Templates by BIGtheme NET
Home » Tag Archives: जन संस्कृति मंच

Tag Archives: जन संस्कृति मंच

मार्क्स का चिंतन सिर्फ आर्थिक नहीं सम्पूर्ण मनुष्यता का चिंतन है: रामजी राय

marx and our time 3

गोरखपुर। मार्क्स ने मुनष्य को एक समुच्चय में नहीं एक सम्पूर्ण इकाई के रूप में समझा और कहा कि वह एक ही समय में आर्थिक, राजनीतिक, दार्शनिक, सांस्कृतिक होता है। उसे टुकड़ो-टुकड़ों में अलग-अलग नहीं देख सकते। सम्पूर्णता की अवधारणा मार्क्स की यह अवधारणा उस समय के दर्शन में मौजूद नहीं थी। मार्क्स का चिंतन सिर्फ आर्थिक चिंतन नहीं सम्पूर्ण ...

Read More »

गोरख की कविता मुक्ति स्वप्न की कविता है- अवधेश

gorakh smriti samaroh_allahabad 3

इलाहाबाद में गोरख स्मृति दिवस इलाहाबाद , 31 जनवरी . परिवेश और जन संस्कृति मंच की ओर से इलाहाबाद छात्र संघ भवन में 29 जनवरी को जन कवि गोरख पांडेय की पुण्यतिथि के  मौक़े पर ‘ गोरख स्मृति दिवस ’  का आयोजन हुआ। आयोजन दो सत्रों में बँटा हुआ था। पहला सत्र था ‘ कविता के सामाजिक सरोकार ’ और दूसरा सत्र था- काव्य गोष्ठी ।  जसम संयोजक अंशुमान कुशवाहा और परिवेश संयोजक विष्णु प्रभाकर ने अतिथियों का स्वागत किया। गोरख के एक गीत ‘ समाजवाद बबुवा धीरे धीरे आयी ’ के गायन के साथ ही ‘ परिवेश ’ पत्रिका के गोरख केन्द्रित प्रवेशांक ...

Read More »

प्रो. विनय कंठ ने शिक्षा को जनपक्षीय बनाने के लिए संघर्ष किया

pr vinay kanth

प्रो. विनय कंठ को जसम की श्रद्धांजलि पटना (बिहार), 29 दिसम्बर. जाने-माने शिक्षाविद् और पटना विश्वविद्यालय में गणित के चर्चित शिक्षक प्रो. विनय कंठ के निधन पर जन संस्कृति मंच ने गहरा शोक जाहिर करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। प्रो कंठ का 25 दिसंबर को 66 साल की उम्र में दिल्ली के एसआरआई हाॅस्पीटल में निधन हो गया था। ...

Read More »

कभी धूमिल नहीं होगी कुँवर नारायण की स्मृति

कुंवर नारायण

 कवि कुंवर नारायण को जन संस्कृति मंच  की श्रद्धांजलि मुक्तिबोध ने उन्हें पसंद किया और उनके दूसरे कविता-संग्रह ‘परिवेश : हम-तुम’ की समीक्षा करते हुए लिखा था कि वह ”अंतरात्मा की पीड़ित विवेक-चेतना और जीवन की आलोचना” के कवि हैं। इससे पहले मुक्तिबोध मस्तिष्काघात के चलते अपने अंतिम समय में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में लगभग एक महीने तक ...

Read More »

जनकवि दुर्गेंद्र अकारी विजेंद्र अनिल ने जनजागरण का काम किया

रामनिहाल गुंजन

जन संस्कृति मंच ने विजेंद्र अनिल और दुर्गेंद्र अकारी की स्मृति में गोष्ठी आयोजित की   आरा (बिहार ) . 3 नवंबर 2007 को जनगीतकार और कहानीकार विजेंद्र अनिल का निधन हुआ था और 5 नवंबर 2012 को जनकवि दुर्गेंद्र अकारी का। विजेंद्र अनिल के दसवें स्मृति दिवस और अकारी जी के पांचवें स्मृति दिवस पर विगत 5 नवंबर को जन ...

Read More »

पटना में कोरस के ‘ अजदिया भावेले ‘ में नूर जहीर का कहानी और सविता सिंह का कविता पाठ

ajdiya bhawle 5

पटना,  1 नवम्बर. जन संस्कृति मंच की इकाई कोरस ने 28-29 अक्टूबर को पटना के बीआइए सभागार में ‘अजदिया भावेले’  कार्यक्रम के तहत कहानी और कविता पाठ तथा ‘साहित्य में समकालीन महिला दृष्टि ’ पर सेमिनार का आयोजन किया. अब इस कड़ी में 5 नवम्बर को प्रसिद्ध कथाकार शिवमूर्ति की कहानी ‘ कुच्ची का कानून ‘ का नाट्य मंचन होगा. ...

Read More »

‘ क्रांति के रागिनी हम त गईबे करब ’

ramta ji

आरा में जनकवि रमाकांत द्विवेदी ‘रमता’ जन्मशती कार्यक्रम का आयोजन आरा (बिहार ), 1 नवम्बर.  हिंदी और भोजपुरी के जनकवि रमाकांत द्विवेदी ‘रमता’ जन्मशती के अवसर पर 29 अक्टूबर को आरा के रेड क्रॉस सोसाइटी के हॉल में रमता-स्मरण का आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम जन संस्कृति मंच के जनभाषा समूह की तरफ से आयोजित था। कार्यक्रम का आरंभ रमता जी ...

Read More »

′′ कुछ तो किरदार नए मंच पर लाए जाएं और नाटक को सलीके से निभाया जाए ’’

veereniyat 2 -1

हर दिल अजीज कवि वीरेन डंगवाल की स्मृति में जन संस्कृति मंच का सालाना काव्य-जलसा वीरेनियत-2 नई दिल्ली, 1 नवम्बर. हर दिलअजीज कवि वीरेन डंगवाल की स्मृति में होने वाले जन संस्कृति मंच के सालाना काव्य-जलसे का यह दूसरा आयोजन था. 29 नवम्बर की शाम 6 बजे से ही श्रोता और कवि हैबिटेट सेंटर, दिल्ली के गुलमोहर सभागार पर जुटाने ...

Read More »

प्रसिद्ध कथाकार शिवमूर्ति बने जसम के प्रदेश अध्यक्ष

jasam rajya sammelan 3

  नफरत,  हिंसा और अविवेक के खिलाफ जसम का प्रदेश सम्मेलन सम्पन्न लखनऊ, 16 अक्टूबर। जन संस्कृति मंच का दो दिवसीय सातवाँ राज्य सम्मेलन आजमगढ़ के शिब्ली एकेडमी में सम्पन्न हो गया। इसमें देवरिया, गोरखपुर, आगरा, झांसी, ललितपुर, बलिया, इलाहाबाद, लखनऊ, सुल्तानपुर, जौनपुर मऊ, आजमगढ़ आदि जिलों से कवि, लेखक, कलाकार, रगकर्मी,  बुद्धिजीवी आदि ने हिस्सा लिया। हिन्दी के प्रसिद्ध ...

Read More »

‘ प्रेम, संघर्ष व श्रम से मिलकर बनी है तश्ना आलमी की शायरी ‘

तश्ना आलमी स्मृति सभा

स्मृति सभा  आयोजित कर संस्कृति कर्मियों, लेखकों ने  तश्ना आलमी को याद किया लखनऊ, 22 सितम्बर। कवि के लिए जरूरी है कि वह पहले इंसान हो। इंसानियत ही किसी कवि को बड़ा बनाती है। तश्ना आलमी ऐसे शायर थे जिनमें इन्सानियत कूट-कूट कर भरा था। जैसा उनका जीवन था, सच्चाइयों से भरा वैसी ही उनकी शायरी थी। कोई फांक नहीं। ...

Read More »