करना या सम्पत्तियों की कुर्की सम्बन्धी प्रक्रिया पर तुरन्त रोक लगाई जाए और शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी जो निर्दोष हैं उन पर किसी तरीके का आपराधिक और गैर कानूनी कार्यवाही न की जाए।

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