स्मृति

‘ प्रगतिशील आंदोलन के अग्रणी विचारक थे प्रो नामवर सिंह ’

गोरखपुर. प्रख्यात आलोचक-विचारक नामवर सिंह के निधन पर 20 फरवरी की दोपहर हिंदी विभाग में शोक सभा आयोजित की गई. शोक सभा शोक सभा में साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो विश्वनाथ तिवारी ने कहा कि नामवर सिंह ने जिस तरह अपने लेखन, निर्भीकता और रचनात्मकता से हिंदी साहित्य को प्रभावित किया , वैसा कोई दूसरा उदहारण नहीं मिलता.

उन्होंने कहा कि नामवर सिंह जैसे लोग जैसे लोग जो जगह छोड़ जाते हैं, वह जल्दी नहीं भरा करती है.प्रो तिवारी ने कहा कि प्रो नामवर सिंह आलोचना को साहित्य के केंद्र में ले आये,. उन्होंने आलोचना को रचना की तरह पठनीय बनाया.

शोक सभा में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो अनिल कुमार राय ने शोक प्रस्ताव पढ़ा और इसके बाद एक मिनट मौन रखकर नामवर सिंह को श्रद्धांजलि दी गई.

शोक प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘ नामवर सिंह एक ऐसे वैचारिक योद्धा थे जिनमें हिंदी समाज, साहित्य और चिंतन के प्रति एक गहरी प्रतिबद्धता मौजूद रही है. वे सीमित अर्थ में आलोचक या साहित्यकार नहीं थे. वे हिंदी में लोकतांत्रिक और समाजवादी विचारों की व्यापक स्वीकृति के लिए सतत संघर्षशील प्रगतिशील आंदोलन के अग्रणी विचारक थे. उन्होंने अपनी रचनात्मक भूमिका से हिन्दी की साहित्यिक सर्जना को समुचित विचार और दृष्टि के साथ शिक्षितजनों के बीच स्वीकृति दिलाने का महत्वपूर्ण कार्य किया. उनका विशिष्ट अवदान यह यह है कि उन्होंने स्वतंत्र्योत्तर भारतीय समाज और राजनीति की जनपक्षधर शक्तियों को अपने विचार, लेखन और तर्क प्रवण वक्तृता से निरंतर मजबूत किया. दरअसल, प्रो नामवर सिंह समकालीन समाज में एक सच्चे जन शिक्षक की भूमिका में बराबर सक्रिय रहे हैं. हिंदी विभाग की यह शोक सभा प्रो नामवर सिंह की अनथक  साहित्य-साधना के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती है.  ’

हिंदी विभाग के शिक्षकों और छात्रों की इस शोक सभा में विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो के सी लाल, प्रो रामदरश राय, कथाकार मदन मोहन, प्रेमचंद साहित्य संस्थान के सचिव मनोज कुमार सिंह,  इतिहास विभाग के प्रोचंद्रभूषण अंकुर, उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो रजिउर्रहमान,डॉ साजिद हुसैन, डॉ विक्रम मिश्र आदि उपस्थित थे.

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