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सपा जिलाध्यक्ष का आरोप: बीआरडी में लिक्विड आक्सीजन की खरीद में हर महीने पांच लाख का घोटाला

बीआरडी मेडिकल कालेज में इंसेफेलाइटिस व अन्य बीमारियों से बच्चों की मौत की सूचना छिपाने का भी आरोप लगाया

गोरखपुर। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव ने बीआरडी मेडिकल कालेज में लिक्विड आक्सीजन की खरीद में हर माह पांच लाख रूपए के घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने बीआरडी मेडिकल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर इंसेफेलाइटिस व अन्य बीमारियां से बच्चों की मौत की सूचना भी छिपाने और मेडिकल बुलेटिन न जारी करने का आरोप लगाया है।

श्री यादव ने दो अगस्त को एक पत्रकार वार्ता में कहा कि वर्ष 2014 से आक्सीजन कांड होने तक बीआरडी मेडिकल कालेज में पुष्पा सेल्स के माध्यम से राजस्थान की कम्पनी आईनाक्स से 16.50 रूपए प्रति क्यूबिक मीटर की दर से लिक्विड आक्सीजन की आपूर्ति हो रही थी। आक्सीजन कांड के बाद अब उसी आईनाक्स से 19.39 रूपए प्रति क्यूबिक मीटर लिक्विड आक्सीजन की खरीद की जा रही है।

श्री यादव का कहना था कि मेडिकल कालेज में हर महीने 1.20 लाख से 1.50 लाख क्यूबिक घन मीटर लिक्विड आक्सीजन की खरीद होती है। इस तरह हर महीने पांच लाख का आक्सीजन घोटाला हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी टेंडर के यह सब कार्य किया गया है। उन्होंने इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।

सपा जिलाध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि बीआरडी मेडिकल कालेज में इंसेफेलाइटिस व अन्य बीमारियों से बच्चों की मौत की सूचना छिपायी जा रही है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में बीआरडी मेडिकल कालेज में प्रतिदिन भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या, मृत्यु की संख्या और इलाज के बाद ठीक होकर जाने वाले बच्चों की संख्या की जानकारी प्रतिदिन हेल्थ बुलेटिन जारी कर जिला प्रशासन, सीएमओ और मीडिया को दी जाती थी। योगी सरकार ने 10 अगस्त 2017 को आक्सीजन कांड के बाद इस पारदर्शी व्यवस्था को खत्म कर दिया और इसकी सूचना अब मीडिया से तो छिपायी ही जा रही है, जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को भी नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने इलाज व दवा के मद में भी घोटाला किए जाने का आरोप लगाया।

श्री यादव ने शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति में भाजपा सरकार पर जातिवाद करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसमें कायस्थ समाज सहित अन्य पिछड़े वर्ग के अधिवक्ताओं की अनदेखी की गई है। उन्होंने सहजनवां के हरदी गांव में राजकीय आईटीआई का शिलान्यास जलमग्न भूमि पर करने, शिलान्यास के दो वर्ष बाद भी फर्टिलाइजर के न बन पाने, गोरखपुर शहर में जाम व जलजमाव और खराब बिजली व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रदेश सरकार पर बाढ़ से बचाव को कोई कार्य न करने तथा पिछले वर्ष बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई किसानों को अभी तक नहीं करने का आरोप लगाया।

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