स्वास्थ्य

‘रीच यूपी एप ’ से रोजाना होगी इंसेफेलाइटिस की निगरानी

सीएमओ कार्यालय के प्रेरणा श्री सभागार में टेबलेट प्राप्त करने वाले चिकित्साधिकारियों व स्टाफ नर्स की टीम को एप संचालन के लिए शुक्रवार को प्रशिक्षित भी किया गया। इस एप में दवा की उपलब्धता, मानव संसाधन की उपलब्धता और उपकरणों की स्थिति की रोजाना फीडिंग की जाएगी। एईएस और उच्च बुखार का मरीज एडमिट होने पर और डिस्चार्ज होने पर उसका पूरा विवरण भी भरा जाएगा।
सीएमओ ने बताया कि कुल 23 टेबलेट वितरित किए गए हैं और एप को लेकर बारीक प्रशिक्षण दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इस प्रशिक्षण में गैर सरकारी संगठन पाथ का प्रशिक्षण संबंधी सहयोग लिया। एप में जानकारी फीड होने के बाद शासन स्तर से सभी फैक्ट्स की सीधी निगरानी की जाएगी और जहां भी गैप्स दिखेंगे, उनका अतिशीघ्र समाधान होगा। इससे इंसेफेलाइटिस उन्मूलन में काफी मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि ईटीसी, मिनी पीकू और पीकू के मजबूत होने के कारण इंसेफेलाइटिस को नियंत्रित करने में मदद मिली है। इंसेफेलाइटिस के कुल 136 केस इस वर्ष जनवरी से अब तक रिपोर्ट हुए हैं जिनमें से 61 केसेज का इलाज ईटीसी, मिनी पीकू और पीकू पर ही हो गया। 75 मरीज बीआरडी मेडिकल कालेज गए। धीरे-धीरे यह संख्या और भी कम होती जाएगी। उन्होंने बताया कि इस साल एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से कुल 05 जबकि जापानीज इंसेफेलाइटिस (जेई) से 02 मौतें हुई हैं। हम व्यवस्था को  और सुदृढ़ कर इसे शून्य तक लाना चाहते हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला मलेरिया अधिकारी डा. एके पांडेय, जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी ओपीजी राव, जेई-एईस कंसल्टेंट सिद्धेश्वरी सिंह, पाथ संस्था से जिला समन्वयक राहुल तिवारी, प्रवेश उपाध्याय, अर्चना, खूशबू, स्वास्थ्य विभाग से दुर्गेश, आदिल प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

आसान है फीडिंग
प्रशिक्षण के प्रतिभागी और बड़हलगंज सीएचसी के अधीक्षक डा. वीके राय ने बताया कि एप में फीडिंग काफी आसान है। इसमें आफलाइन फीडिंग की भी व्यवस्था है। सबसे अच्छी बात यह है कि एप से दवा, उपकरण और मानव संसाधन की भी निगरानी होगी। इससे इन बिंदुओं से जुड़ी समस्याओं का तात्कालिक समाधान हो जाएगा। कौड़ीराम पीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. संतोष वर्मा ने बताया कि अब केस इंवेस्टीगेशन फार्म (सीआईएफ) आन लाइन भरा जाएगा। काम पेपरलेस होगा और आउटपुट अच्छा आएगा।

‘ रीच यूपी एप’  को जानिए
• गोरखपुर बस्ती मंडल के 104 ईटीसी को सरकार की ओर से टेबलेट दिए गए हैं जिनमें यह एप फीड होगा।
• एप में मरीज को भर्ती करते समय और डिस्चार्ज करते समय उसका केस स्टडी फार्म (सीआईएफ) भरा जाएगा।
• रेफर होने पर मरीज का सीआईएफ आनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा।
• जिला और मंडल स्तर एक नोडल अधिकारी एप की निगरानी रखेंगे।
• उपकरणों, दवाओं और मानव संसाधन की कमी ट्रैक कर दुरुस्त की जा सकेगी।
• सेंट्रल लैब में लाए जाने वाले मरीजों की सीरम की रिपोर्ट भी आन लाइन फीड हो जाएगी।

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