पर्यावरण राज्य

छोटी नदियों की दुर्दशा पर कुम्भ में उठी आवाज, मशाल जुलूस निकला

इलाहाबाद. प्रदूषण, शोषण और अतिक्रमण से छोटी नदियो को बचाने हेतु जल विरादरी से जुड़े लोगों और संगठनों ने कुम्भ मेला में आवाज उठाई . प्रदेश के विभिन्न जनपदों से 108 छोटी नदियों के जल लाकर कुम्भ में सभी ने संकल्प लिया और नदियो एवं अन्य प्राकृतिक जल श्रोतो को बचाने हेतु देश-प्रदेश में संगठित अभियान चलाएंगे. शुक्रवार को मशाल जुलुस भी निकाला गया.

जल विरादरी से जुड़े लोगों ने कुम्भ के दौरान भी सरकार के गंगा की निर्मलता के दावे के विरुद्ध प्रत्यक्ष रूप में दिख रही गंगा की दुर्दशा पर घोर आश्चर्य एवं दुःख प्रकट किया गया. बैठक में कुम्भ में जुटे संतो से नदियो को बचाने हेतु समाज एवं सरकार को साफ संदेश देने की अपील की गयी.

आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष एवं पूर्वांचल नदी मंच के विश्व विजय ने गुरुवार को दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि गांव की गंगा को बचाये बिना देश की गंगा को नही बचाया जा सकता. उन्होंने 27 फरवरी से शुरू हो रही पूर्वांचल नदी यात्रा में सबसे शामिल होने की अपील की.

शुक्रवार को कुम्भ मेले में छोटी नदियों को बचाने के लिये आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्वविजय के नेतृत्व में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आये लोगो ने मशाल जुलुस निकालकर कुम्भ में आये ऋषि मुनियों से नदी बचाने में सहयोग मांगा.

मशाल जुलूस में बृजेन्द्र प्रताप (प्रयागराज), संदीप शर्मा (सुल्तानपुर),सौरभ सिंह (बाँदा), जीपी शुक्ला व दुर्विजय सिंह (गोराखपुर), शभेंदृ प्रताप (गाजीपुर), हर्ष मिश्रा (कानपुर), बृजेश सिंह कुशवाहा (बस्ती), समुद्र गुप्त मौर्य (अयोध्या), पुत्तुल दीदी, निशा अग्रहरी, सुषमा वर्मा (प्रयागराज) मौजूद रहे.

मशाल जुलूस में शामिल लोगों ने कहा कि गंगा को साफ करना है तो छोटी नदियों को बचाना होगा. विभिन्न अखाड़ो के महंतों ने नदी बचने के अभियान में अपनी सहभागिता निभाने के लिए सहमति दी।जुलस के दौरान लोग ‘ छोटी नदी नही बचाओगे तो कुम्भ कहां लगाओगे ‘ के नारे लगा रहे थे.

विश्वविजय ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों से कुल 108 छोटी नदियों के जल लाकर इस कुम्भ में सभी ने संकल्प लिया है है कि नदियों के अस्तित्व को बचाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य करेंगे. जब तक नदियां प्रदूषण मुक्त और अपने पुराने अस्तिव में नही आ जाती तब तक मंच चैन से नही बैठेगा.
मशाल जुलूस का समापन गोवर्धनपु पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य अनन्त श्री विभूषित स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ जी महाराज की उपस्थिति में हुआ. पीठाधीश्वर ने सभी जल योद्धाओं को इस पुनीत कार्य के लिये अपना सहयोग देने की बात कही.

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