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मण्डलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी में उठी गन्ना किसानों की समस्या

गोरखपुर. मण्डलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी में भारतीय किसान यूनियन (भानु) के जिलाध्यक्ष रामचन्द्र सिंह ने गन्ना किसानों की समस्या को प्रमुखता से उठाया.

यह गोष्ठी गोरखपुर के एनेक्सी भवन सभागार सर्किट हाउस परिसर में हुई जिसमें मुख्य अतिथि के बतौर सूबे के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, प्रमुख सचिव (कृषि) अमित मोहन के साथ-साथ गोरखपुर और आजमगढ़ मण्डल के अधिकारी, कर्मचारी के साथ साथ किसान मौजूद रहे।

गोष्ठी में भारतीय किसान यूनियन (भानु) के जिलाध्यक्ष रामचन्द्र सिंह ने कुशीनगर के किसानों की समस्या उठाते हुए कहा कि जनपद कुशीनगर गन्ना बाहुल्य क्षेत्र है और जनपद कुशीनगर का अधिकतम किसान गन्ने की खेती के ऊपर ही निर्भर हैं. गन्ना इनका नकदी फसल है और इसी गन्ने के फसल के सहारे कुशीनगर का किसान अपने घरों की सभी जरूरतों को पूरा करता है. जनपद कुशीनगर में आज से दस साल पहले दस चीनी मिलें हुआ करती थी मगर पिछले सरकारों की गलत नीतियों के वजह से पांच चीनी मीलों को औने पौने दामों में बेच दिया या उसे घाटा दिखा कर बन्द कर दिया गया. इस समय जनपद में सिर्फ पांच चीनी मिलें चालू है और इन मिलों के सहारे जनपद कुशीनगर के किसानों का गन्ना पेराई नही हो पा रहा है और किसान अपने गन्ने को औने पौने दामों पर बेचने के लिये मजबूर हो रहे हैं. यदि जनपद कुशीनगर में एक -दो और चीनी मिल चालू हो जाता तो काफी हद तक किसानों के गन्ने की पेराई की समस्या से समाधान मिल सकता है.

उन्होंने कहा कि जनपद कुशीनगर की लक्ष्मीगंज चीनी मिल को चलवाने के लिये हमारे द्वारा लगातार 61 दिन धरना-प्रदर्शन किया गया था. यदि लक्ष्मीगंज बन्द चीनी मिल चालू कर दिया जाय तो काफी हद तक इस परिक्षेत्र के किसानों के गन्ने की पेराई से सम्बन्धित समस्या का समाधान हो सकता है. गन्ने के पर्ची की समस्या इस पेराई सत्र में बहुत ही दयनीय रही. अभी जून का महीना शुरू हो गया है लेकिन किसानों का गन्ना अभी भी खेतों में पड़ा सूख रहा है. हमारा सुझाव है कि गन्ने की पर्ची बेसिक कोटा पर ध्यान न देकर किसानों के गन्ने का पड़ताल ठीक से कराया जाय और उस आधार पर कोटा सुनिशिचित किया जाय क्योकि पर्ची की आपूर्ति ठीक न होने के वजह से बहुत से किसान अपने गन्ने को क्रेशर पर बेचने के लिये मजबूर हो रहे है या दूसरे व्यक्ति की पर्ची पर अपना गन्ना गिराने पर मजबूर हो रहे है जिसके वजह से उनका बेसिक कोटा सही नही होगा.

श्री सिंह ने कहा कि जनपद कुशीनगर के किसान पेराई सत्र 2018-19 से आने वाले पेराई सत्र 2019-20 में 25% ज्यादा गन्ना बोया है इसका भी ध्यान देना अतिआवश्यक है। जनपद कुशीनगर की जो चीनी मिलें चालू है उन्हें आदेश किया जाय कि पेराई सत्र 2019-20 के लिये जबतक अपने आवंटित क्षेत्र के गन्ने की पेराई नही कर लेता है तबतक बाहरी क्षेत्र के गन्ने की पेराई न किया जाय|
जून का महीना शुरू हो गया है और गर्मी जोरों शोरों से बढ़ गया है और अभी तक नहरों में पानी नही आया है और किसानों का गन्ना पानी बिना सूख रहा है और साथ ही साथ खरीफ की फसल के लिए धान के पौधों को भी तैयार करना है और उसमें भी पानी की जरूरत है. इसको ध्यान में रखते हुए तत्काल नहरों में पानी की व्यवस्था सुनिशिचित किया जाय.

उन्होंने कहा कि कुशीनगर के कप्तानगंज तहसील अंतर्गत ग्रामसभा – लालाछपरा (लक्ष्मीगंज) में स्थित पशु चिकित्सालय का भवन जर्जर होकर गिरने के कगार पर पहुँच गया है लेकिन जिला प्रशासन उसपर ध्यान नही दे रहा रहा है. अस्पताल के भवन का निर्माण कराकर वहां पर डॉक्टर भी उपलब्ध कराया जाय जो जनहित में होगा. सरकार किसानों को बिजली और पानी मुफ्त में दे. नहरों की साफ सफाई ठेकेदारों द्वारा जेसीबी से कराया जा रहा है. इसे मजदूरों द्वारा कराया जाय ताकि हेड से टेल तक पानी सुचारुरूप से पहुँच सके.

 श्री सिंह ने मांग की कि छुट्टा पशु आज भी किसानों के फसलों को नुकसान पहुंचा रहे है. साथ ही साथ इनके वजह से आये दिन दुर्घटना भी हो रही है. इस पर भी सरकार को ध्यान देने की जरूरत है.

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