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जेएचवी सुगर मिल पर 45 करोड़ का गन्ना मूल्य बकाया, 10 हजार से अधिक किसान परेशान

महराजगंज। गड़ौरा स्थित जेएचवी सुगर मिल पर किसानों का दो सत्रों का करीब 45 करोड़ रूपया बकाया है. इसमें से सत्र 2014-15 का 22 करोड़ और 2017-18 का 23 करोड़ बकाया है. बकाया गन्ना मूल्य भुगतान न होने से प्रभावित किसानों की संख्या 10 हजार से अधिक है. चीनी मिल के डिफाल्टर होने के कारण उसे साफ्ट लोन भी नहीं मिल रहा है जिसके कारण बकाया गन्ना मूल्य भुगतान होने की संभावना नजर नहीं आ रही है.

जेएचवी सुगर मिल में गन्ना मूल्य के समय से भुगतान होने की संख्या लगातार बनी हुई है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चीनी मिल पर 2014-15 सत्र का 22 करोड़ रूपया बकाया है. इस बकाए का भुगतान नहीं हुआ और पिछले सत्र 2017-18 का 23 करोड़ का और गन्ना मूल्य बकाया हो गया। चीनी मिल के पास अब चीनी का स्टाक सिर्फ 2 से 3 हजार क्विंटल ही रहा गया है. चीनी मिल यदि इसे बेच कर गन्ना मूल्य का भुगतान भी कर दे तो वह सिर्फ एक करोड़ बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान ही हो सकेगा.

जेएचवी सुगर मिल का शिलान्यास 1989 में हुआ था और इसने वर्ष 1998 में काम करना शुरू कर दिया. इससे इस क्षेत्र मेें न सिर्फ गन्ने का रकबा बढ़ा बल्कि किसानों को अपनी आय बढ़ने का भरोसा हुआ. इस चीनी मिल परिक्षेत्र में करीब 10 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है। घुघली और फरेंदा की चीनी मिल के बंद होने से महराजगंज जिले के गन्ना किसान गड़ौरा और सिसवा चीनी मिल पर ही निर्भर हैं, सिसवा चीनी मिल परिक्षेत्र में करीब 15 से 16 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है.

चीनी मिल शुरू होने के बाद कुछ वर्षों तक गन्ना किसानों का भुगतान समय से होता रहा है लेकिन जल्द ही कुप्रबंधन और सरकार की गलत नीतियों के कारण गन्ना मूल्य बकाया की समस्या होने लगी. गन्ना मूल्य बकाया बढ़ता रहा और यह आज 45 करोड़ तक हो गया.

गड़ौरा चीनी मिल प्रबंधन इस बकाए के लिए कम जिम्मेदार नहीं है. उसने पडरौना की बंद चीनी मिल को खरीदने में करीब 60 करोड़ का निवेश कर दिया। प्रबंधन पडरौना चीनी मिल को न चला सका और न ही वहां गन्ना किसानों व कर्मचारियों के बकाए का भुगतान कर सका. इसके साथ ही चीनी मिल प्रबंधन ने गड़ौरा चीनी मिल में पावर प्लांट लगाने का कार्य शुरू किया जो समय से पूरा नहीं हो सका. अभी भी इस पावर प्लांट के टांसमिशन के लिए तार खींचे जा रहे हैं. यहा कार्य जनवरी तक पूरा होने की उम्मीद है। जनवरी में ट्रायल सफल होने के बाद पावर प्लांट शुरू हो सकेगा तक जाकर इस चीनी मिल की आय बढ़ेगी.

जेएचवी सुगर मिल पर अधिकतर छोटे किसानों का गन्ना मूल्य बकाया है. वर्ष 2014-15 का करीब 22 करोड़ रूपया बकाया है जिसमें 10 हजार ऐसे किसान हैं जिनका बकाया 10 हजार या उससे कम है. बड़े किसान दबाव डालकर अपना भुगतान करा लेते हैं जबकि छोटे किसानों का न चीनी मिल परवाह करता है न प्रशासन। किसानों का कोई विश्वसनीय संगठन न होने के कारण वह आंदोलन भी नहीं कर पा रहे हैं.

बैंकों का लोन समय से भुगतान न होने के कारण यह चीनी मिल डिफाल्टर श्रेणी में है. इसलिए सरकार द्वारा साफ्ट लोन देकर किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान कराने का प्रयास भी सफल नहीं है. सरकार 5 फीसदी ब्याज पर चीनी मिलों को बैंकों के जरिए साफ्ट लोन दिला रही है ताकि वह गन्ना मूल्य का भुगतान कर सकें लेकिन प्रदेश की लगभग एक तिहाई चीनी मिलें डिफाल्टर हैं इसलिए उन्हें साफ्ट लोन नहीं मिल रहा है.

45 करोड़ का बकाया होने के बावजूद जेएचवी सुगर मिल को करीब 60 लाख क्विंटल गन्ना 2018-19 के लिए आवंटित किया गया है. चीनी मिल और गन्ना आवंटित करने की मांग कर रहा है.  उसका तर्क है कि ज्यादा गन्ना आवंटित होने पर वह अधिक चीनी बनाकर बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कर पाएगा.

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